रायपुर कर्चुलियान के उमरी ग्राम पंचायत में आयोजित हुई पब्लिक ऑडिट जनसुनवाई// समस्याओं को लेकर उमड़ा जनसैलाब, करोड़ के भ्रष्टाचार की आशंका// उपस्थित सैकड़ों ग्रामवासियों ने जांच की माग की, कहा यदि कार्यवाही नहीं हुई तो होगा बड़ा आन्दोलन//
दिनांक 29 सितंबर 2021 को जिला रीवा अंतर्गत रायपुर कर्चुलियान जनपद की ग्राम पंचायत उमरी में आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी की उपस्थिति में पब्लिक जनसुनवाई का कार्यक्रम रखा गया जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणजन अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे। कार्यक्रम में मुख्य आयोजनकर्ता शैलेंद्र पटेल ने बताया कि उन्होंने इसके पहले मामला जिला पंचायत सीईओ एवं जिला कलेक्टर रीवा को उमरी ग्राम पंचायत में व्यापक भ्रष्टाचार और अनियमितता के विषय में जानकारी प्रेषित की थी और शिकायतें दी थी लेकिन जब कार्यवाही नहीं हुई तो लगभग आधा दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करते हुए 29 सितंबर दिन बुधवार को पब्लिक ऑडिट जनसुनवाई का कार्यक्रम रखा गया लेकिन जहां भारी संख्या में ग्रामीणजन अपने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष समस्या रखने के लिए उपस्थित हुए वहीं किसी भी वरिष्ठ अधिकारी का अता पता नहीं रहा।
लोकतंत्र में जनता के द्वारा चुने गए जन सेवक और लोक सेवकों का यह दायित्व होता है कि वह इस प्रकार के आयोजन में उपस्थित होकर जनता की समस्याओं का समाधान करें लेकिन मौके पर मात्र थाना प्रभारी रायपुर कर्चुलियान पुष्पेंद्र यादव और उमरी पंचायत हल्का के पटवारी श्री शुक्ला उपस्थित रहे जबकि अन्य गणमान्य नागरिकों में अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्र, आप से प्रमोद शर्मा एवं सामाजिक कार्यकर्ता अतुल सिंह तिवारी, राणा सिंह तिवारी, हीरालाल पटेल, अरुणेंद्र पटेल, प्रमोद सिंह, दीपक कुमार सिंह, धीरेंद्र शेखर पांडे, संदीप पटेल, दिनेश पटेल, व्यास मुनि पटेल, रमेश पटेल, रामपाल साकेत, रामकिशोर, धर्मेंद्र पटेल, भोला प्रसाद पटेल, रामनरेश साकेत, सुशील कुमार पटेल, प्रकाश नारायण पटेल, श्रीनिवास पटेल, सज्जन पटेल, राजेश साकेत, मोहम्मद शफीक, अरुणेश कारपेंटर, अनीता यादव, विमला, कुसुम कली, परमानंद पटेल सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। पब्लिक ऑडिट जन सुनवाई के दौरान कई समस्याएं सामने आए जिसमें गरीब हितग्राहियों ने राशन, आवास, शौचालय, पेंशन, किसान सम्मान निधि, नामांतरण और नक्शा तरमीम जैसे छोटी-छोटी समस्याओं को बताया जिसे तहसीलदार, सीईओ जनपद, संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक आदि निराकरण नहीं किये.
ग्राम पंचायत उमरी में पंचायती कार्यों में दिखा व्यापक भ्रष्टाचार
शिकायतकर्ता कुंवर बहादुर कोरी, राम नारायण पटेल, रघुपति कोल, एवं रामनरेश पटेल द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा दिनांक 7 सितंबर 2021 को जिला कलेक्टर रीवा एवं जिला पंचायत सीईओ रीवा को लिखित शिकायत देकर दर्जनों निर्माण कार्यों में व्यापक अनियमितता की जांच की मांग की गई थी जिसमें मुख्य रुप से शांतिधाम निर्माण तेलिया तालाब के मेड पर लागत राशि 3 लाख 98 हज़ार, मिट्टी और मोरमीकरण मार्ग निर्माण एक लाख 97 हज़ार, बाउंड्री वाल निर्माण प्राथमिक पाठशाला उमरी कसिहाई लागत राशि 50 हज़ार रूपये, पीसीसी सड़क निर्माण रामसुफल बढई के घर से ब्रिजनंदन के घर तक लागत राशि 4 लाख 99 हज़ार 546 रूपये, पीसीसी रोड निर्माण प्रमोद शुक्ल के घर से कमलाकांत के घर तक लागत राशि तीन लाख 97 हज़ार 800 रूपये, पीसीसी सड़क निर्माण बृज नंदन पटेल के घर से लक्ष्मण प्रसाद वर्मा के घर तक 1 लाख 23 हज़ार 600 रूपये, पीसीसी सड़क निर्माण प्रधानमंत्री सड़क से रामकरण साकेत के घर तक लागत राशि 5 लाख 91 हज़ार 200 रूपये, पक्की नाली निर्माण चंद्रकांत के घर से फुतरी नाला की ओर लागत 7 लाख 67 हज़ार 20 रूपये, पक्की नाली निर्माण कार्य प्रधानमंत्री सड़क से चंद्रभान सेन के घर की ओर कुल