रेहवा घाटी में रेस्क्यू ऑपरेशन का दूसरा दिन, निकाले गए 8 गोवंश // 09 अक्टूबर शनिवार के दिन होगा बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन//
रीवा जिले में थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले लालगांव पुलिश चौकी के रेहवा घाटी और सरई ग्राम पंचायत से लगी घाटी में बड़ी संख्या में सैकड़ों गोवंशों को धकेले जाने का मामला प्रकाश में आया था. जिसके विषय में जानकारी मिलने पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
*08 अक्टूबर को रहा रेस्क्यू ऑपरेशन का दूसरा दिन*
इस बीच दिनांक 08 अक्टूबर को रेस्क्यू ऑपरेशन का दूसरा दिन रहा. रेस्क्यू ऑपरेशन में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी के साथ ग्रामीणजन और अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे. लेकिन पूरा किस्सा अभी नीचे है.
*घाटी के नीचे से निकाले गए 8 गोवंश*
दिनांक 08 अक्टूबर को रेस्क्यू ऑपरेशन सुबह 10:30 से प्रारंभ हुआ जिसमें सबसे पहले 2 गोवंशों को निकाला गया. यह गोवंश पिछले दिनों कुछ दूर तक आकर रुक गए थे और चढ़ पाने में असमर्थ थे. 08 अक्टूबर की सुबह को एक गाय और उसका बछड़ा घाटी के नीचे काफी दूर तक चढ़ आये थे लेकिन रास्ता भटके थे. जब उन्हें रास्ता दिखाया गाया तो वह ऊपर पहुँच गए. इसके बाद एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी वनकर्मी बाबूलाल यादव्, गोसेवक सतानंद केवट और जगन्नाथ के साथ नीचे घाटी की तलहटी में पहुंचे तो वहां काफी संख्या में गोवंश एकत्रित थे लेकिन मानव की आहट पाकर भाग खड़े हो रहे थे. लेकिन जब उनको भूषा डालकर पुचकारा गया तो वह पास आये और भूषा का स्वाद लिए और उनमें से 6 गोवंश जिनमे से 4 गायें और दो बैल थे घाट के ऊपर चढ़ने लगे और पीछे से शिवानंद और उनकी टीम भी फॉलो की. इस प्रकार धीरे-धीरे रास्ता दिखाने और थोड़ा सपोर्ट करने पर गोवंश ऊपर पहुँच गए.
*सबसे कठिन भाग को कंक्रीट सीमेंट से बनाया जाना आवश्यक*
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे अधिक बाधा जिस स्थान पर हो रही है वह एक काफी उतार से भरा हुआ भाग है जिसमें पिछले दिनों कुछ पत्थर डालकर रास्ता बनाया गया था जिसमें पैर रखकर यह गोवंश चढ़ पा रहे थे लेकिन वह अस्थायी रास्ता ऐसा है जिसके पत्थर रुक नहीं पाते हैं जिनको सीमेंट बालू लगाकर फिक्स किया जाना अति आवश्यक है. यदि वह रास्ता एक बार फिक्स कर दिया जाता है तो ऊपर नीचे उतरने में दिक्कत नहीं होगी.
*अब अधिकारियों की कहानी चश्मदीदों की जुबानी*
दिनांक 08 अक्टूबर के रेस्क्यू ऑपरेशन में रेंज अफसर सिरमौर सहित पंचायत और पशु चिकित्सा विभाग को सूचित किया गया था लेकिन कहानी विचित्र ही रही. हालाँकि बड़े रेस्क्यू का प्लान तो 09 अक्टूबर शनिवार को ही रखा गया था लेकिन इसके पहले 08 अक्टूबर को मवेशियों को पोषण पहुंचाने और उन्हें विश्वास में लेने के उद्येश्य से भूषा चारा की व्यवस्था हेतु कहा गया था. लेकिन भूषे के नाम पर दर्जनों गोवंशों के लिए मात्र दो छोटी बोरी भूषा उपलब्ध रहा.
*एसडीएम नीलमणि अग्निहोत्री ने पूरे दिन गतिविधि को फ़ोन से किया मॉनिटर*
अनुविभागीय एवं दंडाधिकारी सिरमौर नीलमणि अग्निहोत्री द्वारा पूरे घटनाक्रम को शुबह से ही कोआर्डिनेट किया गया. सुबह से ही एक्टिविस्ट शिवानंद के मोबाइल पर कॉल करके कई बार घटनाक्रम और रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में जानकारी लेते रहे. हालाँकि वह मौके पर नहीं आये लेकिन तहसीलदार जितेन्द्र तिवारी, सीईओ गंगेव प्रमोद ओझा, आरआई, पटवारी, पीसीओ पंचायत और पशु चिकित्सकों को भेजा.
