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MP//Rewa//Bhopal सूचना का अधिकार एक सत्याग्रह का साधन है – RTI एक्टिविस्ट पंक्ति जोग // RTI में महिला सहभागिता विषय पर 28 वें ज़ूम मीटिंग वेबीनार का हुआ आयोजन // राहुल सिंह ने महिला आवेदकों को दिया नए साल का तोहफा – अब मध्यप्रदेश में महिलाओं के लिए जीआरडी डेस्क पर सूचना आयोग करेगा तत्काल सुनवाई।।

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सूचना का अधिकार और महिला सहभागिता विषय पर 28वें राष्ट्रीय ज़ूम मीटिंग वेबीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने किया जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु, माहिती अधिकार गुजरात पहल संस्था की संस्थापक एवं आरटीआई हेल्पलाइन प्रारंभ करने वाली आरटीआई एक्टिविस्ट पंक्ति जोग, उत्तराखंड से आरटीआई एक्टिविस्ट विभा नामदेव सहित दर्जनों आरटीआई एक्टिविस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता, सिविल राइट्स एक्टिविस्ट आदि सम्मिलित हुए। 

    मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उड़ीसा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश आदि प्रदेशों से दर्जनों एक्टिविस्टों ने कार्यक्रम में भाग लिया और विषय पर अपने विचार रखें तथा समस्याओं का समाधान पाया।

  कार्यक्रम का संयोजन समन्वयक एवं प्रबंधन का कार्य आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता नित्यानंद मिश्रा, शिवेंद्र मिश्रा, अंबुज पांडे के द्वारा किया गया।

   सूचना का अधिकार एक सत्याग्रह का साधन है – पंक्ति जोग

   कार्यक्रम में गुजरात से पधारी सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट पंक्ति जोग ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2006 में माहिती अधिकार गुजरात पहल नामक संस्था की स्थापना की एवं साथ में उसी वर्ष एक लीगल आरटीआई हेल्पलाइन भी प्रारंभ किया। वर्ष 2001 में कच्छ में आए भूकंप ने पंक्ति जोग को अपनी विज्ञान से संबंधित ओसओनोग्राफी विषय में पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर किया और फिर वह सामाजिक क्षेत्र के कार्य मे लग गई। उन्होंने बताया कि प्रारंभ में उनके पास कोई व्यवस्था नहीं होती थी और वालंटियर आधारित कार्य प्रारंभ किया और इस प्रकार जनपद के ही स्थान का प्रयोग कर एक लैंडलाइन नंबर उपयोग करती थी। इसके बाद उन्होंने पहला लीगल आरटीआई हेल्पलाइन नंबर 9924085000 लांच किया जिसमें मात्र इनकमिंग कॉल आते हैं और लोग अपनी समस्याएं बताते हैं जिनका निदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि लीगल हेल्पलाइन नंबर में अब तक 10 लाख से अधिक कॉल आ चुके हैं और लोक सूचना अधिकारियों से लेकर आम जनमानस तक ने अपनी समस्याओं को रखा है और समाधान पाया है। पंक्ति ने बताया कि सूचना का अधिकार हेल्पलाइन एक हथियार नहीं बल्कि औजार की तरह है जिसके प्रयोग से समाज में लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने अकाउंटेबिलिटी और रिस्पांसिबिलिटी बनाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार एक सत्याग्रह का साधन है और यदि साधन का प्रयोग हम करते रहे तो हमारे सामाजिक स्तर और प्रशासनिक व्यवस्था में काफी सुधार आ सकता है। उन्होंने बताया कि आज इस आरटीआई हेल्पलाइन नंबर में साउथ इंडिया की कुछ भाषाओं को छोड़कर अन्य देश के सभी जगह हिंदीभाषी, गुजराती, मराठी, इंग्लिश आदि भाषा के लोग अपनी बात रखते हैं और समाधान पाते हैं। उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून मात्र कागज कट्ठा करने का नाम नहीं है बल्कि इससे हर सरकारी विभाग का कामकाज आम नागरिक की पहुंच में आ जाता है जिससे सरकारी विभागों की जिम्मेदारी बढ़ती है।

