MP//Rewa// पंचायती चुनावों में पारदर्शिता विषय पर आयोजित हुआ 54 वा राष्ट्रीय आरटीआई वेबिनार// पंचायत प्रतिनिधियों की चल अचल संपत्ति का शपथ पत्र सार्वजनिक करने सम्बन्धी सूचना आयुक्त राहुल सिंह का आदेश मील का पत्थर //
आरटीआई कानून को जन जन तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन वेबीनार के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में दिनांक 4 जुलाई 2021 को पंचायती चुनावों में पारदर्शी व्यवस्था लाने के लिए सूचना के अधिकार कानून का किस प्रकार से उपयोग किया जा सकता है इस विषय पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में चर्चा का मुख्य बिंदु अभी हाल ही में 29 जून 2021 को मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के द्वारा जनप्रतिनिधियों के एफिडेविट सह सार पत्र को आगामी चुनाव को देखते हुए सार्वजनिक वेब पोर्टल पर रखे जाने के आदेश पर रहा। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, कर्नाटक से आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेलूर, राजस्थान मजदूर किसान शक्ति संगठन के सह संस्थापक शंकर सिंह सहित अन्य आरटीआई एक्टिविस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता, पंचायती क्षेत्र के चुनावी प्रतिद्वंदी और जनप्रतिनिधि सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम का संचालन एवं प्रबंधन का कार्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी और अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा के द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने किया।
*मध्य प्रदेश पंचायत प्रतिनिधियों के शपथ पत्र की जानकारी सार्वजनिक करने संबंधी राहुल सिंह का आदेश मील का पत्थर*
इस बीच कार्यक्रम के विषय में उपस्थित सभी अतिथियों ने अपने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के प्रारंभ में राजस्थान से पधारे मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक शंकर सिंह ने बताया कि किस प्रकार उनके संगठन के द्वारा कालूराम नामक पंचायत प्रतिद्वंदी चुनाव क्षेत्र में उतार कर अधिकतम 1000 रु की लागत से चुनाव प्रचार कर जीत हासिल की गई और किस प्रकार चुनाव जीतने के बाद उनके जनप्रतिनिधि ने पंचायत में पारदर्शी व्यवस्था लागू करते हुए समस्त कागजात और जानकारी आम जनता के समक्ष प्रस्तुत कर दिया और जनता के विकास के लिए आने वाले एक एक पैसे का समुचित उपयोग करते हुए पंचायती व्यवस्था में एक नया आयाम आधारित किया। इस बीच कार्यक्रम में स्वयं कालूराम ने भी अपने अनुभव साझा किए। पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने बताया कि राहुल सिंह ने पंचायती चुनावों के पूर्व मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधियों के शपथ पत्र में दिए जाने वाले जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए जो आदेश दिया है वह मील का पत्थर साबित होगा और आरटीआई कानून को मजबूत बनाएगा। उन्होंने आशा जताई की राहुल सिंह इसी प्रकार आरटीआई कानून की धारा 4 लागू करने के विषय में आदेश जारी करते रहेंगे और कानून को मजबूत बनाएंगे।
कर्नाटक से पधारे आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेलूर ने स्थानीय निकाय के चुनाव में और पंचायत चुनावों के विषय में प्रकाश डालते हुए बताया कि कर्नाटक में अभी भी पंचायती चुनावों को लेकर बेहतर व्यवस्था नहीं है और किसी भी प्रकार से शपथ पत्र में दी जाने वाली चल अचल संपत्ति के ब्योरे की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है। श्री बेलूर ने बताया कि वह इस दिशा में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी से मिलकर राहुल सिंह के आदेश को कर्नाटक सूचना आयोग में भी प्रस्तुत कर लागू करवाने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम में पधारे भूतपूर्व सरपंच और अन्य प्रतिद्वंदी, सरपंच प्रतिनिधि ने भी अपने विचार साझा किए और बताया कि यह आदेश निश्चित तौर पर पारदर्शी व्यवस्था के लिए उत्तम आदेश है जिसमें न केवल आम जनता को बल्कि स्वयं पंचायत के चुनाव में खड़े होने वाले प्रतिद्वंदियों को भी लाभ प्राप्त होगा जिससे उनके प्रतिद्वंदी के संपत्ति के ब्यौरे की क्या स्थिति है और क्या जानकारी सरकार के समक्ष प्रस्तुत की गई है उसका ब्यौरा उन्हें आसानी से हासिल हो जाएगा। कार्यक्रम में अनिल सिंह उपकारी, जयपाल सिंह खींची, देवेंद्र तिवारी, पत्रिका अखबार के संपादक मृगेंद्र सिंह सहित अन्य कई पार्टिसिपेंट्स ने अपनी अपनी बातें रखीं।
*शपथ पत्र द्वारा चल अचल सम्प्पति की जानकारी वेब पोर्टल पर रखने से व्यवस्था में होगा सुधार – सूचना आयुक्त राहुल सिंह*
कार्यक्रम में अपने आदेश के विषय में जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त और कार्यक्रम के अध्यक्ष राहुल सिंह ने बताया कि इस आदेश को लाने के पहले धारा 18 की शिकायत में जांच संस्थित की गई और सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत कार्यवाही करते हुए समस्त अभिलेखों को तलब किया गया। उन्होंने बताया स्वयं इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से दस्तावेज तलब करवाए गए और अन्य राज्यों में पंचायती चुनावों की प्रक्रिया और स्थिति का जायजा लिया गया जिसके आधार पर यह पाया गया कि कई राज्यों के कुछ जिलों में यह व्यवस्था पहले से लागू है। यहां तक कि जनप्रतिनिधियों की चल अचल संपत्ति के ब्यौरे को सार्वजनिक करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और आदेशों का भी उन्होंने हवाला दिया और बताया कि किस प्रकार इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के वेब पोर्टल में सांसदों और विधायकों से संबंधित शपथ पत्र और चल अचल संपत्ति की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार लोकतंत्र में हर जनप्रतिनिधि जो कि आम जनता के द्वारा चुना जा रहा है उसके विषय में सभी नागरिकों को जानने का अधिकार है और इस प्रक्रिया में पंचायत जनप्रतिनिधि भी अछूते नहीं है इसलिए उनका आदेश काफी महत्वपूर्ण है जिसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे और निश्चित तौर पर व्यवस्था में काफी सुधार होगा।



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