भाजपा के शासनकाल में एक बार फिर जिले में दिखी भीषण पशु क्रूरता, 150 की संख्या में घाटी के नीचे धकेल दिए गए गोवंश, आरोपियों को बचाने में जुटे सफेदपोश सत्ताधारी नेता// मामला जिला रीवा अंतर्गत थाना गढ़ और लालगांव चौकी के ग्राम रुझौही-सरई के रेहवा घाटी का// लगभग 150 की संख्या में मवेशियों को धकेला गया घाटी के नीचे, दो दर्जन से आधिक मृत, दर्जनों घायल जबकि अन्य पंचासों जोह रहे जीवन की बाट
मप्र के रीवा जिले अंतर्गत थाना गढ़ क्षेत्र में एक बार फिर भीषण पशु क्रूरता का मामला सामने आया है. हालाँकि थाना गढ़ क्षेत्र पहले भी पशु क्रूरता के लिए विख्यात रहा है. यहाँ नादघाट, भलघटी, पनगड़ी, सेदहा, हिनौती, क्योटी जलप्रपात, पिपरहा, लालगांव सोनवर्षा सहित रेहवा घाटी में पहले भी काफी पशु क्रूरता हुई है.
किन किनके द्वारा दिया गया वीभत्स गोहत्या को अंजाम
थाना गढ़ और लालगांव चौकी के ग्राम लालगांव और सरई-रुझौही में एक नया मामला दिनांक 27 सितम्बर को सामने आया जिसमे क्रूरता की हदों को पार करते हुए लगभग 150 गोवंशों को सरई ग्राम पंचायत से लगे हुए रेहवा घाटी की नीचे धकेल दिया गया. इस बात की शिकायत लालगांव चौकी में संजय शर्मा पिता राजेन्द्र शर्मा उम्र लगभग 27 वर्ष निवासी लालगांव द्वारा की गयी. जिसके एवज में दिनांक 28 सितम्बर 2021 को एफआईआर क्रमांक- 122/2021 चौकी लालगांव थाना गढ़ में दर्ज हुई जिसमें कमजोर धाराओं आईपीसी 429 एवं पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11(घ) के तहत आरोपियों धीरेन्द्र सिंह उर्फ़ धीरू सिंह पिता सूर्यबली सिंह उम्र लगभग 35 वर्ष, मानेन्द्र सिंह पिता त्रिवेणी सिंह उम्र लगभग 45 वर्ष, बच्चा साकेत पिता रामफल साकेत उम्र लगभग 52 वर्ष, कैलास यादव पिता शिवनाथ उर्फ़ हरिमन यादव उम्र लगभग 50 वर्ष एवं बृजवासी यादव पिता शंकर यादव उम्र लगभग 55 वर्ष सभी निवासी लालगांव-सोनवर्षा के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध किया गया और विवेचना में लिया गया है. हालाँकि फरियादी एवं अन्य चश्मदीदों द्वारा जानकारी दी गयी है की मामले में अन्य दर्जन भर लोग सम्मिलित थे जिनके नाम पुलिश द्वारा एफआईआर में नहीं लिखे गए हैं. इनमें कई लोग सरई-रुझौही क्षेत्र से भी हैं.
किन किनके कितनी गायों को उतारा मौत के घाट उसकी सूची
दिनांक 28 सितम्बर 2021 को लालगांव चौकी में दर्ज एफआईआर क्रमांक 122/2021 में उल्लेखित अनुसार और पशु मालिकों से सम्पर्क कर जिन जिन कास्तकारों के मवेशियों को मौत के घाट उतारा गया और घाटी के नीचे धकेल दिया गया उनमे से – बाबूलाल शर्मा पिता रामटहल शर्मा की 4 नग दूध देने वाली गायें, बबलू शर्मा पिता रामटहल शर्मा की एक गाभिन गाय, रामानुज शर्मा पिता राजमणि शर्मा की एक दूध देने वाली और एक गाभिन गाय, सुरेन्द्र शर्मा पिता रामबहोर शर्मा की एक गाभिन एवं 2 दूध देने वाली गायें, राजेन्द्र शर्मा पिता बुद्धसेन शर्मा की एक दूध देने वाली और 2 गाभिन गायें, विष्णु शर्मा पिता रामनिहोर शर्मा की 2 गाभिन और दो दूध देने वाली गायें, रामनिरंजन शर्मा की एक लगता जर्सी गाय एवं 3 गाभिन गायें, रामसजीवन शर्मा पिता बुद्धसेन शर्मा की 3 गाभिन एवं 3 बछिया, रावेन्द्र शर्मा पिता रामबहोर शर्मा की एक गाभिन एवं एक दूध देने वाली गाय, नरेंद्र शर्मा पिता छोटेलाल शर्मा की 2 दूध देने वाली एवं 2 गाभिन गायें, शुसीला शर्मा पति चन्द्रशेखर शर्मा की 2 नग गायें, मेवालाल शर्मा पिता सोभनाथ शर्मा की एक नग गाभिन एक नग दूध देने वाली गाय, गेंदलाल शर्मा पिता छेन्दीलाल शर्मा की एक दूध देने वाली गाय और श्यामलाल साकेत की 3 नग गायें सहित अन्य पचासों गायें सम्मिलित रहीं.
