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MP पंचायत भ्रष्टाचार न्यूज़: नईगढ़ी सीईओ शैलेंद्र पांडेय के संरक्षण में फल फूल रहा पंचायती भ्रष्टाचार // जिला सीईओ के पत्रों को फेंक रहे कूड़ादान में // दर्जनों पंचायतों में जनपद सीईओ धारा 40 और 92 कि कार्यवाही को कर रहे प्रभावित // जिलहड़ी पंचायत में साढ़े 68 लाख रु के भ्रष्टाचार के जांच बाद खुलासे पर चल रहा पर्दा डालने का कार्य // वर्ष 2021 की कार्यवाही को दबाने का चल रहा प्रयास।।

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पंचायती भ्रष्टाचार का दानव विशालकाय मुंह फैलाए हुए पंचायतों को निगल रहा है। इस दैत्य को भोजन और संरक्षण देने का कार्य पंचायतों में बड़े पदों पर बैठे हुए अफसरान दे रहे हैं।

   हर दिन पंचायतों में भ्रष्टाचार के नित नए आयाम लिखे जाते हैं और प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारी अपने कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में व्यस्त हैं। 

  एक और ताजा मामला नईगढ़ी जनपद जिला रीवा का है जहां वहां पर पदस्थ वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र कुमार पांडेय के द्वारा भ्रष्टाचारियों को बचाने और संरक्षण देने का कार्य किया जा रहा है। आलम यह है शैलेंद्र पांडेय उन जांचों को भी प्रभावित करने का काम कर रहे हैं जिनमें कई लाखों का भ्रष्टाचार उजागर हो चुका है। जिला पंचायत के द्वारा बार-बार पत्राचार कर दोषी पाए गए सरपंच सचिव और इंजीनियर के विरुद्ध वसूली पत्रक बनाकर भेजे जाने का पोस्ट ऑफिस की तरह पत्र दर पत्र भेज कर मांग की जाती है और सीईओ जनपद शैलेंद्र पांडेय इन पत्रों को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। 

     नईगढ़ी जनपद में कई ऐसी पंचायतें हैं जहां धारा 40 और 92 के कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद वसूली पत्रक बनाकर कलेक्टर न्यायालय में भेजा जाना है। लेकिन आलम यह है कि कमीशनखोरी के खेल में संलिप्त नईगढ़ी जनपद सीईओ शैलेंद्र पांडेय सरपंच सचिव और इंजीनियर को बचाने का काम कर रहे हैं। आम जनता शिकायतों को लेकर परेशान है। वह कभी कलेक्टर तो कभी कमिश्नर तो कभी सीईओ जिला पंचायत के कार्यालय में दर-दर भटक रही है लेकिन शैलेंद्र पांडेय को इसका कोई फर्क नहीं पड़ता।

   *सीईओ नईगढ़ी शैलेंद्र पांडेय के द्वारा जिलहड़ी पंचायत के साढे 68 लाख रुपए की वसूली पर पर्दा डालने का प्रयास*

    हालिया मामला नईगढ़ी जनपद के ग्राम पंचायत जिलहड़ी का है जहां पर शिकायतकर्ता सुधाकर सिंह के द्वारा ग्राम पंचायत जिलहड़ी के 28 कार्यों के अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा को की गई थी। मामले की जांच त्योंथर डिवीजन में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के सहायक यंत्री एवं एसडीओ एसआर प्रजापति के द्वारा करवाई गई। जांच में व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार मिला जिसमें कई कार्य तो मौके पर पाए ही नहीं गए। जांच उपरांत 68 लाख 43 हजार 436 रुपये की वसूली बनाई गई। इस वसूली में तत्कालीन सरपंच पूनम सिंह का हिस्सा 25 लाख 94 हजार 855 रुपए, तत्कालीन सचिव सत्येंद्र वर्मा के ऊपर 17 लाख 88 हज़ार 307, तत्कालीन सचिव नवल किशोर जायसवाल के ऊपर 8 लाख 6 हज़ार 445 रुपये एवं उपयंत्री प्रवीण पांडेय के हिस्से में 16 लाख 54 हज़ार 329 रुपए की वसूली बनाई गई। यह वसूली राशि सीईओ जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिवस के भीतर जमा किए जाने का लेख किया गया। लेकिन आलम यह है कि आज महीनों का समय व्यतीत होने के बाद भी सीईओ जिला पंचायत के कई नोटिसों का सीईओ जनपद शैलेंद्र पांडेय के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। 

     सूत्रों से प्राप्त जानकारी में बताया गया कि नईगढ़ी सीईओ शैलेंद्र पांडेय के द्वारा फर्जी तरीके से एक अन्य जांच बैठाकर इसी मामले में लीपापोती करने का भी प्रयास किया गया लेकिन सफल नहीं हो पाया। शिकायतकर्ता सुधाकर सिंह सहित जिलहड़ी ग्राम पंचायत के लोगों के द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत नईगढ़ी शैलेंद्र पांडेय को तत्काल हटाए जाने और इनकी विभागीय जांच की मांग की गई है।

  *जनपद सीईओ नईगढ़ी और इंजीनियर ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार को दे रहे बढ़ावा – शिवानंद द्विवेदी*

    सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि चाहे वह रीवा जिले की ग्राम पंचायतें हों या संपूर्ण मध्यप्रदेश। लगभग सभी स्थान पर वरिष्ठ पदों पर बैठे हुए अधिकारी भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं जिसकी वजह से ग्राम पंचायतों में स्वतंत्रता प्राप्ति के 75 वर्ष बाद भी मूलभूत सुविधाएं सड़क, बिजली, पानी, आवास, पेंशन और खाद्यान्न से आमजन और गरीब जनता वंचित है। ग्रामीण विकास कार्यों के लिए आने वाली राशि भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रही है और बड़े अधिकारी इस भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा है रीवा जिले में जिला प्रशासन और वरिष्ठ पदों पर बैठे हुए अधिकारी भ्रष्ट इंजीनियरों और भ्रष्टाचार में संलिप्त जनपद स्तर के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने समस्त जनपदों में दोषी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और फर्जी और गलत मूल्यांकन कर पंचायती विकास कार्य के लिए आने वाली राशि का हजम करने में महती भूमिका निभाने वाले वाले दोषी इंजीनियरों को बर्खास्त किए जाने और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है।

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