MP//Rewa// कैथा में भागवत महापुराण महायज्ञ कथा का छठा दिवस // श्रीकृष्ण लीला का हुआ वर्णन// श्री राम है मर्यादा पुरुषोत्तम श्री कृष्ण लीला पुरुषोत्तम – डॉ गौरी शंकर शुक्ला।।
पावन यज्ञस्थली हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण कैथा में श्रीमद् भागवत कथा का अविरल प्रवाह आचार्य डॉक्टर गौरी शंकर शुक्ला के मुखारविंद से निरंतर प्रवाहित हो रहा है। इस बीच कार्यक्रम की शुरुआत 10 सितंबर को कलश यात्रा के साथ हुई और दिनांक 15 सितंबर को कार्यक्रम का छठा दिन रहा जिसमें श्री कृष्ण की बाल लीला और अन्य लीलाओं का वर्णन हुआ।
श्री राम है मर्यादा पुरुषोत्तम तो श्रीकृष्ण है लीला पुरुषोत्तम – डॉ गौरी शंकर शुक्ला
कथा में ईश्वर के दशावतारों का वर्णन करते हुए श्री रामावतार एवं श्री कृष्ण अवतार की कथा के दौरान डॉ गौरी शंकर शुक्ला ने बताया कि जहां श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम के अवतार हैं वहीं श्री कृष्ण लीला पुरुषोत्तम कहे जाते हैं। श्री राम ने कभी भी मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया और सदैव ही मर्यादाओं से बंधे रहे। इसलिए उनका जीवन लगभग हर मोड़ पर बहुत ही सरल और स्पष्ट रहता था। चाहे श्री राम का अयोध्या का राज्य त्याग कर वन गमन रहा हो चाहे युद्ध के दौरान अपने दुश्मनों से भी मर्यादाओं में रहकर युद्ध करना हर जगह पर उन्होंने मर्यादाओं का पालन किया। श्रीराम ने आजीवन एक पत्नी व्रत का पालन कर यह सिद्ध किया कि मानव को सदैव संस्कारित और मर्यादित रहना चाहिए। वहीं रावण से युद्ध के दौरान यदि राम चाहते तो लंका को पल भर में नष्ट कर देते लेकिन उन्होंने पूरा खेल रच कर इस संसार सागर को यह दिखाया कि कैसे दुश्मन से युद्ध करने में भी मर्यादाओं का पालन किया जाता है और गलत अनैतिक शक्तियों का उपयोग कर मात्र युद्ध जीतने पर ही ध्यान नहीं दिया जाता।
आचार्य ने बताया कि जिस प्रकार आज आतंकवाद और अत्याचार बढ़ा हुआ है और कोई भी देश किसी भी देश पर रातों-रात बमवारी करते हुए हवाई हमला और एटम बम गिरा देता है और नष्ट कर देता है यह पहले भी किया जा सकता था लेकिन ईश्वरीय अवतारों ने ऐसा नहीं किया क्योंकि उन्हें इस सृष्टि को एक शिक्षा देनी थी कि किस प्रकार सभी को मर्यादित रहते हुए ही कार्य करना चाहिए। आचार्य ने यह भी बताया श्रीकृष्ण का बचपन से ही जीवन बड़ा ही नटखट स्वभाव का था और वह श्रीराम के स्वभाव से अलग और विपरीत थे। उन्होंने बताया की श्रीकृष्ण का चरित्र भी मर्यादित था लेकिन उन्होंने लीलाएं बहुत की हैं। गोपियों के साथ उनके प्रेम को लेकर उठने वाली विभिन्न अनैतिक कलयुगी बातों पर प्रहार करते हुए आचार्य ने कहा दोनों का प्रेम शाश्वत सत्य और आत्मिक था न कि शारीरिक। लोग उस प्रेम के आध्यात्मिक पहलू को नहीं समझ पाते इसलिए कलयुगी मानव अपने बुद्धि अनुसार उसकी विवेचना करता है जो कि सर्वथा गलत है।
श्री कृष्ण बताते हैं कि यदि अधर्मी शक्तिशाली हो तो उसे नष्ट करने के लिए टेढ़े मेढ़े रास्ते भी अपनाने पड़ते हैं
श्री कृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का जिक्र आया जहां उन्होंने खेल खेल में बड़े-बड़े कार्य कर डाले। गोवर्धन पहाड़ को उन्होंने मात्र अपनी एक उंगली में धारण कर लिया। कौरव पांडव युद्ध पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि यह धर्म-अधर्म का युद्ध है जिसमें उन्होंने धर्म का साथ दिया। महाभारत युद्ध से यह साबित होता है की अधर्म की सेना और ताकत चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना₹ हो धर्म और सत्य के सामने वह टिक नहीं सकती। उन्होंने यह भी बताया कि यद्यपि श्रीकृष्ण धर्म की स्थापना के लिए कुछ टेढ़े मेढ़े रास्तों का भी प्रयोग किया और किस प्रकार अधर्म पथ गामी कौरव और उनकी सेनाओं को परास्त किया यह आवश्यक है क्योंकि जब शत्रु असत्य अनीति और अधर्म का रास्ता अपनाये और उसे अपनी शक्तियों पर अत्यधिक अहंकार हो जाए तो उस अधर्म पथगामी को नष्ट करने के लिए टेढ़े मेढ़े रास्ते भी अपनाने पड़ते हैं। इसीलिए श्री कृष्ण को लीला पुरुषोत्तम कहा जाता है और उनका चरित्र श्री राम के चरित्र से थोड़ा हटकर था लेकिन श्रीकृष्ण ने कभी भी अधर्म अत्याचार का साथ नहीं दिया और उसे नष्ट करने के लिए हर संभव प्रयास करते रहे और महाभारत का युद्ध इस बात का साक्षात उदाहरण है।


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