   आरटीआई ऑन व्हील्स हमारा सबसे बड़ा प्रयोग

   गुजरात से पधारी आरटीआई कार्यकर्ता पंक्ति जोग ने बताया कि उनका अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग आरटीआई हेल्पलाइन के बाद आरटीआई ऑन व्हील रहा है जिसे हम सामान्य तौर पर कानून की गाड़ी बोल सकते हैं। आरटीआई ऑन व्हील्स के द्वारा वह गुजरात सहित अन्य प्रदेशों में जगह-जगह जाकर आरटीआई कानून का प्रचार करते हैं और उन्हें और लोगों को बताते हैं कि किस प्रकार से आरटीआई का उपयोग कर वह अपने अधिकारों की माग कर सकते हैं। यहां तक कि उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक अलग से आरटीआई ऑन व्हील्स गाड़ी की व्यवस्था की है जिसमें पुस्तिकाएं, पत्रिकाएं, आरटीआई से संबंधित पोस्टर, पंपलेट और अन्य जानकारी के माध्यम जिसमे टीवी, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम जिसमे सीडी, कैसेट, लाउडस्पीकर सभी व्यवस्थाएं हुआ करती हैं इस आरटीआई ऑन व्हील्स से प्रचारित किया जा रहा है।

   आरटीआई हेल्पलाइन में महिलाओं के फोन कॉल्स का करते हैं विश्लेषण

   पंक्ति जोग ने बताया कि आरटीआई हेल्प लाइन में जो फ़ोन कॉल आते हैं उनमें पीड़ित महिलाओं के द्वारा किए जानेवाले कॉल का अलग से विश्लेषण किया जाता है और बाद में उनकी समस्याओं का अध्ययन किया जाता है जिससे महिलाओं को आरटीआई के प्रति और अधिक जोड़ा जा सके और उन्हें जागरूक बनाया जा सके। आरटीआई हेल्पलाइन में समाज और प्रशासन से जुड़ी हुई हर प्रकार की समस्याएं जिसमें खाद्य, मनरेगा, मजदूरी, किसानों की समस्याएं, पीड़ित महिलाओं की समस्याएं से लेकर लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी तक अपनी समस्याएं लेकर के आते हैं जिनका समाधान किया जाता है। उन्होंने बताया कि वह राजस्थान, हिमांचल और गोवा में भी इस आरटीआई ऑन व्हील्स को लेकर आरटीआई कानून का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। आरटीआई कानून सशक्तिकरण के औजार की तरह उपयोग किया जा रहा है।

   रंजन और उषा बहन बनी आरटीआई कानून की स्पोक्सपर्सन

   पंक्ति जोग ने बताया कि उनके पास एक ऐसा मामला आया जिसमें उषा बहन नामक विकलांग और कमजोर महिला के द्वारा चलाए जाने वाले टेलीफोन बूथ को वहां की टेलीकॉम कंपनी ने तोड़ दिया था जिसके विषय में उषा बहन ने आरटीआई दायर कर जानकारी मांगी तो जानकारी नहीं दी गई जिसके बाद मामला आयोग में पहुंचा और आयोग ने पूरी जानकारी निकलवाई जिसमें वह आदेश भी जानने का प्रयास किया जिसके तहत टेलीफोन बूथ को हटाया गया था। इसके बाद बताया गया कि टेलीकॉम कंपनी ने वापस लाकर टेलीफोन बूथ लगा दिया और अब उषा बहन आरटीआई कानून को स्वयं भी उपयोग करती है और अन्य सभी पीड़ितों को मदद करती हैं। इसी प्रकार एक अन्य मामले के विषय में रंजन बहन का उदाहरण लेते हुए पंक्ति जोग ने बताया कि वह एक ऐसी महिला हैं जो बोलने और सुनने में असमर्थ हैं लेकिन फिर भी आज वह आरटीआई की समझ रखती हैं। वह आरटीआई के बारे में दिव्यांग लोगों को प्रेरित करती हैं और उनकी मदद करती है। पंक्ति ने कहा कि सही मायने में देखा जाए तो उषा बहन एवं रंजन बहन आरटीआई कानून की स्पोक्सपर्सन है।

