MP//Rewa// RTI की धारा 2(जे)(1) के तहत एक्टिविस्ट द्वारा कमिश्नर कार्यालय का किया गया निरीक्षण

RTI की धारा 2(जे)(1) के तहत एक्टिविस्ट द्वारा कमिश्नर कार्यालय का किया गया निरीक्षण
संभवतः प्रदेश में ऐसा पहला मामला जिसमे RTI कानून की इस धारा का उपयोग हुआ।
भविष्य में कार्यालयों की मनमानी में सुधार की जगी उम्मीद
अमूमन सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज इकट्ठा करना तो आपने अक्सर सुना होगा परंतु क्या आप जानते हैं कि आरटीआई में आप किसी कार्य, दस्तावेज अथवा कार्यालय का निरीक्षण भी कर सकते हैं। जी हां सूचना के अधिकार कानून में धारा 2(जे)(1) के तहत अपीलकर्ता द्वारा किसी कार्यालय का निरीक्षण भी किया जा सकता है। दिनांक 1 दिसंबर 2020 को दायर आरटीआई में कमिश्नर कार्यालय के निरीक्षण एवं धारा 4 के तहत 17 पॉइंट्स मैनुअल की जांच और निरीक्षण के विषय में आरटीआई दायर की गई थी। दिनांक 17 दिसंबर 2020 को सहायक लोक सूचना अधिकारी एवं लोक सूचना अधिकारी कमिश्नर कार्यालय रीवा के द्वारा पत्र जारी कर अपीलकर्ता को कार्यालय और दस्तावेज के निरीक्षण के लिए बुलाया गया था। इस प्रकार दिनांक 26 दिसंबर 2020 को आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी आरटीआई की धारा 4(बी) के तहत 17 पॉइंट्स मैनुअल के निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंचे। जिसमें साथ में मीडियाकर्मी और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्रा, देवेंद्र तिवारी और रविकांत अग्निहोत्री, लोक सूचना अधिकारी सतीश निगम, सहायक लोक सूचना अधिकारी सुष्मिता मिश्रा उपस्थित रहे।
आरटीआई की धारा 2(जे)(1) के तहत निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कमिश्नर कार्यालय में लोक सूचना अधिकारी अपीलीय अधिकारी का पद नाम सहित जानकारी मौके पर मिली एवं 17 पॉइंट मैन्युअल का नोटिस बोर्ड मिला लेकिन 17 पॉइंट्स मैनुअल के अंतर्गत जो कार्यों की सूची कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा संधारित्र की जानी चाहिए उनमें से कार्यालय के कर्मचारियों अधिकारियों का नाम पदनाम और उनके दायित्व की सूची नहीं पाई गई और साथ में कार्यालय में आवंटित बजट और उस के माध्यम से क्या-क्या कार्य किए गए इसकी जानकारी नहीं पाई गई। कार्यालय में कौन-कौन सी समितियां गठित की गई हैं और समितियों के क्या कार्य हैं और उनके कौन पदाधिकारी हैं उनके नाम पद सहित यह भी जानकारी नोटिस बोर्ड में नहीं पाई गई। मौके पर प्रथम अपीलीय अधिकारी के सील भी नहीं पाए गए। इस प्रकार जो जानकारियां मौके पर नहीं मिली उसको अलग से नोटकर कार्यालय की व्यवस्था में सुधार के लिए बोला गया है जिसके लिए 7 दिन का समय दिया गया है की व्यवस्था में सुधार कर लिया जाए। कमिश्नर कार्यालय में आरटीआई आवेदकों के लिए क्या व्यवस्था की गई है उनके उठने बैठने और उनकी मदद के लिए जो भी संभव व्यवस्थाएं हैं उनको भी दुरुस्त करने के लिए कहा गया है। यह सभी जानकारियां लोक प्राधिकारी की बाध्यताएँ होती हैं जिसमें धारा 4 के तहत अनिवार्यतः किसी भी कार्यालय में साझा की जानी चाहिए और समय-समय पर इसकी अद्यतन सूची सहित पब्लिश की जानी चाहिए।
रीवा संभाग के विषय में देखा जाए तो धारा 2(जे)(1) के तहत किसी भी कार्यालय अथवा कार्यों के निरीक्षण के विषय में यह पहली आरटीआई थी जिसके काफी दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे और कार्यालयों में अब मनमानी नहीं चलेगी और व्यवस्था में सुधार होगा धारा 2(जे)(1) आरटीआई कानून की वह धारा है जो व्यक्ति को अधिकारिता देती है कि वह किसी भी कार्यालय में जाकर व्यवस्थाओं को देखें और यदि उसमें सुधार नहीं है तो उसके लिए संबंधित विभागाध्यक्ष और जिम्मेदारों को चिन्हित करें और वह अपनी बात रखें जिससे सभी कार्यालय जनता के प्रति उत्तरदाई बने और सही मायने में जनता का जनता के द्वारा जनता के लिए लोकतंत्र की स्थापना हो सके।

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