रेहवा घाटी में रेस्क्यू ऑपरेशन का चौथा दिन, दुर्गम घाटी से चौथे दिन निकाले गए कुल 31 गोवंश // उप वन मंडलाधिकारी ऋषि कुमार मिश्रा और वन अमले की उपस्थिति में हुआ चौथे दिन का रेस्क्यू ऑपरेशन // रेस्क्यू के बाद सभी मवेशी पुनः छोड़ दिए गए बेसहारा // पंचायत ने मवेशियों को नहीं पहुंचाया गोशाला // पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टर करते रहे टाइम पास,
दिनांक 11 अक्टूबर को रेहवा घाटी में गोवंशों के रेस्क्यू ऑपरेशन का चौथा दिन रहा. इस बीच चले रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 31 नग जीवित गोवंशों को जिनमें बहुतायत में गायें थीं उन्हें रेस्क्यू किया गया. अभी भी घाटी के बीच काफी संख्या में गोवंश फंसे हुए हैं जिनका रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
पशु क्रूरता की घटना का संक्षिप्त विवरण
यह घटना 27-28 सितम्बर 2021 के दरम्यान लगभग दो दर्जन आपराधिक तत्वों द्वारा कारित की गयी थी. चश्मदीदों द्वारा जानकारी दी गयी थी की लगभग 25 से 30 लोग लाठी डंडों से पीटते गाली देते हुए क्रूरता करते हुए लगभग 150 से अधिक गोवंशों को जिनमें ज्यादातर गाभिन और लगता गायें थीं और कुछ बैल बछड़े थे उन्हें जबरन सरई कला पंचायत स्थित थाना गढ़ और लालगांव चौकी अंतर्गत रेहवा घाटी में लाकर धकेल दिए थे. क्रूरता करते हुए जबरन कारित किये गए इस अपराध में लगभग 2 दर्जन मवेशी पैर फिसलने और संकरा घाट होने की वजह से सैकड़ों फीट नीचे खाई में गिर गए थे जिनकी मौके पर ही मौत हो गयी थी. शेष गोवंश घाट के नीचे फंस गए और लगभग 2 हज़ार फीट से अधिक गहराई होने और टेढ़ा-मेढ़ा पथरीला रास्ता होने के कारण ऊपर चढ़ पाने में पूरी तरह असमर्थ थे.
लगातार चलता रहा रेस्क्यू ऑपरेशन, रेस्क्यू किये गए सैकड़ा भर गोवंश
इस बीच घटना की जानकारी जब एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी को मिली तो उन्होंने मामले को मीडिया के संज्ञान में लाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के भी संज्ञान ले लाया. वरिष्ठ अधिकारियों और मीडिया में मामला आने के बाद जिला कलेक्टर रीवा डॉक्टर इलैयाराजा टी द्वारा एसडीएम सिरमौर नीलमणि अग्निहोत्री को निर्देशित करते हुए 4 सदस्यीय जांच दल सह रेस्क्यू टीम गठित किये. हालाँकि जांच दल के सभी अधिकारी कभी भी मौके पर एक साथ उपस्थित नहीं हुए और जिम्मेदारी का ठीकरा एक दूसरे के सिर पर फोड़ते रहे. इस बीच पंचायत और स्थानीय मजदूरों को लेकर एवं साथ में वन अमले को सूचना देकर रेस्क्यू ऑपरेशन प्रारंभ कराया गया जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के मार्गदर्शन और अगुआई में 4 फेज में लगभग एक सैकड़ा गोवंशों को रेस्क्यू किया गया. पहले दिन मात्र 2 गोवंश, तो दूसरे दिन 8 गोवंश, तीसरे दिन 58 गोवंश तो चौथे दिन कुल 31 नाग गोवंशों को रेस्क्यू किया जाकर रेहवा घाटी के ऊपर पहुंचाया गया.
रेस्क्यू के बाद गोवंशो फिर बेसहारा, पुनः प्रताड़ना का डर
सबसे आश्चर्य करने वाली बात यह है की हालाँकि अब तक कुल 4 फेज में लगभग एक सैकड़ा गोवंशों को रेस्क्यू किया जाकर घाटी के ऊपर तो पहुंचा दिया गया लेकिन उनकी कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गयी. यद्यपि जिला कलेक्टर रीवा के निर्देशन पर बनाई गयी 4 सदस्यीय जांच टीम में गोवंशों को रेस्क्यू किया जाकर उनका पोषण और पुनर्वास करते हुए नजदीकी क्योटी-दुलहरा स्थित सरकारी गोशाला में पहुंचाया जाना था. लेकिन एसडीएम नीलमणि अग्निहोत्री द्वारा गठित जांच दल ने मात्र अपनी कार्यवाहियां औपचारिकता तक ही सीमित रखी और किसी प्रकार से गोवंशों के पोषण और पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं किये. अब सबसे बड़ा सवाल है की जिस प्रकार से बताया जा रहा है की गोवंशों को आसपास के ग्रामीणों ने फसल नुकसानी के चलते ऐसी भीषण क्रूरता किये हैं तो सवाल यह है की यदि इन गोवंशों की कोई समुचित व्यवस्था नहीं हुई तो पुनः वही अथवा अन्य लोग ऐसी ही क्रूरता करते हुए पुनः किसी खाई अथवा घाटी में धकेल सकते हैं और पुनः इसी प्रकार रेस्क्यू ऑपरेशन किया जाएगा.