   पंक्ति जोग जैसी महिलाएं आगे आए तो देश की दशा और दिशा दोनों बदल जाए- राहुल सिंह

   गुजरात से  ज़ूम मीटिंग में सम्मिलित हुईं पंक्ति जोग के कार्यों की प्रशंसा करते हुए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा की पंक्ति जोग जैसी महिलाएं यदि समाज में आगे आ जाएं तो देश की दिशा और दशा दोनों बदल जाए। राहुल सिंह ने आरटीआई हेल्पलाइन और माहिती अधिकार गुजरात पहल के कार्यों आरटीआई ऑन व्हील्स की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्य मध्यप्रदेश में भी किए जाने चाहिए जिससे महिलाओं को आरटीआई कानून के विषय में जागरूक कर उनके अधिकारों के बारे में सचेत किया जाए।

   अब मध्यप्रदेश में महिलाओं के लिए जीआरडी डेस्क पर सूचना आयोग करेगा तत्काल सुनवाई

   3 जनवरी 2021 को वेबिनार मीटिंग के दौरान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि जिस प्रकार गुजरात में पंक्ति जोग ने आरटीआई हेल्पलाइन खोलकर एवं साथ में संस्था स्थापित कर आरटीआई ऑन व्हील्स आदि के माध्यम से आरटीआई के प्रति जागरूकता फैला रही है और महिलाओं को आगे आने के लिए प्रोत्साहित कर रही है वैसे ही मध्यप्रदेश में भी अब यदि कोई महिला आरटीआई आवेदन अथवा अपील लेकर आयोग के समक्ष आती हैं तो उनकी अपील और शिकायत को प्राथमिकता दी जाएगी और आउट ऑफ टर्न मामले की सुनवाई की जाएगी जो कि मध्य प्रदेश में ऐसा पहली बार होगा। 

    राहुल सिंह ने बताया कि जीआरडी नंबर पर कॉल कर महिलाएं अपना आवेदन भेज सकती हैं और साथ में जानकारी प्राप्त कर सकती हैं। सूचना आयुक्त ने आगे कहा कि यदि महिलाएं आरटीआई के फील्ड में आगे आती हैं तो इससे कार्यालयों की मनमानी बंद हो जाएगी क्योंकि जिस प्रकार लोक सूचना अधिकारी आम आदमी के साथ दुर्व्यवहार करते हैं वैसा वह किसी महिला आरटीआई कार्यकर्ता के साथ नहीं कर पाएंगे। सूचना आयुक्त ने कहा कि 4 जनवरी 2021 से यह व्यवस्था मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में लागू कर दी जाएगी।

गिरीश चंद देशपांडे बनाम राजगोपाल आदेश पर हुआ डिबेट

   इस बीच सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 में धारा 8(1)(जे) जिसमें कोई जानकारी न दिए जाने का प्रावधान मात्र इस आधार पर होता है कि वह जानकारी व्यक्तिगत है अथवा उस जानकारी का लोकहित से कोई विशेष लेना देना नहीं है इस विषय पर आज जूम मीटिंग के दौरान डिबेट हुआ जिसमें पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने बताया की लोक सूचना अधिकारियों के द्वारा गिरीश चंद्र देशपांडे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को आधार बनाकर 8(1)(जे) के तहत जानकारी न दिया जाना आरटीआई कानून की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगा देता है। शैलेश गांधी ने कहा कि जब भी आयोग के समक्ष गिरीश चंद्र देशपांडे का मामला रखा जाए तो उसमें राजगोपाल वाले मामले को सामने रखना चाहिए जिससे आम व्यक्ति को महत्वपूर्ण जानकारी मिल सके एवं 8(1)(जे) का हवाला देकर जानकारी छुपाया न जा सके। शैलेश गांधी ने बताया कि हम भारत के सूचना आयोगों के इतिहास में एक ऐसे निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं जब राजगोपाल वाले मामले को आधार बनाकर निर्णय लिए जायेंगे।

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