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MP//Rewa// सेल्समैन की पेमेंट की जानकारी एक माह के भीतर वेबपोर्टल में करें सार्वजनिक – सूचना आयुक्त राहुल सिंह// ऐतिहासिक आदेश में दिया एक माह का वक्त// फ़ूड, सहकारिता और सहकारी बैंक मिलकर वेबपोर्टल में अपलोड करेंगे पेमेंट की समस्त जानकारी// आरटीआई लागू न होने का कोई बहाना नही चलेगा- राहुल सिंह// पेमेंट व्यक्ति के जीवन जीने के अधिकार से जुड़ा मामला// सम्पूर्ण मप्र में लागू होगा निर्णय।।

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सरकारी राशन की दुकानों में कार्यरत सेल्समैन की पेमेंट से संबंधित जानकारी को लेकर लगाई गई आरटीआई में दिनांक 18 दिसंबर 2020 को मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने मोबाइल फोन कॉल के माध्यम से सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अपीलार्थी शिवानंद द्विवेदी के साथ प्रतिवादी लोक सूचना अधिकारी एवं डीम्ड पीआईओ उपस्थित रहे। आवेदक द्वारा आरटीआई आवेदन जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग रीवा में दायर किया गया था जिसमें तत्कालीन फूड कंट्रोलर स्व0 राजेंद्र सिंह ठाकुर उस समय लोक सूचना अधिकारी थे। आवेदन प्राप्ति के बाद राजेंद्र सिंह ठाकुर ने बिना ज्यादा विचार किए आवेदन को सीधे उपायुक्त सहकारिता एवं महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक मर्यादित को धारा 6(3) के तहत अंतरित कर दिया था।

  अंतरण के बाद सहकारिता उपायुक्त विजय कुमार पांडे के द्वारा आवेदन महाप्रबंधक जिला केंद्रीय सहकारी बैंक रीवा को अंतरित कर दिया गया था। परंतु लोक सूचना अधिकारी राजेंद्र सिंह ठाकुर के अतिरिक्त अन्य किसी भी डीम्ड पीआईओ के द्वारा आवेदक शिवानंद द्विवेदी को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई थी। जिसके चलते आवेदक ने प्रथम अपील प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला कलेक्टर रीवा को की गई थी जिस पर सुनवाई करते हुए अपीलीय अधिकारी रीवा एडीएम इला तिवारी के द्वारा आवेदक को 15 दिवस के भीतर जानकारी उपलब्ध करवाने हेतु निर्देशित किया गया था। 

   प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश की अवमानना के बाद जब जानकारी नहीं मिली तो आवेदक द्वारा मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में द्वितीय एवं अंतिम अपील प्रस्तुत की गई थी और कार्यवाही करने की माग की गई थी।

  क्या था पूरा मामला और आखिर कौन सी जानकारी चाही गई थी?

    अपीलार्थी शिवानंद द्विवेदी के द्वारा फूड कंट्रोलर कार्यालय रीवा में आरटीआई दायर कर फरवरी 2020 में जिले के समस्त सेल्समैन की जानकारी चाही गई थी उनके नाम पद मोबाइल नंबर के साथ। इसके अतिरिक्त सेल्समैन को कितनी पेमेंट मिलती है और मासिक छमाही अथवा वार्षिक आधार पर मिलती है इसकी जानकारी चाही गई। इसके अतिरिक्त सेल्समैन को 6 माह या अधिक समय से पेमेंट लंबित है और पेमेंट न दिए जाने के पीछे क्या कारण थे इसकी भी जानकारी चाही गई थी। 

      आवेदक द्विवेदी का कहना था कि यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सेल्समैन का कहना होता है कि उन्हें वर्षों से पेमेंट नहीं मिलती है तब सवाल यह पैदा होता है कि आखिर बिना पेमेंट का सेल्समेन काम कैसे करते हैं? जाहिर है ऐसे में सेल्समैन सरकारी राशन की दुकान में बंदरबांट और भ्रष्टाचार कर आम गरीब जनता के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले राशन की कालाबाजारी और चोरी करवा देते हैं और बता दिया जाता है कि किसी दीगर व्यक्ति के द्वारा अथवा अज्ञात व्यक्ति के द्वारा चोरी कर ली गई जिससे गरीब का हक मारा जाता है।

   फूड कंट्रोलर, उपायुक्त और सहकारी बैंक महाप्रबंधक ने एक दूसरे पर मढ़ा ठीकरा

   इस बीच दिनांक 18 दिसंबर 2020 की सुनवाई के दौरान फूड कंट्रोलर एमएनएच खान उपायुक्त सहकारिता विजय कुमार पांडे और जिला रीवा के सहकारी बैंक महाप्रबंधक एवं सीईओ आरएस भदौरिया ने एक दूसरे के ऊपर जिम्मेदारियां छोड़कर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया। जहां फूड कंट्रोलर खान ने सेल्समैन से संबंधित कोई भी जानकारी सहकारिता और सहकारी बैंक के पास होना बताया वहीं उपायुक्त सहकारिता ने फूड कंट्रोलर और सहकारी बैंक महाप्रबंधक को जिम्मेदार ठहराया। इस बीच फेसबुक लाइव के माध्यम से प्रसारित सुनवाई में काफी बहस हुई।

  जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकते अधिकारी – सूचना आयुक्त राहुल सिंह

  इस बीच सभी पक्षों को सुनते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने औरंगाबाद हाई कोर्ट का वर्ष 2017 एवं थलप्पालम सहकारी बैंक बनाम केरला सरकार का हवाला देकर बताया की सहकारी समितियों बैंकों से संबंधित सभी जानकारी डीआर और उपायुक्त सहकारिता से प्राप्त की जा सकती है और उपायुक्त का यह अधिकार बनता है कि वह जानकारी उपलब्ध करवाएं। उपायुक्त और सहकारी बैंक महाप्रबंधक अपेक्स बैंक एवं अन्य मामलों का हवाला देकर सहकारी समितियों और बैंकों में आरटीआई कानून लागू नहीं होता है इस प्रकार कह कर बच नहीं सकते हैं।

   50 हज़ार रुपये अनुदान प्राप्त समितियां और सहकारी संस्थाएं आरटीआई के दायरे में

   सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश में यदि कोई सहकारी संस्था समिति अथवा बैंक 50 हज़ार रुपये प्रति वर्ष प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर किसी भी प्रकार से अनुदान प्राप्त करता है तो वह आरटीआई के दायरे में आता है। इसलिए सहकारी बैंक और सहकारी समितियां आरटीआई कानून के दायरे में न आने के बहाने से नहीं बन सकती है।

  सेल्समैन की पेमेंट से संबंधित दस्तावेज एक माह में करें सार्वजनिक और व्यवस्था करें दुरुस्त

  सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सभी पक्षों को सुनते हुए अपना निर्णय दिया कि एक माह का समय दिया जाता है जिसके भीतर किसी सेल्समैन को कितनी पेमेंट मिल रही है और कब से उसको पेमेंट नहीं मिली है, क्यों नहीं मिल रही है? आदि कारणों सहित समस्त जानकारी तीनों विभाग संयुक्त रूप से मिलकर तैयार करें और भविष्य में समस्या पैदा न हो इसके लिए इस जानकारी को धारा 4 के तहत खाद्य विभाग सार्वजनिक करें। तीनों पक्षों को एक माह का समय देते हुए राहुल सिंह ने कहा कि यदि एक माह के भीतर कार्यवाही नहीं की गई तो 25 हज़ार रुपये जुर्माने का कारण बताओ नोटिस यथावत रखते हुए जुर्माना अधिरोपित किया जाएगा।

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