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नेशनल लोक अदालत का सफल आयोजन 552 लंबित प्रकरणों सहित कुल 2749 प्रकरणों का हुआ निराकरण

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विकास सचदेवा की ब्यूरो रिपोर्ट




       ‘‘राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शहडोल श्री काशीनाथ सिंह महोदय जी के कुशल मार्गदर्शन एवं अध्यक्षता में दिनांक 14 मार्च 2026 को वर्ष की प्रथम नेशनल लोक अदालत का आयोजन जिला न्यायालय शहडोल एवं सिविल न्यायालय ब्यौहारी, बुढ़ार तथा जयसिंहनगर में किया गया। जिला शहडोल में नेशनल लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण हेतु जिला न्यायालय शहडोल एवं सिविल न्यायालय ब्योहारी बुढ़ार तथा जयसिंहनगर में कुल 23 न्यायिक खण्डपीठों का गठन किया गया जिसमें, जिला न्यायालय शहडोल में 11 खंडपीठ, श्री अभिषेक कुमार त्रिपाठी श्रम न्यायाधीश श्रम न्यायालय शहडोल की 1 खंडपीठ, तहसील न्यायालय ब्यौहारी में 4 खंडपीठ, तहसील न्यायालय बुढ़ार में 4 खंडपीठ एवं तहसील न्यायालय जयसिंहनगर में 3 खंडपीठ गठित किए गए है।
          नेशनल लोक अदालत का माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा वर्चुअल माध्यम से माननीय चीफ जस्टिस महोदय एवं भौतिक माध्यम से शुभारंभ माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री काशीनाथ सिंह द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर किया गया। उपरांत उनके द्वारा नेशनल लोक अदालत से होने वाले लाभ के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए व्यक्त किया गया कि लोक अदालत में राजीनामा के माध्यम से प्रकरण समाप्त कराये जाने पर दोनों पक्षों की जीत होती है एवं उनका मुकदमा पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है जिसकी अपील भी नहीं होती। इसके अलावा पक्षकारों द्वारा वाद शुल्क की वापसी हो जाती है। साथ ही पारिवारिक मामलों में सुलह होने से दो परिवार टूटने से बच जाते हैं साथ ही उन्हांेने समस्त अधिवक्ता एवं उपस्थित जनों से आव्हान किया। इस लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों का राजीनामा के माध्यम से निराकरण कराकर उक्त कार्यक्रम को सफल बनावें।
         उक्त अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय द्वारा विधिक सेवा प्रदर्शनी लगायी गयी जिसमें नालसा एवं सालसा की समस्त योजनाओं की जानकारी एवं ब्राउजर्स सभी आमजन के लिए उपलब्ध रहे। 

       इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय श्री शशिभूषण शर्मा, विशेष न्यायाधीश श्रीमती दिपाली शर्मा, जिला न्यायाधीश श्री कमलेश कोल, श्री कृष्ण पाल सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट श्री राजेन्द्र सिंह सिंगार, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री रूपेन्द्र सिंह मडावी, श्री सीता शरण यादव, श्रीमती प्रीति सिंह बघेल, सुश्री अदिति कुमार शर्मा, सुश्री श्वेता यादव, सुश्री दीप्ति चैहान जिला विधिक सहायता अधिकारी/प्रभारी सचिव श्री देवेन्द्र सिंह परस्ते, डीपीओ श्री हरिओम कुसुमाकर बैश्य, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ श्री राकेश सिंह बघेल, उपाध्यक्ष श्री सतीश पाठक, सचिव अधिवक्ता संघ श्री अनिल तिवारी एवं अधिवक्ता संघ के अन्य कार्यकारिणी सदस्य, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री कुंजबिहारी द्विवेदी, समस्त लीगल एड डिफेंस काउंसिल्स, न्यायालय के अधिवक्तागण, पैनल अधिवक्तागण, पैरालीगल वालेंटियर, न्यायालय के समस्त कर्मचारीगण ,अधिवक्तागण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं अभार प्रदर्शन जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री देवेन्द्र सिंह परस्ते द्वारा किया गया।
      नेशनल लोक अदालत में जिला न्यायालय परिसर में विद्युत विभाग, नगरपालिका, राष्ट्रीयकृत बैंक, बी.एस.एन.एल आदि विभागों के स्टॉल लगाये गये।

         इस नेशनल लोक अदालत में कुल 552 लंबित प्रकरण एवं 2197 प्री-लिटिगेशन प्रकरण इस प्रकार कुल 2749 प्रकरणों का निराकरण हुआ जिसमें कुल 41438985/- राशि का अवार्ड पारित हुआ जिसमें से मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों के कुल 46 प्रकरण चेक अनादरण के 61 आपराधिक राजीनामा योग्य 177 वैवाहिक विवाद के 42 विद्युत विभाग के 47 लंबित एवं अन्य 179 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया।
                         सफलता की कहानी
                  श्री शुभम सिंह एवं शिवानी का विवाह वर्ष 2021 में हुुआ था व उनके मध्य एक बच्चा है। विवाह कके बाद लगभग 3 वर्ष एक साथ अच्छे से रहने के पश्चात उनके मध्य छोटी-छोटी बातो कोलेकर विवाद उत्पन्न हो गया व जिससे पति पत्नि अलग रहने लगे वादी सुभम सिंह द्वारा न्यायालय के समक्ष धारा 9 हिन्दूविवाह अधिनियम अन्तर्गत वैवाहिक पुनरस्थापन हेतु न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया जिसमें माननीय प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय की न्यायाधीश द्वारा उभय पक्षों को विशेष प्रयास कर समझाइस दिये जाने पर व उभय पक्षों के अधिवक्तागणो के सहयोग से एक साथ जीवन बिताना तय कर अपने विवाद को समाप्त किया जिसके उपरांत उन्होंने एक दूसरे को माला पहनाया।  व एक साथ पुनः अपना जीवन व्यतीत करने हेतु न्यायालय से ही एक साथ चले गये इस नेशनल लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय में कई परिवार टूटने एवं बिखरने से बच गये।  श्री रीतेष वर्मन  एवं सुजाता का विवाह वर्ष 2022 में हुुआ था व उनके मध्य एक बच्चा है। विवाह के बाद लगभग 1 वर्ष एक साथ अच्छे से रहने के पश्चात उनके मध्य छोटी-छोटी बातो कोलेकर विवाद उत्पन्न हो गया व जिससे 2023 से पति पत्नि अलग रहने लगे। वादी रीतेष द्वारा न्यायालय के समक्ष धारा 13 हिन्दूविवाह अधिनियम अन्तर्गत न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया जिसमें माननीय प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय की न्यायाधीश द्वारा उभय पक्षों को विशेष प्रयास कर समझाइस दिये जाने पर व उभय पक्षों के अधिवक्तागणो के सहयोग से एक साथ जीवन बिताना तय कर अपने विवाद को समाप्त किया जिसके उपरांत उन्होंने एक दूसरे को माला पहनाया व एक साथ पुनः अपना जीवन व्यतीत करने हेतु न्यायालय से ही एक साथ चले गये। इस नेशनल लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय में कई परिवार टूटने से बच गये।  इसी प्रकार 19 अन्य पारिवारिक विवाद के प्रकरणों में पीठासीन न्यायाधीश द्वारा उभय पक्षों को विशेष प्रयास कर समझाइस दिये जाने पर व उभय पक्षों के अधिवक्तागणो के सहयोग से इस नेशनल लोक अदालत में कई परिवार टूटने एवं बिखरने से बच गये।

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