MP-Breaking– 68 वें राष्ट्रीय आरटीआई वेबिनार का हुआ आयोजन // जेल में बंद कैदियों केअधिकार और आरटीआई विषय पर दी गयीं जानकारियां // सूचना आयुक्तों, एक्टिविस्ट्स और एक्सपर्ट्स ने साझा किये अपने विचार// कहा धारा 4 के तहत वेबपोर्टल पर साझा करवाई जाय बंदियों की जानकारियाँ // बंदी भी सामान्य मानव हैं उन्हें भी उपलब्ध हों सभी जरुरी अधिकार – एक्सपर्ट्स पैनल//
सूचना के अधिकार कानून से जुड़ी तमाम जानकारियां और अन्य कानूनी सलाह को जन जन तक मुफ्त में पहुचाने के उद्येश्य से आयोजित किया गया 68 वां राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन किया गया. ज्ञातव्य है की यह कार्यक्रम लॉकडाउन पीरियड से प्रारंभ हुआ जो चलकर आज अपने पड़ाव के 68 वें मंजिल पर पहुँच चुका है. कार्यक्रम की अध्यक्षता पहले की भांति मप्र सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने की जबकि कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गाँधी, पूर्व मप्र सूचना आयुक्त आत्मदीप, बंदी अधिकार आन्दोलन के अग्रणी संतोष उपाध्याय, आरटीआई एक्टिविस्ट और इंडियन एयर फ़ोर्स के लड़ाके जयंत दास, सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण पटेल, पूर्व लॉ प्राचार्य आश्विन कारिया, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा उपस्थित रहे.
कार्यक्रम का संयोजन, संचालन एवं प्रबंधन एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, नित्यानंद मिश्रा, पत्रिका के वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह द्वारा किया गया.
बंदियों के अधिकारों से जुड़ी अधिक से अधिक जानकारी धारा 4 के तहत हो सार्वजनिक
कार्यक्रम में बंदी अधिकार आन्दोलन के अध्यक्ष संतोष उपाध्याय ने अपने विचार रखे और जेलों के अंदर की दुर्दशा के बारे बताया की किस प्रकार बंदियों को उनके अधिकार से वंचित किया जाता है. किस प्रकार बंदियों की दुनिया एक अलग ही दुनिया है जहां उनके साथ पाशविक व्यवहार किया जाता है. बंदियों का जीवन पशुओं जैसा कर दिया जाता है जिसमे सुधार को लेकर उनके द्वारा काफी कार्य किया जा रहा है और उन्होंने इन मामलों पर कई जनहित याचिकाएं भी सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया में लगायी हैं. संतोष उपाध्याय ने बताया की सूचना का अधिकार का प्रयोग कर विचाराधीन और सजायाफ्ता दोनों प्रकार के कैदियों के विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकती है. साथ में धारा 4 के तहत यह सब जानकारी सरकारों को सुओ-मोटो साझा करना चाहिए. वहीं उड़ीसा से जयंत दास ने बताया की उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के विषय में आरटीआई लगाकर जानकारी प्राप्त करनी चाही और कुछ के भ्रष्टाचार को लेकर शिकायतें भी की तो पुलिश ने उन्हें झूंठे मुकदमे में फंसाकर जेल में डाल दिया जहाँ से उन्होंने जेल में कैदियों के जीवन को लेकर उनके रहन सहन भोजन और मानव अधिकारों की आवाज उठाना प्रारंभ किया. जयंत दास ने बताया की धारा 4 का प्रयोग कर सूचना आयोग मानवाधिकार के हनन से जुड़ी हुई कई समस्याओं को सार्वजनिक तौर पर साझा करवाना चाहिए. पूर्व केन्द्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने बताया की कई सारे अंडर ट्रायल कैदी काफी गरीब होते हैं और चूंकि उनकी जमानत लेने वाला कोई नहीं रहता इसलिए जेलों में फंसे होते हैं. इसके लिए उन्होंने बताया की एक बार आरटीआई लगाकर जानकारी चाही की कितने ऐसे अंडर ट्रायल कैदी हैं जो धारा 436(ए) के तहत 50 प्रतिशत सजा भुगत चुके हैं फिर भी जेलों में बंद हैं. लेकिन विभाग ने तो यह सब जानकारियां नहीं दीं लेकिन वह आयोग में गए जहां से कुछ ऐसी जानकारी बाहर आयीं. गांधी ने कहा की सभी प्रदेशों में आरटीआई कार्यकर्ताओं को इन्हीं बिंदुओं पर आरटीआई लगाकर जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और सरकारों को धारा 4 के तहत यह जानकारी सार्वजनिक करने के लिए लिखना चाहिए. इस बाबत धारा 18(1)(एफ) के तहत शिकायत सीधे सूचना आयोग में की जा सकती है.
