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MP//Rewa// RTI द्वारा कोविड वैक्सीनेशन के बाद हो रही डेथ पर जानकारी निकालने का चल रहा प्रयास – आरटीआइ एक्टिविस्ट भास्कर प्रभु// RTI और पारदर्शिता विषय पर 45वें वेबिनार में हुई वृहद चर्चा//

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  मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह की अध्यक्षता में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु, कर्नाटक से आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेलूर आदि ने 45 वें राष्ट्रीय वेबीनार में सूचना के अधिकार और कोरोनावायरस से उपजे पारदर्शिता संबंधी मामलों को लेकर अपने उद्गार रखें। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी और अन्य साथियों के द्वारा किया गया।

*कोविड-19 वैक्सीनेशन के बाद हो रही डेथ पर जानकारी निकालने का चल रहा प्रयास*

    इस बीच भास्कर प्रभु ने बताया कि वह मुंबई और महाराष्ट्र में कोविड-19 वैक्सीनेशन के बाद उपजी हुई हेल्थ संबंधी समस्या पर आरटीआई लगाकर जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता टीकाकरण होने के बाद होने वाली मृत्यु के विषय में बात नहीं कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके मित्र के पिता की को कोविशील्ड टीकाकरण के बाद अगले 1 घंटे के भीतर सीने में दर्द होने के उपरांत मृत्यु हो गई। इसके विषय में उन्होंने म्युनिसिपल, हेल्थ डिपार्टमेंट, पुलिस हर जगह से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल रही है कि आखिर वैक्सीनेशन के उपरांत मृत्यु के क्या कारण थे। और इन स्थितियों में व्यक्ति को कहां जाना चाहिए और किस से कंप्लेंट करनी चाहिए? यहां तक की इस प्रकार से मृतक व्यक्ति के मृत शरीर को पुलिस अपने हाथ में ले लेती है और उसका अलग किस्म का पंचनामा बनाती है और डेड बॉडी भी देर से दी जाती है। मृत्यु के विषय में कारण नहीं बताया जाता। भास्कर प्रभु ने कहा कि हम अक्सर 48 घंटे के भीतर जानकारी प्राप्त करने की बात करते हैं लेकिन यह व्यवस्था यदि नहीं है तो हमें प्रयास करना पड़ेगा। हम इस समय टीकाकरण के बाद की मृत्यु के विषय में रिसर्च कर रहे हैं कि आखिर मृत्यु क्यों हो रही है और कारण क्या है? पर यह जानकारियां अभी तक नहीं दी जा रही है।

   *द वायर आर्टिकल में कोविशील्ड टीकाकरण के बाद ब्लड क्लोटिंग की वजह से मृत्यु का होना बताया गया*

   माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु ने बताया कि अभी हाल ही में द वायर नामक एक ऑनलाइन अखबार में एक आर्टिकल निकला था जिसमें कोविशील्ड टीकाकरण के बाद ब्लड  क्लॉटिंग का भी होना बताया गया। इसमें जानकारी मांगी तो बताया जाता है कि इसकी सक्सेस स्टोरी 70 से 80 प्रतिशत तक है। अब सवाल यह है कि यदि सक्सेस स्टोरी 70 से 80 प्रतिशत है तो शेष 30 या 20 प्रतिशत लोगों में क्या रिस्क फैक्टर रहता है और उनका क्या होगा? अभी तक हमारे देश में कोरोना से संबंधित मात्र दो वैक्सीन लगाए जा रहे हैं जिसमें कोवैक्सीन और कोविशील्ड को ही मात्र मंजूरी मिली है। बांकी को मंजूरी नहीं मिली है और प्रक्रिया चल रही है ऐसे में हम आत्मनिर्भर से दूसरों पर निर्भर होने वाले हैं। ऐसे में हमारी आत्मनिर्भरता खत्म होने वाली है। भास्कर प्रभु ने कहा कि हम सब को सरकार से सवाल पूछने चाहिए लेकिन कोर्ट भी सवाल पूछने से डर रही है और हम भी सवाल पूछने से डर रहे हैं। सभी एक्टिविस्ट को यह सवाल पूछना चाहिए कि कोविड-19 के वैक्सीनशन बाद कितनी डेथ हो रही है और उन डेथ के पीछे क्या कारण है?

