(Rewa/Bhopal, MP Breaking) कराधान घोटाले पर सूचना आयोग की सुनवाई लगातार जारी – 2 अन्य सीईओ हनुमना सीईओ मूंगाराम मेहरा एवं पूर्व सीईओ बलवान मवासे के बयान के बाद घोटाले की खुल रही नई परतें, अगली सुनवाई में रीवा जिला पंचायत पूर्व सीईओ अर्पित वर्मा एवं वर्तमान सीईओ स्वप्निल वानखेड़े के साथ कई पीआईओ की भूमिका भी होगी तय

(शिवानन्द द्विवेदी)
सूचना के अधिकार कानून 2005 के क्रियान्वयन के बाद शायद इसके पूरे इतिहास में वर्तमान समय को आरटीआई का स्वर्णिम काल कहा जा सकता है। क्योंकि मप्र में इस वक्त राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह हैं जिन्होंने अपने ऐतिहासिक निर्णयों और कार्यवाहियों से अधिकारियों का पसीना छूटने पर मजबूर कर दिया है।
मप्र की 1148 पंचायतों के 300 करोड़ के कराधान घोटाले पर चल रही सुनवाई
वर्तमान समय मे भारत के सूचना आयोग के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई चल रही है जिसमे किस प्रकार अधिकारियों जनप्रतिनिधियों और माफियाओं की सांठगांठ से मप्र की 1148 पंचायतों में 300 करोड़ का कराधान घोटाला कारित किया गया यह पूरे भारत वर्ष में आज एक चर्चा का विषय है।
बता दें कि जहां पूरे मप्र में इस घोटाले की जद में 1148 पंचायतें सम्मिलित हैं वही यदि अकेले रीवा जिले की बात करें तो घोटाले की जद में 75 ग्राम पंचायतें आती हैं जिनमे सर्वाधिक 38 पंचायतें गंगेव जनपद एवं फिर 18 पंचायतें हनुमना जनपद की हैं।
17 अगस्त की 3 सीईओ की हुई सुनवाई, अखिल श्रीवास्तव रहे अनुपस्थित
मामले की दूसरी व्हाट्सएप कॉल पर सुनवाई दिनाँक 17 अगस्त को हुई जिसमें तीन जनपद सीईओ के साथ आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को भी तलब किया गया। उपस्थित सीईओ में से वर्तमान हनुमना सीईओ मूंगाराम मेहरा, पूर्व सीईओ रायपुर कर्चुलियान बलवान सिंह मवासे सम्मिलित रहें। पूर्व जवा जनपद के सीईओ अखिल श्रीवास्तव उपस्थित नहीं रहे।
सुनवाई के दौरान पूर्व सीईओ बलवान मवासे की दलील
मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सुनवाई की सुरुआत करते हुए सबसे पहले तत्कालीन रायपुर कर्चुलियान सीईओ बलवान सिंह मवासे से पूंछा की उन्होंने अपने कार्यकाल में कराधान मामले की कलेक्टर की जांच क्रमांक 2495 एवं 2498 पर लगाई गई एक्टिविस्ट द्विवेदी की आरटीआई का जबाब क्यों नही दिया। इस पर मवासे द्वारा कहा गया कि उन्होंने 13/12/2019 को जानकारी जिला पंचायत कार्यालय रीवा में प्रेषित कर दी थी। इस बीच आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि दिनांक 4/01/20 को भी आपको पत्र प्राप्त हुआ था लेकिन आपने उस पर कोई जानकारी नही दी इसका क्या कारण है। इस पर पूर्व सीईओ बलवान मवासे द्वारा कोई जबाब नहीं दिया गया। वहीं मवासे द्वारा यह उल्लेख किया गया कि उन्होंने वह पत्र लोक सूचना अधिकारी के नाम आवक पंजी में दर्ज किया था जिसका फ़ोटो भी शेयर किया गया और पत्र सम्बंधित शाखा प्रभारी को अंतरित किया है।
कार्यालय कैसे चलाना है यह अधिकारी की जिम्मेदारी है लेकिन आरटीआई की जानकारी देने से बच नहीं सकते – राहुल सिंह