लागत राशि 3 लाख ८० हज़ार रूपये, पीसीसी रोड निर्माण प्रधानमंत्री मेन सड़क से नई बस्ती कुल लागत राशि 6 लाख 34 हज़ार 920 रूपये, ग्रेवल रोड निर्माण कार्य तीरथ गौतम के घर से रामायण प्रसाद के घर तक कुल लागत राशि 1 लाख 31 हज़ार 160 रूपये, बाउंड्री वाल निर्माण कार्य हनुमान मंदिर परिसर में कुल लागत राशि 1 लाख 53 हज़ार, पुलिया निर्माण कार्य गणेश पटेल के घर के पास 1 लाख 46 हज़ार रूपये, पुलिया निर्माण कार्य मोहम्मद गुलाम के घर के पास 1 लाख 3 हज़ार 500 रूपये, पुलिया निर्माण कार्य जगत नारायण मिश्रा के घर के पास कुल लागत राशि 1 लाख 43 हज़ार रूपये, पुलिया निर्माण कार्य बुद्धसेन यादव के घर के पास कुल लागत राशि 99 हज़ार रूपये, बाउंड्री वाल निर्माण कार्य कुल लागत राशि 1 लाख 47 हज़ार रूपये, सामुदायिक चबूतरा निर्माण सोसायटी के पास कुल लागत राशि 1 लाख 70 हज़ार 300 रूपये, 13वां वित्त आयोग के द्वारा ग्राम पंचायत उमरी को मिली राशि की जांच, समस्त नाली निर्माण समस्त जल जमाता विस्तारीकरण सौंदर्यीकरण की जांच, ग्राम पंचायत उमरी में मेड बंधान के कार्य एवं खेत तालाब के कार्य में भ्रष्टाचार, मनरेगा के तहत दर्शाए गए मास्टर रोल में फर्जी मजदूरों को बता कर कार्य किया जाना आदि.
मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाकर कार्यवाही का मिला आश्वासन
इस प्रकार ग्राम पंचायत उमरी में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार की शिकायत उक्त ग्रामीणों के द्वारा की गई जिसके विषय में जांच न होने पर पब्लिक ऑडिट और जन सुनवाई की गई जिसमें मीडिया कर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित होकर सभी उक्त कार्यों का भौतिक सत्यापन किया और साथ में संबंधित उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जल्द से जल्द जांच नहीं की जाती और कार्यवाही नहीं की जाती तो एक बड़े आंदोलन को अंजाम देंगे जिसकी समस्त जवाबदेही शासन प्रशासन की होगी।
इस बीच सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने उपस्थित सैकड़ों ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों को यह विश्वास दिलाया कि ग्रामीणों के इस अभियान में अभियान में उनका पूरा सहयोग रहेगा और दोषियों की जांच कराया जाकर शासन के द्वारा आम जनता के विकास के लिए दिए जा रहे पैसे पर डाका डालने वालों पर कार्यवाही करवाई जाएगी। साथ में एक्टिविस्ट द्विवेदी ने बताया कि लोगों को इसी प्रकार जागरूक होकर अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में पब्लिक ऑडिट और जनसुनवाई का कार्यक्रम हमेशा आयोजित करना चाहिए और अपनी समस्याओं को मीडिया और सामाजिक तौर पर प्रशासन के समक्ष रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया एक शक्तिशाली टूल के तौर पर सामने आया है जिसके माध्यम से छोटे-छोटे वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में शेयर किया जा सकता है और अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार और अनियमितता को शासन प्रशासन के संज्ञान में लाया जा सकता है। श्री द्विवेदी ने कहा आज जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद मात्र अपनी जेब भर रहे हैं जिसमें उन्होंने उदाहरण के तौर पर अभी हाल ही में रीवा जिले में पिछले कुछ वर्षों में 16 विधायकों और 4 सांसदों कि आरटीआई से प्राप्त जानकारी के बारे में बताया कि उन्होंने फेसबुक लाइव के माध्यम से समस्त जानकारी पब्लिक को साझा कर दी है और वह माग करते हैं कि लोग उस जानकारी का भौतिक सत्यापन के माध्यम से बताएं कि उनके क्षेत्र में उक्त विधायक और सांसदों के द्वारा करवाया जा रहा कार्य धरातल पर है अथवा नहीं। शिवानंद द्विवेदी ने बताया अभी हाल ही में सूचना आयुक्त मध्यप्रदेश राहुल सिंग के द्वारा ताबड़तोड़ कार्यवहियाँ की गई है जिसमें जानकारी छुपाने वाले अधिकारियों के ऊपर आरटीआई कानून की धारा 20(1) के तहत जुर्माने की कार्यवाही और साथ में धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक युवाओं को आरटीआई कानून के