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पशु क्रूरता की घटना के 10 दिन बाद एसडीएम सिरमौर की कागज़ी खानापूर्ति, गठित किया 4 सदस्यीय जांच दल// 150 की संख्या में रेहवा घाटी के नीचे धकेला गया गोवंशों को, ज्यादातर गोवंश गंभीर अवस्था में// अब तक रेस्क्यू के लिए आगे नहीं आया प्रशासन, सैकड़ों गोवंश गिन रहे जीवन की अंतिम साँस//

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पिछले दिनों जिले के थाना गढ़ क्षेत्र एवं सिरमौर वन परिक्षेत्र अंतर्गत रेहवा घाटी और सरई-रुझौही ग्राम के नजदीक में भीषण पशु क्रूरता देखने को मिली थी जिसमें लगभग 150 की संख्या में मवेशियों को घाटी के नीचे धकेल दिया गया था जिनको रेस्क्यू करने के लिए मांग उठ रही थी. शिकायतकर्ता संजय शर्मा निवासी ग्राम लालगांव के द्वारा इस बाबत लालगांव चौकी में एफ आई आर क्रमांक 122/2021 दिनांक 28/09/2021 भी 5 आरोपियों के नाम दर्ज करवाई गयी थी. घाटी के नीचे धकेले गए गोवंशों में से कुछ को तो क्षेत्रीय पशु पालकों द्वारा स्वयं ही रेस्क्यू भी किया गया लेकिन अभी भी सैकड़ों की संख्या में मवेशी घाटी के नीचे फंसे हुए हैं.

 

अभी भी घाटी के नीचे फंसे हैं सैकड़ों गोवंश

 

       दिनांक 06 अक्टूबर को एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी वन चौकीदार बाबूलाल यादव एवं अन्य ग्रामीणों के साथ मौके वारदात पर पहुंचे तो पाया की अभी भी लगभग एक हज़ार फीट गहरी घाटी के नीचे सैकड़ों की संख्या में मवेशी फंसे हुए हैं जिनको रेस्क्यू किया जाना है. मवेशी इतना अधिक डरे हुए हैं की मानव की भनक लगते ही वह दूर खड़े हो जाते हैं. शायद मानव ही इतना अधिक क्रूर और हत्यारा था जिसने इन बेजुबानों को घाटी के नीचे धकेला था. अब जब उनका जीवन संकट उत्पन्न हो गया है तो उसी मानव को यह बेजुबान देखना भी नहीं चाहते इसलिए मानव की उपस्थिति से ही दूर भाग जाते हैं.

   हालाँकि सामाजिक कार्यकर्ता और उनकी टीम द्वारा विभिन्न संस्थाओं से इस विषय पर बात भी की गयी है और उन सबको इस भीषण वारदात के विषय में अवगत भी कराया गया है. जिसमें मुख्य रूप से पीपल फॉर एनिमल नई दिल्ली संस्था की प्रमुख श्रीमती मेनका गाँधी, गोरक्षा दल के प्रमुख सतीश प्रधान, ध्यान फाउंडेशन के कार्यकारी प्रमुख सुदर्शन कौशिक सहित बालक राम दास जी आदि हैं. इन सबने अपनी टीम भेजकर जल्द से जल्द रेस्क्यू करवाए जाने हेतु प्रयास के लिए आश्वाशन तो दिया है लेकिन देखना यह है इनमे से कौन सबसे पहले आगे आकर इन गोवंशों के लिए मदद करता है.

बता दें की इसके पहले भी रीवा जिले में वर्षों से भीषण पशु क्रूरता की घटनाएँ होती रहीं हैं जिनमे घाटियों, पहाड़ों, खाइयों, नहरों, जलप्रपातों में मवेशियों को मरने के लिए धकेल दिया जाना और अवैध पशु बाड़ों में कैद कर बिना चारा पानी भूषा के मवेशियों को छोड़ देना प्रमुख रहे हैं. यदि रीवा जिले को पशु क्रूरता के लिए कैपिटल कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.

   मामले को लेकर एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने रीवा कलेक्टर और एसपी को सौंपा ज्ञापन

       पूरे मामले की शिकायत और ज्ञापन दिनांक 05 अक्टूबर 2021 को स्वयं कलेक्टर रीवा की जनसुनवाई में उपस्थित होकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा कलेक्टर को हाथोहाथ दिया गया था और तत्काल कार्यवाही की माँग की गयी थी. लेकिन कलेक्टर ने तत्काल स्वयं गंभीरता से मामला न लेते हुए और स्वयं अपने अधीन टीम गठित कर तत्काल उसी वक्त रेस्क्यू किये जाने की कार्यवाही न करते हुए मामला पुलिश अधीक्षक रीवा नवनीत भसीन के मत्थे छोड़ दिया और पत्र को मार्क करके फुर्सत हो गए. शिवानन्द द्विवेदी उसी क्षण पत्र लेकर रीवा एसपी भसीन के पास पहुंचे और उनसे मामले में कार्यवाही की अपील करनी चाही लेकिन एसपी मौके पर मिले ही नहीं. इस पर द्विवेदी ने मीडिया के सामने पूरे भ्रष्ट तंत्र की पोल खोल दी और बता दिया की किस प्रकार पूरा सिस्टम खत्म हो चुका है और भारत में गोवंशों के नाम पर कितनी घृणित राजनीति चल रही है. एक्टिविस्ट द्विवेदी ने वर्तमान केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हांथों लेते हुए गोवंशों और गोशालाओं के नाम पर चलाये जा रहे इनके गोरख धंधे पर अच्छा खासा प्रहार भी किया. बता दें की मप्र में वर्तमान शिवराज सिंह की भाजपा सरकार 4 हज़ार गोशालाएं बनाए जाने का दावा करती है लेकिन कहीं किसी भी गोशाला में मवेशी महफूज नहीं है. आज मप्र में चल रही सरकारी गोशालाएं भी मात्र आय का धंधा बन चुकी हैं और बूचड़खानों में तब्दील हो चुकी हैं. इस विषय में बसामन मामा गोवंश वन्य विहार केंद्र का उदाहरण प्रमुख है जो गोशाला न बनकर कत्लखाना बन चुकी है.  


एसडीएम सिरमौर नीलमणि अग्निहोत्री ने जांच के लिए गठित की 4 सदस्यीय दल

बता दें की शिवानंद द्विवेदी के ज्ञापन पर कलेक्टर मामले को एसडीएम सिरमौर को फॉरवर्ड कर दिया जिस पर दिनांक 05 अक्टूबर को ही सिरमौर तहसील एसडीएम नीलमणि अग्निहोत्री ने एक चार सदस्यीय दल भी गठित कर दिया जिसमें जनपद गंगेव के सीईओ प्रमोद ओझा, गढ़ सर्किल के नायब तहसीलदार रवि श्रीवास्तव, गढ़ थाना प्रभारी शिवचरण टेकाम और गंगेव के पशु चिकित्सा अधिकारी रत्नेश सिंह को टीम में रखा है. दिनांक 05 अक्टूबर को जारी इस पत्र में एसडीएम ने सम्बंधित दल सदस्यों को आदेशित करते हुए लिखा है की 2 दिवस के भीतर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की उपस्थिति में जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें. हालाँकि जानकारी मिलने पर अभी तक किस भी अधिकारी ने शिवानंद द्विवेदी से सम्पर्क नहीं किया है और कोई जांच की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी है जबकि बता दें की घाटी के नीचे फंसे हुए पशुओं की स्थिति निरंतर चिंतनीय बनी हुई है.

 

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