इस बीच सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने स्पष्ट किया कि यह सम्बंधित अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह अपने कार्यालय को किस प्रकार चलाता है उस पर हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे पर जहां तक सवाल सूचना से सम्बंधित जनता के अधिकार का है इस विषय मे हमारा यह कहना है कि यदि कोई आरटीआई से सम्बंधित पत्र किसी लोक सूचना अधिकारी अथवा डीम्ड पीआईओ को आया हुआ है तो उस पर उन्हें जबाब देना पड़ेगा अन्यथा कार्यवाही के लिए तैयार रहें।
क्या दलील दी हनुमना सीईओ मूंगाराम मेहरा ने
अगले सुनवाई में जब बात वर्तमान हनुमना सीईओ मूंगाराम मेहरा की आई तो उनके द्वारा बताया गया कि उन्होंने कलेक्टर रीवा के उक्क्त दोनो पत्र क्रमांक 2495 एवं 2498 दिनांक 12/09/2019 पर दो माह पहले ही जांच प्रतिवेदन दे दिया था। इस प्रकार दिनांक 20/07/2019 को ही उनके द्वारा जिला पंचायत सीईओ को जानकारी भेजी जा चुकी थी। जबकि देखा जाय तो यह जबाब लिखित तौर पर प्रस्तुत किया गया है जिसमे किसी जांच के अस्तित्व में आने के पूर्व ही जांच प्रतिवेदन देना बताया जा रहा है। इससे संदेह और भी ज्यादा बढ़ जाता है कि किस प्रकार से अधिकारी आयोग तक को गुमराह करने में पीछे नहीं हटते।
बार बार उच्चाधिकारियों के रिमाइंडर पत्र का जबाब क्यों नही दिया – आयुक्त राहुल सिंह
सुनवाई के दौरान हनुमना सीईओ मूंगाराम मेहरा द्वारा जब बताया गया कि उन्होंने सितंबर 2019 के कलेक्टर रीवा के जांच पर जबाब जुलाई 2019 में ही दे दिया था तब सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने मूंगाराम मेहरा से पूंछा की जब उनके वरिष्ठ कार्यालय द्वारा 4 जनवरी 2020 से अगस्त तक निरंतर 4 पत्र भेजे गए तो उन पत्रों का जबाब उनके द्वारा क्यों नही दिए गए इस पर मेहरा का कोई तर्कसंगत जबाब प्राप्त नही हुआ।
दोनो जनपद सीईओ के जबाब ने कार्यवाही की सुई घुमाया जिला पंचायत की तरफ
इस व्हाट्सएप सुनवाई के दौरान जो जबाब रीवा जनपद सीईओ हरिश्चंद्र द्विवेदी, हनुमना जनपद सीईओ मूंगाराम मेहरा एवं पूर्व रायपुर कर्चुलियान जनपद सीईओ बलवान सिंह मवासे द्वारा प्रस्तुत किया गया उससे जिला पंचायत सीईओ एवं पीआईओ भी जांच के दायरे में स्वाभाविक तौर पर आ जाते हैं। अब सवाल यह है कि जब सम्बंधित जनपद सीईओ द्वारा सूचना आयोग की सुनवाई में बताया जा रहा है कि उन्होंने पूर्व में ही जानकारी भेज दी थी तो आखिर वह जानकारी कहां गयी और फिर क्यों जिला पंचायत सीईओ एवं पिआईओ द्वारा जनपद सीईओ को डीम्ड पीआईओ मानकर लगातार जानकारी दिए जाने के पत्र जारी किए जा रहे हैं? साथ ही कार्यवाही उन जनपद के डीम्ड पीआईओ सीईओ के ऊपर भी बनती है कि आखिर जब उनके वरिष्ठ कार्यालय जिला पंचायत रीवा द्वारा जब बार बार सूचना के अधिकार का रिमाइंडर पत्र जारी किया जा रहा है तो क्यों सम्बंधित डीम्ड पीआईओ द्वारा पत्राचार का जबाब नहीं दिया गया?
19 अगस्त तक कई अधिकारियों को देना होगा जबाब
ज्ञातव्य है कि सूचना आयोग की पिछली 13 अगस्त की सुनवाई के बाद पारित आदेश में कई डीम्ड पीआईओ को अपना लिखित जबाब 19 अगस्त तक प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए थे। इनमे से जहाँ कुछ अधिकारियों ने अपने घुमावदार जबाब पेश किया है वहीं दूसरे अन्य कुछ ने जबाब पेडिंग रखा हुआ है। इस पर देखना यह होगा कि अब दिनाँक 17 अगस्त की सुनवाई के बाद और अन्य किन किन अधिकारियों और पीआईओ की जबाबदेही तय होती है।
वहरहाल अब कराधान घोटाले की जांच और इसकी स्थिति को लेकर पूरे देश की जनता की नजर मप्र राज्य सूचना आयोग पर टिकी हुई है।

Subscribe to my channel
Comments are closed.