मौत का मंजर इतना खौफनाक की देखते ही रूह काँप जाय
रेहवा घाटी सरई ग्राम पंचायत जनपद पंचायत गंगेव एवं तहसील सिरमौर से लगे हुए सिरमौर बीट के जंगल में आती है. सरई-रुझौही एरिया से सटी हुई रेहवा घाटी में इस प्रकार की वारदात पहले भी हुई हैं. सामाजिक कार्यकर्त्ता एवं गोवंशो के अधिकारों के लिए सतत आवाज उठाने वाले शिवानंद द्विवेदी ने बताया की वर्ष 2017-19 के बीच कुछ बारदातें सामने आयीं थीं जिनमे ऐसे ही कुछ अपराधियों ने इन गोवंशों को रेहवा घाटी के नीचे धकेल दिया था जिसकी जानकारी मिलने पर मौके पर पुलिश, तहसीलदार और एसडीएम पहुंचे थे और और ग्रामवाशियों की मदद से मवेशियों को घाटी के ऊपर निकाला गया. वैसे ही एक बार फिर भीषण गोहत्या सामने आई है जिसमें सैकड़ों की संख्या में गायों को ले जाकर अपराधियों ने घाटी के नीचे धकेल दिया है. हालाँकि इस बार की वारदात में आवारा मवेशी नहीं बल्कि कास्तकारों के मवेशी सामने आये हैं जिसमें कास्तकारों ने बाकायदा थाना जाकर मामला भी पंजीबद्ध कराया है.
लालगाँव पुलिश ने बहुत कमजोर धाराओं में दर्ज किया एफआईआर
पशुओं के साथ क्रूरता करने पर सामान्य तौर पर जो धाराएँ लगाईं जाती हैं जिसमें किस मवेशी को पीटना, बांधकर प्रताड़ित करना, डंडे लाठी से मारते हुए ले जाना सम्मिलित है इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 429 एवं पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धाराएँ होती हैं. यह धाराएँ हालाँकि काफी सामान्य हैं जिनमें सामान्य जुर्माना और कुछ महीनों की कैद हो सकती है. लेकिन मप्र में पशुओं और विशेष तौर पर गोवंशों के साथ भीषण क्रूरता कारित करने वालों के लिए काफी तगड़े दंड विधान हैं जिसमे वर्ष 2010 में मप्र विधानसभा में पास किया गया मप्र गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम है जिसकी विभिन्न धाराओं के तहत कार्यवाही करने पर दोषी व्यक्ति को अधिकतम 10 वर्ष तक कैद एवं जुर्माना दोनों लग सकता है. यह एक गैर-जमानती धारा है जिसमें मात्र सक्षम न्यायालय ही जमानत दे सकता है.
रेहवा घाटी में मानव की हैवानियत के शिकार पचासों गायें अभी भी जीवन और मौत से कर रही संघर्ष
रेहवा घाटी में क्रूर व्यक्तियों द्वारा धकेले गए लगभग 150 की संख्या में गोवंशों में कुछ लगभग आधा दर्जन गायों को उन कास्तकारों द्वारा बाहर निकाल लिया गया है लेकिन अभी भी पचासों की संख्या में ज्यादातर गायें और कुछ बछड़े और बैल अपने जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे हैं और बीच घाटी में फंसे हुए हैं. लालगाँव चौकी प्रभारी द्वारा जानकारी दी गयी की मामले पर पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टर को भी बताया गया था जो मौके पर आकर पशुओं का पंचनामा बनाए हैं.