*तहसीलदार जितेन्द्र तिवारी आरआई और पटवारी बैठे रहे घाट के ऊपर*
तहसीलदार सिरमौर जितेन्द्र तिवारी, राजस्व निरीक्षक परमानन्द तिवारी और पटवारी रामगरीब कोल घाट के ऊपर ही बैठे रहे और वहीँ से गतिविधियाँ देखते रहे. वैसे भी साहब लोग क्या घाट के नीचे कभी उतरेंगे बल्कि वह तो अपने कर्मचारियों और लेबरों को ही डीलिंग देंगे. जब मौके वारदात पर पहुँचने की बात आयी तो तहसीलदार जीतेन्द्र तिवारी ने कहा की नीचे हम नहीं जायेंगे एसडीएम नीलमणि अग्निहोत्री और कलेक्टर रीवा इलैयाराजा टी आयें और वही नीचे जाकर रेस्क्यू करें.
*किस जाति के हैं और यह क्या कर रहे हैं?*
तहसीलदार जितेन्द्र तिवारी एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी से बोले की यह सब क्या कर रहे हैं गोशाला खोलकर बैठ जाईये हमे परेशान मत किया करिए. घाट के नीचे मवेशी चराने और ऊपर लाने हम नहीं जायेंगे हम अधिकारी हैं ऑफिस में बैठकर काम देखते हैं मवेशी नहीं चराते. वहीँ आरआई परमानन्द तिवारी ने कहा की शिवानंद द्विवेदी आप किस जाति के हैं. जब शिवानंद ने बताया की वह द्विवेदी हैं तो पूछा की कौन से दुबे हैं परौहा की कोई अन्य. तब द्विवेदी ने कहा की अपने काम से काम रखिये जो सरकार ने काम करने के लिए भेजा है वह करिए यहाँ जाति धर्म मत जानिये क्योंकि यहाँ कोई जाति धर्म का सर्वे नहीं किया जाना है. हालाँकि इसके बाद सभी की बोलती बंद हुई.
*हमारी नेगेटिव न्यूज़ मत छपवायें, मीडिया बड़ी नेगेटिव न्यूज़ छाप रही है*
रेहवा घाटी में सुबह की सूचना के बाद दोपहर बाद लगभग 3 बजे के बाद पहुंचने वाले जनपद गंगेव सीईओ प्रमोद ओझा को शायद मीडिया की ख़बरें रास नहीं आ रहीं हैं. आते ही उनका कहना था की मीडिया बड़ी नकारात्मक खबर छाप रही है इस पर कोई कण्ट्रोल नहीं है. तब शिवानंद द्विवेदी द्वारा बताया गया की मीडिया स्वतंत्र होती है और वह वही छापती है जो सच्चाई होती है. गोवंश घाटी में फंसे हुए हैं और उन्हें रेस्क्यू किया जाना है तो मीडिया यह नहीं छाप सकती की सभी गोवंश को अफसरान एसी बंगलों में बैठकर रेस्क्यू कर चुके हैं और खेत और सडकों पर कोई मवेशी ही नहीं हैं और सब सुरक्षित गोशालाओं में हैं. जिस दिन मीडिया यह खबर छापेगी उस दिन मीडिया मीडिया नहीं रहेगी बल्कि सरकार की प्रतिनिधि बन जाएगी.
*स्थानीय पंचायत सरई के सहयोग से उपलब्ध कराया गया 2 बोरी भूषा और लेबर*
दिनांक 08 अक्टूबर के रेस्क्यू ऑपरेशन में ग्राम पंचायत सरई के सरपंच द्वारा उच्चाधिकारियों के आदेश पर 2 बोरी भूषा और 2 लेबर उपलब्ध कराया गया. अगले दिन रेस्क्यू ऑपरेशन में अन्य जो व्यवस्थाएं की जानी है वह भी ग्राम पंचायत सरई के माध्यम से किया जाएगा ऐसा निर्देश सीईओ प्रमोद ओझा द्वारा मौके पर दिया गया है.
*एक बार फिर देर से पहुंचे पशु चिकित्सक*
दिनांक 08 अक्टूबर के रेस्क्यू ऑपरेशन में एक बार फिर पशु चिकित्सक काफी देरी से पहुंचे. लगभग 3:30 के बाद रेहवा घाटी में पहुंचे पशु चिकित्सकों में गंगेव के पशु चिकित्सा अधिकारी एसके पाण्डेय के साथ उनके 3 स्टाफ मौजूद रहे. लेकिन देरी होने के चलते गोवंशों के पास पहुंचकर इलाज हो पाना संभव नहीं हो पाया क्योंकि उस समय एक हज़ार फीट गहरी घाटी में उतर पाना संभव नहीं था. हालाँकि अगले दिन 09 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से ही रेस्क्यू ऑपरेशन में जल्द पहुंचने का आश्वासन मिला है.
*डीएफओ को दी गयी जानकारी, यह वनकर्मी भी रहे उपस्थित*
घटना क्रम की जानकारी जिले के वन मंडलाधिकारी को भी दे दी गयी थी जिसके एवज में प्रभारी रेंज अफसर सिरमौर की सूचना पर लालगांव उप वन परिक्षेत्र सहायक बाबूलाल यादव, वन रक्षक संजय वर्मा के साथ मानसेवी वनकर्मी बाबूलाल यादव भी उपस्थित रहे. अगले 09 अक्टूबर की कार्यवाही में डीएफओ द्वारा अधिक वन अमला उपलब्ध कराये जाने का भी आश्वाशन मिला है.



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