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(Rewa, MP) पुलिश विवेचना और हाईकोर्ट का हवाला देकर पीआईओ नही रोक सकते जानकारी, सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने फेसबुक लाइव पर की 2 सुनवाई, एक मे ठोंका 25 हज़ार रुपये का भारी भरकम जुर्माना, मामले थे स्कूल शिक्षा विभाग एवं वनोपज सहकारी समिति के

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     (शिवानन्द द्विवेदी)
      मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में इस समय नवाचार का दौर है ऐसे में सोशल मीडिया में नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं। उन्हीं में से एक प्रयोग फेसबुक लाइव के माध्यम से आयोग की सुनवाईयों को आमजन तक रखने के लिए मध्य प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा प्रयास किए गए हैं। अभी हाल ही में उन्होंने सुनवाइयां फेसबुक लाइव के माध्यम से आमजन के समक्ष प्रस्तुत की जिसकी पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्री शैलेश गांधी, श्री आत्मदीप, आरटीआई एक्टिविस्ट भास्कर प्रभु एवं शिवानन्द द्विवेदी सहित सैकड़ों एक्टिविस्टों ने काफी प्रशंसा की है। निश्चित तौर पर आरटीआई और पारदर्शिता की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
संकुल प्राचार्य ने समय पर नहीं दी जानकारी तो आयोग ने लगा दिया 25000 का जुर्माना
    दिनांक 21 अगस्त 2020 को अपनी एक व्हाट्सएप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने संकुल प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगरौली के एक द्वितीय अपील प्रकरण की समीक्षा की एवं द्वितीय अपील का निराकरण करते हुए संकुल प्राचार्य एवं लोक सूचना अधिकार श्री टोप्पो, प्रथम अपीलीय अधिकारी बृजेश मिश्रा एवं अपीलार्थी राम मूर्ति शाह को सुना और यह पाया की लोक सूचना अधिकारी टोप्पो द्वारा अपीलार्थी द्वारा चाही गई जानकारी धारा 7(1) के तहत 30 दिन की समयसीमा में उपलब्ध नहीं करवाई गई और न ही अपीलार्थी को धारा 7(8)(सी) के तहत प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम एवं पता बताया गया। जब सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने लोक सूचना अधिकारी से इसका कारण जानना चाहा तब बताया गया कि चूंकि आवेदन एक सादे कागज में लिखा गया था इसलिए लोक सूचना अधिकारी श्री टोप्पो ने आवेदन का जवाब देना उचित नहीं समझा। इस पर आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि क्या लोक सूचना अधिकारी ने इस विषय में अपीलार्थी राममूर्ति शाह से संपर्क कर इस समस्या से अवगत कराया था? इस पर लोक सूचना अधिकारी द्वारा बताया गया कि उन्होंने कोई संपर्क नहीं किया। 
धारा 7(1) एवं 7(8)(सी) का हुआ उल्लंघन
    इस प्रकार आयोग के समक्ष यह स्पष्ट था की लोक सूचना के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। क्योंकि सरकार द्वारा इसके पहले भी कई अधिसूचना जारी कर यह स्पष्ट किया गया है कि आरटीआई आवेदन को सादे पन्ने में दिया जा सकता है। इसके लिए कोई विशेष फॉर्मेट की आवश्यकता नहीं होती है। इस प्रकार आयुक्त श्री सिंह ने सुनवाई के दौरान लोक सूचना अधिकारी संकुल प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगरौली को दोषी पाते हुए उनके ऊपर 25 हज़ार रुपये के जुर्माने का कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
वनोपज समिति से संबंधित एक आरटीआई पर आयुक्त ने सुरक्षित रखा अपना फैसला
     इसी प्रकार दिनांक 21 अगस्त 2020 को ही फेसबुक के माध्यम से लाइव की गई एक अन्य आरटीआई की सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने वनोपज सहकारी समिति से संबंधित एक प्रकरण का निपटारा करते हुए दोनों पक्षों को सुना। सुनवाई के दौरान मामला काफी पेचीदा समझ में आया जिसमें अपीलार्थी द्वारा बताया गया कि उसके विरुद्ध वन विभाग द्वारा प्रकरण बनाकर हाई कोर्ट में पेश किया गया है। जिसके विषय में अपना पक्ष मजबूत करने के लिए अपीलार्थी ने संबंधित सहकारी समिति में सूचना का अधिकार लगाकर कुछ दस्तावेज प्राप्त करने का प्रयास किया था। लेकिन सहकारी समिति द्वारा यह कहकर की सूचना का अधिकार लागू नहीं होता है जानकारी देने से मना कर दिया गया था। जिसकी द्वितीय अपील अपीलार्थी द्वारा मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में की गई जिस पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को काफी गंभीरता से सुना गया। इस मामले में एवं हाईकोर्ट के प्रकरण के संदर्भ में बताया गया की जांच एवं विवेचना प्रभावित होगी इसलिए जानकारी नही दी गयी। 
भले ही मामला पुलिश विवेचना में हो अथवा कोर्ट में हो, जानकारी देने से नहीं रोका जा सकता – राहुल सिंह
     इस प्रकार सूचना आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि यदि मामला पुलिस अथवा उच्च न्यायालय में है फिर भी चाही गई जानकारी में से वह जानकारी दी जा सकती है जिससे जांच और विवेचना प्रभावित न हो। सूचना के अधिकार अधिनियम में यह स्पष्ट है कि कोई भी लोक सूचना अधिकारी समस्त जानकारी एक साथ नहीं रोक सकता। श्री सिंह ने कहा कि यह संभव है की समस्त जानकारी में से कुछ जानकारी या कुछ पेज ऐसे हो सकते हैं जिससे मामले की विवेचना अथवा जांच प्रभावित हो अतः उस स्थिति में वह विशेष पेजों को पर्याप्त कारण बताकर न दिया जाए लेकिन शेष जानकारी दिया जाना चाहिए।       सुनवाई के अंत में श्री सिंह ने कहा कि ठीक है इस मामले में अभी हम बाद में निर्णय देंगे और कुछ और दस्तावेज का अवलोकन करेंगे।

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