   *कोविड-19 वैक्सीनेशन के बाद मेडिकल ऑडिट ऑफ डेथ का डिटेल मिलना चाहिए*

          आरटीआई एक्टिविस्ट भास्कर प्रभु ने प्रश्न खड़ा करते हुए पूछा की कोविड-19 वैक्सीनेशन के बाद के विषय में जानकारी मागी जानी चाहिए। वैक्सीनेशन के बाद होने वाली मृत्यु के विषय में मेडिकल ऑडिट आफ डेथ की रिपोर्ट उस मृतक के परिजनों को कब मिलेगी यह जानकारी भी एक्टिविस्टों को मांगनी चाहिए। मेडिकल ऑडिट ऑफ डेथ रिपोर्ट अभी तक परिजनों को नहीं दी जा रही है। वैक्सीनेशन डेथ के बाद बॉडी का क्या पोस्टमार्टम किया जाता है? इसके क्या प्रोटोकोल है? और क्या कहां जानकारी मिलेगी? यह सब पता होना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा पूछा गया कि कोविड-19 से होने वाली मृत्यु के बाद डेड बॉडी को लावारिस की तरह जला दिया जाता है और दफना दिया जाता है और कोई पोस्टमार्टम नहीं किया जाता है तब कैसे मेडिकल ऑडिट आफ डेथ की जानकारी मिलेगी? इस विषय पर भास्कर प्रभु ने कहा कि वैक्सीनेशन के बाद होने वाली डेट के विषय में बात कर रहे हैं और उन्होंने बताया कि कोविड-19 से होने वाली डेथ तो स्पष्ट है कि उनका कारण कोविड-19 लेकिन वैक्सीनेशन के बाद जिन व्यक्तियों की डेथ हो रही है उसके पीछे क्या कारण है हमें लगता है कि आज हमें आरटीआई लगाना चाहिए तभी कुछ जवाब प्राप्त होगा और यह जानकारी आम पब्लिक को दी जानी चाहिए। प्रभु ने बताया कि उन्हें ऐसा लगता है कि फेसबुक और सोशल मीडिया में हम बहुत बात करते हैं लेकिन कोई सार्थक प्रयास नहीं कर रहे हैं अतः में सार्थक प्रयास करने चाहिए।

  *बृहन नगर मुंबई नगरपालिका में 32 हज़ार करोड़ का बजट लेकिन 8 माह से वेब पोर्टल बंद*

   आरटीआई एक्टिविस्ट भास्कर प्रभु ने बताया कि देश में पारदर्शिता का आकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि बृहन नगर मुंबई नगरपालिका का कुल बजट 32 हज़ार करोड रुपए के आसपास है लेकिन नगरपालिका अपना वेब पोर्टल तक अपडेट नहीं कर रहा है। मुंबई जैसे शहरों में पारदर्शिता और डिजिटलीकरण की यह स्थिति है बाकी का क्या होगा इसी से समझा जा सकता है। नगरपालिका का वेब पोर्टल पिछले 8 माह से बंद पड़ा हुआ है और इस विषय में भास्कर प्रभु ने कंप्लेंट किया तो बताया गया कि मात्र उन्हीं भर से कंप्लेन आई है इसलिए यह उनका व्यक्तिगत मामला हो सकता है। इस विषय पर भास्कर प्रभु ने उनके फेसबुक में जुड़े हुए लगभग ढाई हजार मित्रों को पोस्ट कर कहा कि वह भी कंप्लेन करें और देखें कि क्या वेबपोर्टल चल रहा है। इस पर फेसबुक पोस्ट में तो कई मित्रों ने कहा कि वे पोर्टल नहीं चल रहा लेकिन जब कंप्लेंट करने की बात आई तो मात्र दो अन्य लोगों ने ही कंप्लेन की है। इससे स्पष्ट है सामाजिक कार्यों में लोगों की रुचि नहीं है लेकिन आपस में चर्चा सभी करते हैं और व्यवस्था सभी को अच्छी चाहिए लेकिन कोई प्रयास नहीं करना चाहता जो कि काफी दुखद है। भास्कर प्रभु ने बताया कि हम पारदर्शिता और डिस्टलाइजेशन की बात करते हैं लेकिन जब तक हम सब मिलकर प्रयास नहीं करेंगे तो पारदर्शिता स्वयं नहीं आएगी क्योंकि सरकार पारदर्शिता नहीं लाना चाहती और जनता की कोई रुचि नहीं है।

