MP//Rewa// अवस्थातीत कालातीत आत्मा रूपी परमात्मा ही जानने योग्य है – डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला // कैथा में शिव महापुराण कथा का नौवां दिन, 11 मार्च महाशिवरात्रि के दिन हवन एवं भंडारे के साथ कार्यक्रम का होगा विसर्जन//

यज्ञों की पावन स्थली कैथा स्थित अति प्राचीन हनुमान एवं शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित 11 दिवशीय शिवमहापुराण महायज्ञ दिनाँक 01 मार्च से प्रारंभ हुआ और दिनाँक 09 मार्च को कार्यक्रम का 9 वा दिन रहा।
इस बीच व्यासपीठ पर विराजमान डॉ गौरी शंकर शुक्ला जी के मुखारविंद से पाप विनाशक मोक्ष प्रदायक एवं अमृततुल्य शिव महापुराण कथा का अविरल प्रवाह सतत जारी है जिसमें भक्तगण सराबोर होते हुए अपने जीवन को सफल बना रहे हैं।
अवस्थातीत कालातीत आत्मा रूपी परमात्मा ही जानने योग्य है
इस बीच ईश्वरीय तत्व एवं शिव ज्ञान की महिमा का बखान करते हुए डॉ श्री शुक्ला ने बताया की अवस्थातीत एवं कालातीत आत्मा रूपी परमात्मा ही सर्वश्रेष्ठ एवं जानने योग्य है। आगे आचार्य जी ने बताया कि जो काल अर्थात भूत भविष्य एवं वर्तमान काल से परे है वह कालातीत है एवं जो स्वप्न जागृत एवं सुसुप्त अवस्था से परे है वह अवस्थातीत है और यह गुण मात्र ईश्वर में ही संभव है। डॉ श्री शुक्ला ने आगे बताया कि उपनिषदों का कथन है की आत्मा तुरीय अवस्था कहलाती है और तुरीय अवस्था वह अवस्था है जो स्वप्न जागृत एवं सुसुप्त अवस्था से परे है। शास्त्रों का कथन है की सत्यम शिवम अद्वैतम चतुर्थ मन्यते स आत्मा स विज्ञेयः अर्थात जो सत्य है जो कल्याणकारी है जो द्वैत भाव से रहित है और जो चतुर्थ अवस्था है वह आत्मा ही जानने योग्य है और वह आत्मा ही परमात्मा तुल्य है। अतः मानव जीवन का सर्वोत्तम उद्देश्य यह होना चाहिए कि व्यक्ति अपने अंतर्मन में स्थित होकर अपनी स्वयं की आत्मा रूपी परमात्मा का ध्यान करें और उस आत्मा रूपी ईश्वर तत्व को प्राप्त करें। श्रीमद्भागवत गीता में आत्मा को अजर अमर शास्वत सनातन बताया गया है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युध्यस्थल में मोहपाश से निकालने का प्रयत्न करते हुए कहा कि हे अर्जुन जिन्हें तुम जीवित समझकर मोह में पड़े हुए हो वह तो पहले से ही मृत हैं। क्योंकि जो जन्म लिया है उसकी मृत्यु सुनिश्चित है अतः उनका शोक मत करो जो शोक करने योग्य ही नही हैं। तात्पर्य यह है कि आत्मा ईश्वर का अंश है, जो न जन्मती है न मरती है।
हवन भंडारे के साथ महाशिवरात्रि के दिन महोत्सव का विसर्जन
इस बीच 11 दिवशीय सम्पूर्ण कार्यक्रम का विसर्जन हवन एवं भंडारे के साथ महाशिवरात्रि के दिन होगा। आयोजक मंडल ने कार्यक्रम में प्रसाद ग्रहण करने के लिए सभी भक्त श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया है।


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