भारत में सबसे तेजी से उभरता हुआ वेब न्यूज़ चैनल

MP//Rewa// सम्पूर्ण मप्र की धारा 40-92 की जानकारी पब्लिक पोर्टल पर होगी प्रकाशित// मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के आदेश के बाद हरकत में आया पंचायत विभाग// पंचायतराज संचालनालय भोपाल से जारी हुआ पत्र// आरं टी आई एक्टिविस्ट को जानकारी देने के लिए घुमाना पड़ा महगा, अब समस्त जानकारी पोर्टल पर करो साझा

369
Above News
  • सम्पूर्ण मप्र की पंचायतों की धारा 40-92 की जानकारी पब्लिक पोर्टल पर होगी प्रकाशित// 
  • मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के आदेश के बाद हरकत में आया पंचायत विभाग//
  • पंचायतराज संचालनालय भोपाल से जारी हुआ पत्र// 
  • आरं टी आई एक्टिविस्ट को जानकारी देने के लिए घुमाना पड़ा महगा, अब समस्त जानकारी पोर्टल पर करो साझा//
  • सूचना आयुक्त राहुल सिंह का एक और लैंडमार्क निर्णय//
  • पंचायती भ्रष्ट्राचार की जानकारी सार्वजनिक होने से प्रशासन पर कार्यवाही का बनेगा दबाब//
  • अब आमजन को भी पता चलेगा की उनके चुने प्रतिनिधियों पर क्या कार्यवाहियां चल रहीं//
  • अब पंचायतों में भ्रष्ट्राचार कर मजे मारने वालों की खैर नहीं. मात्र 120 दिन में होगी पद से पृथक करने की कार्यवाही.
  • सरपंच सचिवों से वसूली अब मात्र 6 माह के भीतर, वसूली नहीं भरी तो जायेंगे जेल.

  मप्र की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार के दोषी सरपंच सचिव के विरुद्ध मप्र पंचायतीराज अधिनियम के तहत चल रही धारा 40 एवं 92 की कार्यवाही की जानकारी पब्लिक पोर्टल पर साझा करने के आदेश दिए गए हैं. अभी हाल ही में दिनांक 19 फरवरी 2021 के अपने एक आदेश में मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने एक विशेष फॉर्मेट में जानकारी साझा करने के आदेश दिए थे. अपने आदेश में सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग विनोद कुमार, विकाश आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय मनोज कुमार श्रीवास्तव को आदेशित किया था की एक निश्चित प्रोफोर्मा में जानकारी आदेश दिनांक से 3 माह के भीतर पब्लिक पोर्टल पर साझा करें. जानकारी साझा करने के लिए प्रत्येक जिला कलेक्टर को भी लोक प्राधिकारी बनाया गया था.

 सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी की आर टी आई पर हुई ऐतिहासिक कार्यवाही

    मामले पर कार्यवाही सामाजिक कार्यकर्ता एवं आर टी आई एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी की आर टी आई के तहत धारा 18 की शिकायत पर की गयी. एक्टिविस्ट द्विवेदी ने मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह को शिकायत में लिखा की उनके द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मप्र भोपाल में आर टी आई दायर कर मप्र के समस्त जिलों में चल रहे पंचायतों के धारा 40 एवं 92 के प्रकरणों की जानकारी चाही गयी थी. लेकिन उक्त जानकारी उपलब्ध न कराते हुए पंचायतराज संचालनालय भोपाल द्वारा पत्र समस्त जिला पंचायत सीईओ को अंतरित कर आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराने हेतु लिखा गया. इसके उपरांत प्रदेश की 3 जिला पंचायत द्वारा आंशिक जानकारी तो उपलब्ध करवा दी गयी लेकिन अन्य जिला पंचायत में से कुछ के द्वारा स्वयं उस जिले में उपस्थित होकर जानकारी लेने के लिए बाध्य किया गया. आवेदक द्वारा कंप्लेंन की गयी की इससे यह स्पष्ट था की अन्य कई जिला पंचायतें जानकारी उपलब्ध कराने की मंशा में नहीं थीं बल्कि आवेदक को परेशांन करने की मंशा में थीं जिससे आवेदक स्वयं ही जानकारी से पीछा छुडा ले क्योंकि जाहिर था की मप्र के समस्त जिलों में भ्रमण कर जानकारी इकठ्ठा करना संभव नहीं था. इसके बाद आवेदक ने धारा 18 की शिकायत सीधे सूचना आयोग भोपाल में कर दी और माग किया की क्यों न पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 और 92 की जानकारी पब्लिक पोर्टल पर साझा की जाए. वास्तव में देखा जाय तो यह बहुत ही आवश्यक था क्योंकि आर टी आई कानून की मंशा के अनुरूप ज्यादा से ज्यादा जानकारी  स्वयं ही सार्वजानिक करने हेतु इस कानून की धारा 4 में उल्लेखित भी है.