दो दर्जन से अधिक मारे गए गोवंश
जानकारी मिलने पर मौके पर लालगाँव पुलिश सहित अन्य प्रशासनिक अमला भी पहुंचा जिसमें मौक़ा मुआयना और नक्सा बनाया गया. यद्यपि पुलिश ज्यादा नीचे घाटी में उतरी नहीं लेकिन जो लोग नीचे उतरकर देखे और उसका वीडियो और फोटो भी बनाया तो उसमें 25 से अधिक संख्या में मवेशी मृत पाए गए हैं. मृतक पशुओं में अधिकतर गायें हैं. कई मवेशी ऐसे हैं जो अभी तक मरे नहीं हैं लेकिन बुरी तरह घायल होने के कारण एक ही स्थान पर जम गए हैं जिनके पैर अथवा रीढ़ टूट गयी हैं.
1000 फीट गहरी खाई में धकेला गया गोवंशों को
जिस रेहवा घाटी में इस प्रकार की पशु क्रूरता की जाती रही है वह लगभग 1 हज़ार फीट गहरी है. उसका रास्ता काफी टेढ़ा-मेंढ़ा है. आसपास निवासरत अदिवाशियों द्वारा बताया गया की यह रास्ता पहले लकड़हारों द्वारा पत्थर लगाकर और खोदकर बनाया गया था जो समय-समय पर घाट के नीचे लकड़ी लेने अथवा जंगल की दुर्लभ जड़ी बूटी खोदने अथवा फिर चोरी छिपे जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए जाते थे लेकिन अब यह रास्ता बंद हो गया था और काफी दुर्गम था. यहाँ अब मात्र इस प्रकार से पशुओं को घाट के नीचे धकेलने के लिए ही उपयोग किया जाता था जो कई वारदातें पहले भी सामने भी आ चुकी हैं.
प्रदेश में 4 हज़ार गोशालाओं की हकीकत बन गया मात्र सपना
बता दें की मप्र सरकार द्वारा गोवंशों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर 4 हज़ार गोशालाओं का सपना दिखाया गया था. हलांकि यह योजना कांग्रेस सरकार की थी जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा सबसे पहले हर पंचायत में गोशाला खोले जाने के लिए कहा गया था लेकिन यह मात्र सपना ही रह गया. ऐसा नहीं है की गोशालाएं बनाई नहीं गईं. गोशालाएं तो बनी लेकिन उनका संचालन करने वाले सरकारी भ्रष्ट तंत्र से मिलकर मवेशियों और गायों के लिए आने वाले चारे भूषे की राशि को हजम करते गए. आज आलम यह है की गोशालाएं तो बनकर तैयार हैं लेकिन उनमें मवेशियों का कोई रता पता नहीं है. जिन गोशालाओं में मवेशियों को रखा भी गया है उनके लिए आने वाली सरकारी सहायता चारा भूषा और पोषण आहार पंचायत माफिया और वह समितियां चट कर रही हैं जिन्हें उन गोशालाओं के संरक्षण और संवर्धन में लगाया गया है.
रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान- गायें तो मरेंगी ही
अभी हाल ही एक बयान काफी चर्चा का विषय रहा जिसमें रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा द्वारा कहा गया की गायें तो मरेंगी ही. इस विषय में गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने कहा की सांसद जनार्दन मिश्रा का यह बयान उनकी सच्चाई दर्शाता है क्योंकि गायें इसलिए मरेंगी क्योंकि राजनीति, माफिया और भ्रष्टाचारियों का तंत्र संगठित अपराधियों की तरह काम कर रहा है. देश प्रदेश में भ्रष्टाचार का बोलबाला है. किसी भी योजना को उठा लें उमसे आई योजना की राशि एक मृत पशु की भाँति होती है जिसमें शिकारी गिद्ध और बाज की तरह आँख लगाकर बैठे यह सरकारी अफसरान और राजनीतिक रोटी सेकने वाले लोगों का माफिया तंत्र इसे अवसर की तरह देखता है. कभी समय था जब नेता जिम्मेदार और कर्तव्य परायण होते थे और अधिकारी भी ईमानदार होते थे लेकिन आज नैतिकता खत्म हो चुकी है इसलिए लगभग हर योजना और कार्य में भ्रष्टाचार देखने को मिल रहा है. इसलिए सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान उनकी वर्तमान सरकार की कमजोरी असफलता और वास्तविक स्थिति को दर्शाता है. जिस प्रकार सरकार ने जनता से वादा किया था आज वह सभी मुकामों में असफल होकर अपने कर्मो की सच्चाई खुद ब खुद अपनी जुबान से बयां कर रही है.


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