कैदियों की जानकारी के लिए भटकना पडा कई जिलों में, धारा 4 ही समाधान
कार्यक्रम में आगे पूर्व मप्र सूचना आयुक्त आत्मदीप ने अपने विचार साझा करते हुए विस्तार पूर्वक धारा 4 के प्रावधानों और कैदियों के अधिकारों के बारे में अवगत कराया. आत्मदीप ने कहा की आरटीआई के माध्यम से धारा 4 की जानकारी सार्वजनिक हो इसके लिए आयोग और सरकारों को लेख किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा की आवेदकों को मात्र धारा 4 के 17 बिन्दुओं वाले मैन्युअल तक ही सीमित न रहकर धारा 4 के सभी अन्य चारों उपधाराओं के तहत जितने प्रावधान हैं सभी को लागू करने के लिए लिखना चाहिए. हाईकोर्ट जबलपुर के अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने बताया की उनके पास कई क्लाइंट आते रहते हैं जो अपनी कैदियों के विषय में समस्याएं बताते हैं और समय-समय पर रिलीफ चाहते हैं जिसके लिए वह कुछ आरटीआई भी भोपाल स्तर में लगाये थे जिसके विषय में उन्हें भोपाल से जबाब नहीं मिला और पत्र को धारा 6(3) के तहत परेशान करने के उद्देश्य से सभी जेलों में अंतरित कर दिया गया जिसके बाद 20 जगहों से वह जाकर जानकारी प्राप्त करने के लिए मजबूर हुए. इसके लिए समाधान के तौर पर यह बात सामने आई की जेल और कैदियों के अधिकारों से सम्बंधित अधिक से अधिक जानकारी धारा 4 के तहत वेबपोर्टल और सार्वजनिक तौर पर अन्य माध्यमों से साझा की जानी चाहिए जिससे किसी को इस प्रकार घुमाया न जा सके और लोगों को जानकारी सर्वसुलभ हो जाए.
जेल सुधार पुलिस और न्यायिक सुधार बगैर अधूरा
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता और फोरम फॉर फ़ास्ट जस्टिस से जुड़े हुए प्रवीण पटेल और पूर्व लॉ कॉलेज के प्राचार्य आश्विन कारिया ने भी अपने विचार साझा किये और कैदियों के मानवाधिकार के हनन सम्बन्धी बातें रखीं. उन्होंने बताया की भारत में अभी भी स्थिति पहले अंग्रेजों के जमाने की है लेकिन इसमें सुधार होना चाहिए. उन्होंने बताया की कैदी भी मानव हैं और उनके साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए. अपनी संस्थाओं द्वारा इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों के विषय में भी उन्होंने अवगत कराया. साथ में प्रवीण पटेल ने कुछ विशेष उदाहरण देकर बताया की किस प्रकार यदि दूसरी पार्टी कमजोर और गरीब हो और उसकी कोई पहुँच न हो तो कैसे पुलिस फर्जी मामलों में डालकर जेल पहुँचा देती है. अतः जेल रिफार्म सीधे न्यायिक और पुलिस रिफार्म से जुड़ा हुआ है. जब तक पुलिस और न्यायिक रिफार्म नहीं होता तब तक जेल रिफार्म अधूरा रहेगा इसलिए सभी रिफार्म किया जाना चाहिए और वह इस विषय में काफी पीआईएल भी लगा रहे हैं और आरटीआई कार्यकर्ता अधिक से अधिक आरटीआई लगाकर यह जानकारियां हासिल करें जिससे अन्य पीआईएल भी लगाई जा सके.
सहभागियों ने पूछे प्रश्न तो एक्सपर्ट्स ने दिए जवाब
कार्यक्रम में उपस्थित सहभागियों ने प्रश्न भी पूंछे और एक्सपर्ट्स ने उनके जवाब भी दिए. विहार, उड़ीसा, तमिलनाडु, गुजरात, छत्तीसगढ़, मप्र, उप्र, हरियाणा, पंजाब, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, नई दिल्ली, केरल, असम, उत्तराखंड, राजस्थान, कश्मीर, कर्णाटक, महाराष्ट सहित अन्य राज्यों से जुड़े हुए सहभागियों ने भी अपने विचार साझा किये. कार्यक्रम में लगभग 100 के आसपास सहभागियों ने हिस्सा लिया और जानकारी प्राप्त की. कार्यक्रम के अंत में माहिती अधिकार मंच मुम्बई के संयोजक भास्कर प्रभु ने भी अपने विचार साझा किये धारा 4 पर ही ज्यादा जोर दिया. देश के विभिन्न कोनों से सहभागियों ने हिस्सा लिया और अपने ज्ञान का आदान प्रदान किया. कार्यक्रम शिवानंद द्विवेदी के फेसबुक पेज में लाइव किया गया साथ में उन्ही के आरटीआई पर बनाये गए यूट्यूब चैनल में भी उपलब्ध कराया गया जहाँ कभी भी यह विडियो देखे जा सकते हैं.




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