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MP Rewa – राष्ट्रीय RTI दिवस पर रीवा में आयोजित हुआ जनजागरुकता कार्यक्रम// आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी और समाजसेवी कुंजबिहारी तिवारी ने किया संबोधित // मप्र सूचना क्रांति के लिए जाना जाएगा, रीवा का योगदान अभूतपूर्व – शिवानंद द्विवेदी

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सूचना का अधिकार कानून 12 अक्तूबर 2005 के दिन भारतीय गणराज्य में लागू किया गया. इस कानून के लागू होने के बाद 16 साल बीत चुके हैं लेकिन अभी भी देश में मात्र 2 से 3 प्रतिशत लोग ही आरटीआई कानून का प्रयोग कर रहे हैं. कहते हैं की जन जागरूकता की कमी है लेकिन देश के अच्छे खासे तबके के लोग शिक्षित और पढ़े लिखे हैं और ऐसा भी नहीं की देश में निरक्षरता बढ़ रही है. देश काफी साक्षर हो रहा है परन्तु इसके बावजूद भी क्या कारण हैं की आरटीआई कानून के उपयोग से लोग अपने आपको अभी भी दूर रख रहे हैं.

  आरटीआई दिवस पर आयोजित हुआ जनजागरुकता कार्यक्रम

 

   दिनांक 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय सूचना के अधिकार दिवस पर जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें रीवा जिले के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. लगभग 100 के आसपास आरटीआई कार्यकर्ताओं ने नईगढ़ी जनपद पंचायत के प्रांगन में आयोजित राष्ट्रीय सूचना के अधिकार दिवश में हिस्सा लिया और अपने विचार रखे.

   कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ समाजसेवी कुंजबिहारी तिवारी ने किया जबकि मुख्य अतिथि के तौर पर आरटीआई एक्टिविस्ट और अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले शिवानंद द्विवेदी सम्मिलित हुए. कार्यक्रम के अन्य सहभागियों में प्रियेश पाण्डेय, राहुल चतुर्वेदी, शिवेंद्र सिंह, राजेश शुक्ला आदि सम्मिलित रहे.

  मप्र सूचना क्रांति के लिए जाना जाएगा, रीवा का योगदान अभूतपूर्व – शिवानंद द्विवेदी

   आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा की कोई भी देश और समाज तब विकशित कहा जाएगा जब वह अपने अधिकारों और दायित्वों दोनों के लिए सचेत रहे. हम समाज के लिए अच्छा करें और निस्वार्थ भाव से काम करें सभी युवाओं का यह उद्येश्य होना चाहिए. उन्होंने कहा की आज जब 12 अक्टूबर को हम आरटीआई दिवस मना रहे हैं तो हम यह न भूलें की इस कानून को लाने के लिए हमारे पहले अरुणा राय, निखिल डे, शैलेश गाँधी आदि एक्टिविस्टों ने कितनी मेहनत की है तब जाकर 12 अक्तूबर 2005 को यह पारदर्शिता का कानून मूर्त रूप धारण किया. आज युवाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर अधिक से अधिक आरटीआई लगाना चाहिए. मप्र पूरे भारत में वर्तमान समय में आरटीआई कानून में नवाचारों और लैंडमार्क निर्णयों के लिए जाना जाता है. सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कई लैंडमार्क निर्णय देकर इतिहास रच दिया है. इन सब निर्णयों की सुरुआत रीवा संभाग से हुई है. पंमप्र चायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40-92 के तहत पंचायत पदाधिकारियों के प्रति वसूली और पद से पृथक करने की कार्यवाहियाँ, सरपंच सचिवों की चल अचल सम्पत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने, सूचना आयुक्त द्वारा लोक सूचना अधिकारी द्वारा जुर्माना न भरे जाने पर गिरफ्तारी वारंट जारी करना, 48 घंटे के भीतर जीवन और स्वतंत्रता की जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराने और पुलिश थानों और मनरेगा लोकपाल को आरटीआई के दायरे में लाने जैसे ऐसे दर्जनों लैंडमार्क निर्णय हैं जो रीवा संभाग और मप्र से प्रारंभ हुए हैं. आज मप्र सूचना के अधिकार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है जिसके लिए यहाँ कार्य करने वाले एक्टिविस्टों की मेहनत प्रमुख रोल अदा करती है. अभी हाल ही में सम्पूर्ण मप्र में ऑनलाइन माध्यमों से आरटीआई आवेदन जमा करने और अपील करने की व्यवस्था के लिए मप्र के कई जिलों में कार्यरत एक्टिविस्टों द्वारा मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और सूचना आयोग सहित सामान्य प्रशासन विभाग को एक अभियान के तहत किये गए पत्राचार और दबाब के चलते यह व्यवस्था सुनिश्चित हुई जो एक्टिविस्टों के मेहनत का परिणाम है. कोई भी कानून और व्यवस्था बिना निष्ठावान कार्यकर्ताओं के फलीभूत नहीं हो सकती इसलिए आरटीआई कार्यकर्ताओं की निस्वार्थ मेहनत को भुलाया नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा की सरकार को आरटीआई कार्यकर्ताओं के ऊपर हो रहे हमलों को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था बनाई जानी चाहिए और अच्छे कानून लाने चाहिए. आज देश के कोने कोने से आरटीआई कार्यकर्ता और सूचना आयुक्त से लेकर हर क्षेत्र में कार्य करने वाले नामी लोग रविवार सुबह 11 बजे से दोपहर 01 बजे तक आरटीआई वेबिनार में जुड़कर समय के महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दों आरटीआई से जुड़े विषयों पर चर्चा कर देश में जागरूकता फैला रहे हैं जो अपने आपमें ही एक इतिहास है. यह सब मप्र और रीवा संभाग से संभव हो पा रहा है. इसलिए मप्र के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता.

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