रेहवा घाटी में 150 गोवंशों की क्रूरता के 26 दिन पूरे // सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने एक बार फिर 2 हज़ार फीट गहरी घाटी के नीचे जाकर घायल चोटिल दर्जनों गोवंशों का कराया इलाज और पहुंचाया भूषा // मप्र की 4 हज़ार गोशालाओं का सपना अभी भी अधूरा, भीषण क्रूरता के शिकार हो रहे बेजुबान गोवंश //
रेहवा घाटी में 150 गोवंशों की क्रूरता के 26 दिन पूरे // सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने एक बार फिर 2 हज़ार फीट गहरी घाटी के नीचे जाकर घायल चोटिल दर्जनों गोवंशों का कराया इलाज और पहुंचाया भूषा // मप्र की 4 हज़ार गोशालाओं का सपना अभी भी अधूरा, भीषण क्रूरता के शिकार हो रहे बेजुबान गोवंश //*
जिला रीवा अंतर्गत सिरमौर वन परिक्षेत्र के रेहवा घाटी में जिन 150 गोवंशों को 27 एवं 28 सितम्बर के दरमियान लगभग 2 हज़ार फीट से अधिक गहरी घाटी में धकेला गया था उनको रेस्क्यू किये जाने के अगले चरण में दिनांक 22 अक्टूबर 2021 को 26 वें दिन 14 गायों के इलाज एवं पोषण की व्यवस्था सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा पशु चिकित्सा विभाग की मदद से की गयी. इस बीच पशु चिकित्सालय गढ़ के गोसेवक अंकित पाण्डेय और दिनेश पटेल भी मौजूद रहे.
7 गायों का गंभीर स्थिति में किया गया इलाज, हालत बेहद नाजुक
इस बीच 22 अक्टूबर की सुबह लगभग 11 बजे एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी और पशु चिकित्सा विभाग के गौसेवक अंकित पाण्डेय और दिनेश पटेल एवं ग्रामवासी लालबहादुर पटेल एवं प्रमोद सिंह साहित मानसेवी वन चौकीदार बाबूलाल यादव एवं जगन्नाथ यादव रेस्क्यू अभियान के 26 वें दिन हजारों फीट गहरी घाटी के नीचे उतरकर देखा तो पता चला की जिन गायों का पहले इलाज किया गया था उनकी भी स्थिति काफी गंभीर थी जबकि अन्य गायें भी चोट के कारण कमजोर थीं. जाकर देखा गया तो कई गायों के पैरों और शरीर के चोटिल भाग में कीड़े भी पड़ गए थे और चल फिर पाने में भी असमर्थ थीं. इस बीच सभी उपस्थित गोसेवक और लोगों की मदद से पकड़कर पहले उनको 3 बोरी ले जाया गया भूषा डाला गया और जब कुछ स्थिति में सुधार हुआ तो पकड़कर उनका घाव साफ़ किया गया. इस बीच गोसेवक अंकित पाण्डेय द्वारा निष्ठा के साथ गायों का इलाज किया गया. इलाज में कार्बोलिक पाउडर, आइवरमेक्टिन, दर्द निवारक, एंटीबायोटिक आदि दवाएं दिया गया. डॉक्टर द्वारा बताया गया की इनके कीड़े आइवरमेक्टिन से जल्दी समाप्त हो जायेंगे. हालाँकि इसके पहले भी कुछ गोसेवकों ने आइवरमेक्टिन लगाने का दावा किया था लेकिन फिर भी कीड़े पड़े मिले. दिनांक 22 अक्टूबर को कुल 7 नग गायों का इलाज किया गया और अन्य 7 नग गोवंशों को भी स्पॉट किया गया. कुल मिलाकर 22 अक्टूबर को भी 14 गोवंशों को स्पॉट किया गया. जिन 7 गायों का इलाज किया गया है उनकी स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है और लगातार इलाज और पोषण की जरूरत पड़ेगी. हालाँकि न तो पशु चिकित्सा विभाग और न ही पंचायत विभाग अपनी स्वेच्छा से कुछ कर रहा है. सवाल यह है की कब तक डंडा करके काम कराया जाएगा? आखिर घाटी के नीचे फंसे हुए गोवंशों की सुरक्षा और पोषण की जिम्मेदारी कौन लेगा?



Subscribe to my channel
Comments are closed.