  *मुंबई के 427 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मात्र 2 वर्ग किलोमीटर में एक एक्टिविस्ट कार्य करें तो नक्शा बदल जाए*

  भास्कर प्रभु ने बताया कि आज लोग बदलाव तो चाहते हैं लेकिन वह बदलाव करने के लिए कोई प्रयास नहीं करना चाहते। उन्होंने बताया कि मुंबई में कुल 427 वर्ग किलोमीटर के आसपास का क्षेत्रफल है और यदि प्रत्येक 2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक एक्टिविस्ट काम करें तो मुंबई का नक्शा बदल जाए लेकिन स्थिति ऐसी नहीं है और पब्लिक स्पिरिटेड लोग नहीं है जो पब्लिक कॉज के लिए काम करें। यदि किसी कारपोरेट की बात करें तो हर कारपोरेट प्रति वर्ग किलोमीटर में एक फील्ड ऑफिसर रखता है जिससे उसका काम बेहतर ढंग से चल सके लेकिन जब हम आरटीआई और पब्लिक कॉज की बात करते तो स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है और हमें उंगली में गिनती से भी ऐसे लोग नहीं मिल पा रहे।

  *एक्टिविस्ट पब्लिक ऑडिट को बनाए आधार और सरकार पर बनाएं दबाव*

  भास्कर प्रभु ने बताया कि हमें पब्लिक ऑडिट के पीछे पढ़ना पड़ेगा और इसी को आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया की एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई से जुड़े हुए लोग सरकार को अधिक से अधिक लिखें और उन पर दबाव बनाएं कि वह हर क्षेत्र में पब्लिक ऑडिट प्रारंभ करवाएं। जब तक पब्लिक ऑडिट प्रारंभ नहीं होगा तब तक सरकारी विभागों की नींद नहीं खुलेगी क्योंकि हर मामले में जब पब्लिक बढ़-चढ़कर जानकारी लेगी और अपने एक एक पैसे के हिसाब का ऑडिट लेगी तभी परिस्थितियो में सुधार संभव है। भास्कर प्रभु ने बताया कि हमेशा किसी एक व्यक्ति पर सब कुछ नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जनता की सोच है कि कोई मैजिक बैंड लेकर आएगा और जादू की छड़ी से बदलाव कर देगा।  यदि हमें पारदर्शिता डिजिटलाइजेशन, वेबपोर्टल, पब्लिक ऑडिट यह सब चाहिए तो हम सबको मिलकर प्रयास करना पड़ेगा और सरकार पर दबाव लगाना पड़ेगा।