प्रति सचेत होना चाहिए और आरटीआई लगाकर ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल कर अपने आसपास हो रहे भ्रष्टाचार के प्रति जागरूक रहना चाहिए. पब्लिक ऑडिट जनसुनवाई मात्र सरकारी अफसरों के द्वारा ही नहीं की जाती बल्कि जनता लोकतंत्र में स्वयं कर सकती है और उसे समस्त अधिकार प्राप्त है। इस पब्लिक ऑडिट और जनसुनवाई में सामने आने वाले मुद्दे को यदि सरकारी अफसरान अनसुना करें तो इसके आधार पर कोर्ट में भी चैलेंज किया जा सकता है क्योंकि ज्यादातर जानकारी आज आरटीआई कानून की धारा 4 के तहत पब्लिक पोर्टल पर साझा की जाती है जो स्वयं ही प्रमाणित होती है और उसके लिए किसी विशेष आरटीआई लगाने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि आज भारत में लोकतंत्र को समझने की आवश्यकता है क्योंकि लोकतंत्र मात्र एक वोट तंत्र रह गया है जिसमें जनता वोट देकर अपने कर्तव्यों को भूल जाती है जबकि उसे चाहिए जिन जनप्रतिनिधियों को चुना गया है उनके कार्यों का निरंतर लेखा-जोखा जनता लेती रहें और अपने आसपास एक बेहतर एटमॉस्फियर बनाकर अपनी समस्याओं को सही फोरम तक पहुंचाएं। वहीँ अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्रा द्वारा बताया गया की उनकी टीम के द्वारा निशुल्क आ रटी आई आवेदन बनाने में मदद की जाती और हेल्प सेण्टर खोला गया है जहाँ अधिक से अधिक विधिक सहायता निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है.
पत्रकार और आयोजनकर्ता शैलेन्द्र पटेल ने बताया की उमरी उनकी जन्मभूमि है जहां काफी समय में आम नागरिक प्रताड़ित थे और उन्हें योजनाओं का कोई लाभ प्राप्त नहीं हो रहा था. जिसकी समय पर उनके मीडिया हाउस में भी प्रकाशन होता रहता था. आज सवाल यह था की मामले को कैसे उठाया जाय इस पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी से मिलकर मामले को सोशल ऑडिट और जनसुनवाई के माध्यम से उठाया गया है जिसमे व्यापक पैमाने पर अनियमितता प्रकाश में आई है जिसकी वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की माग की गयी है.
भ्रष्टाचार के दलदल से जनपद सीईओ ने बनाई दूरी
इस पूरे मामले में हम आपको बता दें की जनपद पंचायत सीईओ प्रदीप दुबे को भी जानकारी दी गयी थी जिसमें कई बार उन्हें फ़ोन के माध्यम से भी अवगत कराया गया था लेकिन इसके बाबजूद भी वह कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुए जबकि उन्हें अनिवार्य रूप से कार्यक्रम में उपस्थित होना था. जनपद सीईओ की अनुपस्थिति से तरह-तरह की चर्चाये हो रही थीं जिसमें कुछ लोगों का कहना था की सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक को जनपद सीईओ का संरक्षण प्राप्त है तो कई लोग यह कह रहे थे की स्वयं जनपद सीईओ भी मामले में संलिप्त हैं.
शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल बनाम भूतखाना
कहने को तो उमरी में शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल है लेकिन विद्यालय की कमान ऐसे प्राचार्य के हाथों में है जिनके किस्से अनेक हैं. कई बार इनकी शिकायत डीईओ से लेकर अन्य उच्चाधिकारियों को लिखित रूप से की गई लेकिन वह अपनी पहुँच पकड़ से उमरी में ही अपनी जड़ें जमाकर बैठे हुए हैं. सोशल ऑडिट जनसुनवाई में स्थानीय निवासी द्वारिका प्रसाद यादव ने शपथ पत्र में बताया की विद्यालय में न तो बाउंड्री वाल है और न ही शौचालय. . यहाँ तक की खेल कूद का मैदान होते हुए भी विद्यालय में खेल कूद की सामग्री नहीं है. आखिर इन सबकी राशि कहाँ जाती है? विद्यालय के हाल यह है कि न तो वहां बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही पानी और शुद्ध हवा की. उन्होंने यह भी आरोप लगाया की उनके पुत्र मोनू यादव को छठवीं से लेकर 12वीं तक कोई छात्रवृत्ति ही नहीं मिली. इतना ही नहीं प्राचार्य द्वारा प्रतिमाह फीस तो ली जाती है लेकिन रसीद नहीं दी जाती. यह आरोप मात्र एक व्यक्ति के नहीं हैं बल्कि अनेक लोगों ने शपथ पत्र में प्राचार्य के खिलाफ शिकायत की है.



Subscribe to my channel
Comments are closed.