सूचना आयोग के तथ्य और क्या है धारा 40-92

  एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी की शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने  सुनवाई की. सुनवाई के दौरान आयोग ने सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए जांच संस्थित की जिसमे पाया की पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय भोपाल द्वारा तत्कालीन एसीएस राधेश्याम जुलानिया और अन्य ने पहले भी धारा 40-92 के विषय में कई बार जानकारी समस्त जिला पंचायतों से मगवाने हेतु एवं नियमित अन्तराल में हर माह बैठक कर रिव्यु करने हेतु निर्देशित किया था. कुछ पत्रों का आदेश में हवाला दिया गया जिसमे धारा 92 की कार्यवाही 6 माह में एवं धारा 40 की कार्यवाही 4 माह में पूर्ण करने के आदेश दिए गए थे. लेकिन यह पाया गया की पंचायत विभाग के इन सख्त निर्देशों के बाबजूद भी मप्र की जिला पंचायातों ने इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं की जिससे आवेदक शिवानन्द द्विवेदी द्वारा चाही गयी उक्त जानकारी पहले से संकलित नहीं थी जिसे पंचायत विभाग की वेबपोर्टल में इंटीग्रेटेड फॉर्म में नहीं उपलब्ध कराया गया था. आयोग ने अपने 6 पृष्ठ के आदेश में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 एवं 92 का भी उल्लेख किया जिसमे धारा 40 जिसमे चुने हुए प्रतिनिधियों को दोषी पाए जाने पर पद से प्रथक करने एवं धारा 92 जिसमे दोषी सरपंच सचिव एवं अन्य लोक सेवकों के विरुद्ध वसूली अधिरोपित की जाने का प्रावधान है.

      सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने आदेश में सूचना के अधिकार कानून 2005 की धारा 19(8)(3) का भी उल्लेख किया जिसके कारण सूचना आयुक्त के पास यह शक्तियां सन्निहित रहती हैं जिससे कतिपय सूचना के प्रवर्गों को आवश्यकता पड़ने पर सूचना आयोग प्रकाशित करवाकर पब्लिक डोमेन में रखवा सकता है जिससे आमजन को सर्वसुलभ हो सके.

पंचायतराज संचालनालय भोपाल द्वारा जारी हुआ यह आदेश

  मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के आदेश के बाद अमली जामा पहनाने की दिशा में कदम उठाते हुए पंचायतराज संचालनालय मप्र भोपाल द्वारा कार्यवाही करते हुए दिनांक 31 मार्च 2021 को पत्र क्रमांक – पं.रा./एफ-1/2021/4794 भोपाल जारी किया गया जिसमे समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला समस्त को निर्देशित करते हुए सूचना आयोग भोपाल और एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी की धारा 18 की शिकायत का उल्लेख किया गया और कहा गया की निर्धारित प्रपत्र पर धारा 40 एवं 92 की जानकारी सभी जिला पंचायतें उपलब्ध कराएँ.

धारा 40-92 की जानकारी सार्वजनिक होने से क्या होंगे दूरगामी परिणाम

  आज स्वतंत्रता प्राप्ति के 73 वर्ष हो चुके हैं और जब हम गाँव की तरफ रुख करते हैं तो पाते हैं ग्रामों की स्थिति आज भी लगभग वैसे ही है जैसे दशकों पूर्व हुआ करती थी. देखा जाय तो मनरेगा, पंच परमेश्वर, वित्त आयोग, सांसद और विधायक आदि निधियों द्वारा लाखों करोड़ों की राशि पंचायतों के विकाश के लिए सरकार द्वारा झोंकी जाती है लेकिन जब ग्राउंड पर देखते हैं तो सब साफ़ सा दिखता है. ग्रामों में आज भी आमजन सामान्य समस्याओं बिजली, पानी, सड़क, सिक्षा और स्वास्थ्य के लिए परेशान हैं. मजदूरों के लिए नरेगा योजना के माध्यम से अरबों खरबों पानी की तरह बहाए जाते हैं लेकिन कार्य मशीनों और जेसीबी से होते हैं जबकि वास्तविक मजदूर शहरों की तरफ पलायन करने को मजबूर रहते हैं. किसी का विकास हो अथवा न हो लेकिन उस ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, इंजिनियर और बड़े अधिकारी जरुर विकास कर रहे हैं. जो सरपंच चंदा करके सरपंची का चुनाव लड़ते थे वह पांच साल खत्म होने के पहले ही करोड़ों की प्रॉपर्टी के मालिक बन जाते हैं. जन प्रतिनिधियों के बोलचाल और ठाटबाट सब पांच साल के भीतर बदल जाते हैं. आखिर कुल्फी बेचने वाले और मजदूरी करने वाले इन सरपंचों के पास कहाँ से आती हैं इतनी अधिक सम्पति? जाहिर है पंचायत चुनाव जीतने के बाद 5 वर्ष लगातार जो भ्रष्टाचार किया जाता है उसी से यह अवैध धन का संग्रह होता है.

    जाहिर है भारत से भ्रष्टाचार तो पूरी तरह से बंद नहीं हो सकता लेकिन सूचना आयोग के इस आदेश के बड़े फायदे देखे जा रहे हैं. अब तक जो जानकारी मात्र वरिष्ठ अधिकारियों और बाबुओं तक सीमित रहती थी वह पब्लिक पोर्टल पर सार्वजनिक किये जाने से यह फायदा होगा की अब आमजन को भी यह पता चल सकेगा की किन किन पंचायतों में सरपंच और किन लोक सेवकों के विरुद्ध कार्यवाहियां चल रही हैं और उन पर क्या कुछ हो पाया है. जब आम पब्लिक की नजर धारा 40 और 92 के तहत हल रहे प्रकरणों पर रहेगी तो वह समय-समय पर इन कार्यवाहियों के लेटलतीफी पर आवाज भी उठा सकेगी. स्वयं मीडिया भी यह जानकारी प्रकाशित कर सकेगी जिससे सरकार और पंचायत विभाग पर दबाब बना रहेगा.

खबरों के अपडेट पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy
E-Paper