MP//रीवा// गंगेव जनपद की दर्जनों पंचायतों में मनमाने ढंग से बना डाली प्रशासकीय समिति// कैथा पंचायत में सामने आई थी अनियमितता// विधि विरुद्ध तरीके से निर्वाचित पंचों को दरकिनार कर बनाई गई थी प्रशासकीय समिति// कैथा में प्रधान संत कुमार पटेल की बर्खास्तगी के बाद अब तक प्रधान की नही की जा सकी नियुक्ति।।
रीवा जिले में गंगेव जनपद में प्रशासकीय समिति को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है जिसमें गंगेव जनपद की 88 पंचायतों में वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2019 तक पंचायती कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों में प्रधान की नियुक्ति किए जाने एवं चुने हुए सभी सदस्यों पंचों को समिति में रखे जाने हेतु निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के उस आदेश के विरुद्ध जाते हुए पंचायतों ने मनमाने ढंग से प्रशासकीय समिति का गठन किया।
मामला तब प्रकाश में आया जब कैथा पंचायत में बर्खास्त सरपंच संत कुमार पटेल के बाद चुने हुए पंचों से नए प्रधान का चुनाव किया जाना था।
प्रशासकीय समिति गठन को लेकर अब तक इन इन पंचायतों में पकड़ी गई अनियमितता
प्रशासकीय समिति के गठन को लेकर 88 ग्राम पंचायतों में गंगेव जनपद में लगभग एक दर्जन पंचायतों में व्यापक अनियमितता पकड़ी गई है। ग्राम पंचायत मढ़ी खुर्द में कुल 17 वार्ड मेंबर चुने किए गए थे जिसमें प्रशासकीय समिति में मात्र 15 सदस्य, ग्राम पंचायत अगडाल में कुल 19 वार्ड मेंबर में प्रशासकीय समिति में मात्र 17 सदस्य, ग्राम पंचायत हिनौती में कुल 14 वार्ड मेंबर में प्रशासकीय समिति में मात्र 10 सदस्य, ग्राम पंचायत कैथा में कुल 18 वार्ड मेंबर में प्रशासकीय समिति में मात्र 13 पंच, ग्राम पंचायत बांस में कुल 20 वार्ड मेंबर में प्रशासकीय समिति में मात्र 19 सदस्य, घुचिआरी ग्राम पंचायत में कुल 17 वार्ड में प्रशासकीय समिति में मात्र 16 वार्ड मेंबर रखे गए। जबकि अभी अन्य दर्जनों ग्राम पंचायतों में कुल चुने हुए वार्ड मेंबर और प्रशासकीय समिति में रखे गए वार्ड मेंबर के बीच में अंतर देखा जाना शेष है। जहां गंगेव की 88 ग्राम पंचायतों में लगभग आधी ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां चुने हुए वार्ड मेंबर के अनुरूप ही प्रशासकीय समिति में भी वार्ड मेंबर रखे गए हैं वही दर्जनों ग्राम पंचायतें ऐसी है जहाँ यह विसंगति देखने को मिल रही है। अब सवाल यह है कि जिन ग्राम पंचायतों में कुल चुने हुए पंच और प्रशासकीय समिति में रखे हुए पंचों के बीच में अंतर सामने आ रहा है उसके पीछे कौन जिम्मेदार है और ऐसा क्यों किया गया अभी यह जांच का विषय है। परंतु एक बात साफ है कि जिस प्रकार पंचायती कार्यकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 2020 में कलेक्टर के आदेश से 26 मार्च 2020 को प्रशासकीय समिति का गठन किया जाकर ग्राम पंचायतों में प्रधान की नियुक्ति की गई उसमें निर्वाचित सदस्यों को ही दरकिनार करते हुए मनमर्जी ढंग से प्रशासकीय समिति का गठन कर लिया गया और उसके उपरांत राशि का आहरण संवितरण किया गया तो ऐसी विधि विरुद्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन प्रश्न के दायरे में भी आ जाता है क्योंकि कोई भी कार्य किए जाने के पूर्व ग्राम सभा में प्रस्ताव, कार्यवाही और एजेंडा तैयार किया जाता है जो कि पंचों की उपस्थिति और ग्राम सभा के प्रस्ताव से ही संभव होता है। बिना ग्राम सभा के प्रस्ताव न तो किसी भी कार्य का तकनीकी स्वीकृति और न ही प्रशासकीय स्वीकृति तय की जाती है।
कैथा ग्राम पंचायत में नहीं की जा सकी नए प्रधान की नियुक्ति
ग्राम पंचायत कैथा में प्रशासकीय समिति के प्रधान रहे बर्खास्त सरपंच संत कुमार पटेल को पद से पृथक करने के बाद 15 जनवरी 2021 से आज दिनांक तक पंचों के माध्यम से वैकल्पिक व्यवस्था हेतु प्रधान का चुनाव नहीं किया जा सका है। ज्ञातव्य है की अनुविभागीय एवं दंडाधिकारी मनगवां द्वारा प्रधान के चुनाव हेतु प्रशासकीय समिति के कुल 13 सदस्यों में से नए प्रधान की नियुक्ति की जानी थी लेकिन क्योंकि कैथा में कुल 18 पंच चुने गए थे जिसमें से प्रशासकीय समिति में 13 पंचों को ही रखा गया था इस कारण अन्य 5 पंचों ने प्रश्न खड़ा कर दिया की आखिर उन्हें विफ़ही विरुद्ध क्यों बाहर रखा गया जिससे अब दो माह से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो पंचों को ढूंढा जा सका और न ही उनके दस्तावेज उपलब्ध करवाई जा सकी। जिसके चलते तत्कालीन पंचायत इंस्पेक्टर बालेंद्र पांडे को तत्कालीन एसडीएम मनगवां अखिलेश कुमार सिंह ने निलंबन एवं विभागीय जांच के लिए प्रस्तावित किया जिन्हें जिला पंचायत अटैच कर दिया गया और विभागीय जांच बैठा दी गई।

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