National Breaking: EVM इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और RTI विषय पर आयोजित हुआ 120 वां राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार // इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से मतदान पूर्णतया सुरक्षित और गड़बड़ी से इनकार – पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत // तकनीको में भी पारदर्शिता आवश्यक – श्रीनिवास कोडाली // आरटीआई से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी – पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप।।
इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंट में गड़बड़ी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद और आंध्र प्रदेश में इसके पहले आधार डाटा और वोटर आईडी से लिंक किए जाने के मामले के भी कुछ राजनीतिक दलों द्वारा गलत लाभ लिए जाने के कुछ किस्से के सामने आए थे जिस पर कई लोगों ने मुखर होकर आवाज रखी थी। उन्होंने कहा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से संबंधित संदेह इसलिए बढ़ जाते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के अंदर क्या हो रहा है उसके अंदर क्या है और उसकी पहुंच किन एजेंसी के पास है इससे लोगों में संदेह होना स्वाभाविक है। उनका कहना था कि जो भी वस्तुएं हमें दिखती हैं वह पारदर्शी होनी चाहिए और सभी को पता चलना चाहिए कि आखिर उसके अंदर क्या है। ऐसे में जहां संदेह दूर होता है वहीं व्यवस्थाओं के प्रति और प्रशासन के प्रति विश्वास भी बढ़ता है। श्रीनिवास कोडाली ने कहा कि उनका उद्देश्य यह नहीं है की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन गलत है अथवा उनके द्वारा कोई आरोप लगाया जा रहा है बल्कि उनका यह कहना है कि किसी भी प्रकार की व्यवस्था में गड़बड़ी संभव है और शासन प्रशासन को हर प्रकार के सुझाव और बेहतरी के लिए खुला होना चाहिए। श्रीनिवास ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे कुछ यूरोपियन हैकर ने किसी भारतीय के साथ मिलकर एक ईवीएम मशीन को हैक कर दिखाया था कि उसमें क्या-क्या टैम्परिंग की जा सकती है। जिसके बाद भारतीय व्यक्ति के ऊपर मुकदमा दायर कर दिया गया और उसे जेल में डाल दिया गया और यूरोपियन को देश के बाहर भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से ऑटोक्रेटिक और अथॉरिटेरियन स्थिति चिंताजनक है। बेहतर यह होगा की हर प्रकार की गड़बड़ी को समझते हुए उसमें और अच्छा कैसे सुधार किया जाए सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही अन्य कई मुद्दों पर भी उन्होंने चर्चा की और आधार डाटा के दुरुपयोग और वोटर आईडी से जोड़ने से क्या नुकसान हो सकता है इस परिपेक्ष में उन्होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य में ऐसे मतदाताओं के ऐसे लाखों मतदाताओं के उदाहरण दिए जो आधार डाटा सही तरीके से लिंकिंग न होने की वजह से मतदान देने से वंचित हो गए थे।
*आरटीआई कानून से मतदान के क्षेत्र में भी पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है – आत्मदीप*
कार्यक्रम में पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने भी अपने विचार रखे और उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार कानून का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है। चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन हो अथवा मतदान से संबंधित कोई भी प्रक्रिया इन सब में यदि सूचना के अधिकार का उपयोग किया जाता है तो बेहतर व्यवस्था लाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और मतदान केंद्रों में मतदान से संबंधित डाटा आरटीआई के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है और इससे पारदर्शिता जवाबदेही बढ़ेगी। आवेदकों के प्रश्नों को लेकर उन्होंने जवाब दिया की ऐसे समस्त दस्तावेज जो लोक क्रियाकलाप से संबंधित हैं और जिनमें लोक धन का उपयोग होता है उन्हें आरटीआई के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अपने आदेशों में पहले भी उन्होंने सर्विस बुक भी उपलब्ध करवाई है।
कार्यक्रम का संचालन एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा किया गया और कार्यक्रम के सहयोगीयों में अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा आरटीआई रिवॉल्यूशनरी ग्रुप के आईटी सेल से पवन दुबे छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल भी सम्मिलित रहे। कार्यक्रम में उत्तराखंड से आरटीआई रिसोर्स पर्सन देवेंद्र कुमार ठक्कर ने भी कई प्रश्नों के जवाब दिए।


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