  *अभी तक शहर भी नहीं जुड़ पाए नेटवर्किंग से*

  भास्कर प्रभु ने बताया कि पहले सभी जिला के हेड क्वार्टर को इंटरनेट नेटवर्किंग से जोड़ा जाना चाहिए। अभी भी कई समस्याएं बताई जा रही है। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों को भी नेटवर्किंग के साथ जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिला के हेड क्वार्टर में नेटवर्किंग मजबूत करने से ऑनलाइन सुनवाई और डिजिटलीकरण को बल मिलेगा। उन्होंने हैदराबाद तेलंगाना और कर्नाटक के कई हिस्सों में डिजिटलीकरण का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां अच्छे प्रयास चल रहे हैं। जिस प्रकार वीरेश बेलूर ने बताया कि किस प्रकार माफिया डॉन मेडिकल क्षेत्र में बैठे हुए हैं और पब्लिक हेल्थ सिस्टम पर एकाधिकार जमाए हुए हैं इस बात का सपोर्ट करते हुए भास्कर प्रभु ने कहा कि यह बिल्कुल सही है और श्री बेलूर ने इस विषय पर काफी सिस्टमैटिक ढंग से काम किया है और। वीरेश सभी प्रक्रिया को फॉलो कर रहे हैं आरटीआई लगा रहे हैं और भ्रष्टाचार को एक्सपोज कर रहे हैं और उन्हें इस विषय पर काफी अनुभव है।

 *टाटा कैंसर हॉस्पिटल धारा 4 के प्रावधान लागू करवाने का चल रहा प्रयास*

 भास्कर प्रभु ने कहा की अभी हाल ही में उनकी मां बीमार हुई थी और उन्होंने देश के जाने-माने टाटा कैंसर अस्पताल में अपनी माता को भर्ती करवाया था। इस दौरान इलाज से संबंधित जानकारी चाही गई तो अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि आप अपनी समस्या बताएं बाकी छोड़े तब भास्कर प्रभु ने कहा कि हमारी व्यक्तिगत समस्या नहीं है बल्कि यह सब की समस्या है और यदि हमें कोई भी जानकारी चाहिए तो वह हॉस्पिटल के वेब पोर्टल पर धारा 4 के प्रावधानों के अनुरूप साझा की जानी चाहिए जिससे आम व्यक्ति को परेशान न होना पड़े। लेकिन भास्कर प्रभु ने कहा अस्पताल प्रबंधन के द्वारा इतने बड़े अस्पताल के विषय में भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई इससे उन्हें ताजुब हुआ कि आरटीआई की स्थिति ठीक नहीं है और उन्होंने इस विषय में कुछ पत्राचार भी किए और पीआरओ वगैरह को भी लिखा तो बताया गया कि इस दिशा में प्रयास चल रहे हैं। 

     भास्कर प्रभु ने कहा कि इन सब बातों से यह स्पष्ट है कि मेडिकल क्षेत्र में माफिया का जबरदस्त इंवॉल्वमेंट है। उन्होंने पिछले कुछ वर्ष पहले केएम अस्पताल के विषय में अपना अनुभव साझा करते हुए कहा एक आरटीआई एक्टिविस्ट दवा खरीद से संबंधित और अन्य जानकारी चाही थी और वह काफी हद तक पीछे पड़ा रहा बाद में उसका मर्डर करवा दिया गया। इसलिए यह सब काम किसी एक व्यक्ति विशेष के नहीं है बल्कि सभी लोगों को मिलकर एकजुट होकर काम करना पड़ेगा तभी बदलाव संभव है। उन्होंने बताया कि मेडिकल क्षेत्र में बहुत अधिक भ्रष्टाचार है जिसे सबको मिलकर लड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में जीवन रक्षक दवा रेमडेसिवीर लाते हुए एक पूर्व मुख्यमंत्री को स्पॉट किया गया था। लेकिन सवाल यह है कि जो दवाइयां सरकार के अधीन होती हैं वह किसी रसूखदार पूर्व मुख्यमंत्री अथवा मंत्री को कैसे मिल जाती है? 

  भास्कर प्रभु ने कहा कि  डेमोक्रेसी में सब को मिलकर काम करना पड़ेगा क्योंकि डेमोक्रेसी इज नॉट स्पैक्टेटर्स गेम बट पार्टिसिपेट इन डेमोक्रेसी एंड एंजॉय स्पोर्ट।

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