उप वनमंडलाधिकारी और चौकी प्रभारी की उपस्थिति में हुआ चौथे दिन का रेस्क्यू ऑपरेशन
एक्टिविस्ट द्विवेदी की सूचना पर उप वनमंडलाधिकारी ऋषि कुमार मिश्रा रेहवा घाटी मौके वारदात पर पहुंचे और सीधे घाटी के नीचे पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन में भाग लिया. हालाँकि एसडीओ ऋषि मिश्रा के साथ आये अन्य वन कर्मी जैसे डिप्टी रेंजर बाबूलाल यादव, बीटगार्ड संजय वर्मा आदि मात्र ऊपर घाट का ही चक्कर लगाते रहे जिसके विषय में एसडीओ मिश्रा ने काफी सख्ती दिखाई और सभी जिम्मेदार को उनके कार्य के बारे में सचेत भी किया. एसडीओ मिश्रा द्वारा कहा गया की यह उनके वन क्षेत्र में कारित अपराध है जिसके बारे में वह सख्त कार्यवाही करेंगे. एसडीओ ने कहा की इस जंगली रास्ते को बेहतर बनाया जायेगा जिससे यदि किसी प्रकार से गोवंश नीचे धकेल भी दिए जाते हैं तो वह पुनः चढ़ पाने में सक्षम रहेंगे. हालाँकि उन्होंने कहा की ऐसी भीषण वारदात दोहराई न जाए इसके लिए वह पूरा प्रयास करेंगे.
सुबह लगभग 12 बजे लालगांव चौकी प्रभारी यू बी सिंह भी मौके वारदात पर पहुंचे और सीधे ग्राउंड जीरो पर 2 हज़ार फीट गहरी घाटी के नीचे उतरकर गायों के रेस्क्यू अभियान में चौथे दिन भाग लिया. उप निरीक्षक यू बी सिंह पूरे घटनाक्रम में पहले भी आकर रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा लिए थे. जिन 5 आरोपियों के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध किया है वह लालगांव चौकी में में दर्ज है जिसमे प्रकरण क्रमांक 122/2021 दिनांक 28 सितम्बर 2021 में धारा 429 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11(डी) के तहत सामान्य प्रकरण दर्ज किया गया है.
पशु चिकत्सा विभाग के डॉक्टर एक बार फिर बैठे रहे घाट के ऊपर
जहां इतने जघन्य प्रकरण में कई गोवंश बुरी तरह घायल हो गए थे जिनका की उपचार भी कई दिन पूर्व कुछ डॉक्टर द्वारा किया गया था उनकी ड्रेसिंग और उपचार करने के लिए पुनः टीम के सदस्यों द्वारा और कलेक्टर के निर्देशन पर 3 डॉक्टर को भेजा गया था लेकिन कोई भी डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचे और काफी देरी से पहुंचकर मात्र घाटी के ऊपर बैठकर पिकनिक ही मनाते नजर आये और घाट के नीचे उतरकर घायल गोवंशों का कोई इलाज नहीं किया. इस प्रकार जिन गोवंशों को दर्द और एंटीबायोटिक का इंजेक्शन और घाव में मलहम पट्टी की जानी थी उनका कोई इलाज डॉक्टर की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी के चलते नहीं हो पाया.
अभी भी फंसे हैं 2 दर्जन से अधिक गोवंश, पुनः चलाया जाएगा रेस्क्यू ऑपरेशन
एक्टिविस्ट द्विवेदी ने बताया की अभी भी रेहवा घाटी के नीचे लगभग 2 दर्जन से अधिक गोवंश फंसे हुए हैं जिनके लिए आने वाले दिनों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा. वन विभाग और पंचायत के सहयोग से लेबर और मिस्त्री की मदद से पहले एक बार पुनः रास्ता ठीक करने का प्रयास किया जाएगा और देखा जाएगा की क्या कमजोर गोवंश ऊपर चढ़ पाने में सक्षम हैं. यदि गोवंश ऊपर नहीं पहुँच पाते तो उन्हें ऊपर लाने के अन्य माध्यमों का सहारा लिया जा सकता है जिसमें शायद और भी तकनीकी तौर पर सुसज्जित मेम्बर की जरूरत पड़े.



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