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MP breaking- कराधान घोटाले की लोकायुक्त जांच में चल रही लीपापोती// दोषी ही बन बैठे जांच अधिकारी// निलंबित बाबू राजेश सोनी एसीईओ एबी खरे के साथ कर रहा कूटरचित दस्तावेजों का निर्माण// एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने जांच दल को निरस्त कर लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू के द्वारा गठित जांच दल से जांच करवाए जाने की मांग की है।।

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 वर्ष 2019-20 के बहुचर्चित जिले की 75 पंचायतों में हुए कराधान घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल आया है। मामले की याचिका जबलपुर हाईकोर्ट में लगाए जाने के बाद उधर भोपाल से लोकायुक्त ने भी शिकंजा कसा है। जानकारी के मुताबिक अभी हाल ही में पिछले दिनों लोकायुक्त भोपाल से एक बार पुनः सीईओ जिला पंचायत रीवा को कराधान घोटाले से संबंधित करारोपण की जांच के लिए तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु लिखा गया। बता दें इस विषय में रीवा से पूर्व जनपद उपाध्यक्ष संजय पांडे और आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा निरंतर इस भ्रष्टाचार को उठाया गया था। ज्ञातव्य है कि यह मामला तब प्रकाश में आया जब वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के द्वारा आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी की आरटीआई में कराधान घोटाले और कमिश्नर की जांच में दोष सिद्ध पाया गया था और तत्कालीन कमिश्नर संभाग रीवा के द्वारा जिला कलेक्टर रीवा को कार्यवाही के लिए आदेशित किया गया था। परंतु न तो जिला कलेक्टर के द्वारा कोई कार्यवाही की गई और न ही जिला पंचायत सीईओ के द्वारा। लेकिन मामला आर्थिक अपराध शाखा और लोकायुक्त भोपाल दोनों में पेंडिंग पड़ा रहा। अब जब एक बार पुनः हाई कोर्ट जबलपुर में याचिका दायर हुई है तो मामले में तेजी आई है। लेकिन इसके बावजूद भी पुनः सीईओ जिला पंचायत और उनकी टीम के द्वारा कराधान और करारोपण घोटाले में पर्दा ढकने का खेल किया जा रहा है।

गंगेव की 38 पंचायतें भी हैं सम्मिलित लेकिन दोषी ही कर रहे अपने भ्रष्टाचार की जांच

    जनपद पंचायत गंगेव जिला रीवा में ढाई वर्ष पूर्व हुए 12 करोड़ 72 लाख रुपए के कराधन घोटाले में शासन व प्रशासन द्वारा लीपापोती का कार्य किया जा रहा है। जनपद पंचायत गंगेव के पूर्व उपाध्यक्ष संजय पांडेय और आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा उक्त घोटाले  की गई शिकायत पर संभाग आयुक्त व कलेक्टर रीवा द्वारा कराए गए जांच में जिन लोगों को दोषी पाया गया था। इसके बाद उच्च न्यायालय के स्थगन का हवाला देकर उनके विरुद्ध कार्यवाही नहीं की गई बल्कि जिला पंचायत रीवा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने उपरोक्त सक्षम अधिकारियों के कार्यवाही के आदेश के बाद भी प्रकरण में संलिप्त ग्राम पंचायतों के सरपंच-सचिवों को निर्दोष होने का प्रमाण पत्र जिला पंचायत सीईओ रीवा ने दिया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल में दर्ज शिकायत की जांच 5 फरवरी 2020 से अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा एवी खरे को दल प्रमुख बनाकर सौंपी गई थी। शासन व प्रशासन के दबाव में आज तक जांच नहीं कर पाऐ और उन्हीं को लोकायुक्त की जांच दल का प्रमुख बनाकर उन्हीं बिंदुओं की शिकायत की जांच जो लोकायुक्त भोपाल में दर्ज है कराए जाने का संशोधित आदेश सीईओ जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेड़े ने आदेश क्रमांक 2127 दिनांक 06/04/2022 को दिया है। लोकायुक्त की जांच के लिए पूर्व में गठित दल प्रमुख कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 1 रीवा का जांच में दोष सिर्फ इतना है की दल गठन के बाद से सीईओ जनपद गंगेव व सीईओ जिला पंचायत रीवा से करारोपण संबंधी दस्तावेजों की मांग के लिए पत्र व लगभग 10- 10 स्मरण पत्र जारी किए। इसके बाद भी उन्हें अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। सूत्रों के द्वारा बताया गया की लोकायुक्त की जांच दल परिवर्तित किए जाने पर प्रकरण में लीपापोती की आशंका थी परंतु दिनांक 20/04/2022 को उक्त जांच में शिकायतकर्ताओं ने अपना लिखित पक्ष रखने जब जिला पंचायत रीवा पहुंचे तो प्रकरण का आरोपी निलंबित लिपिक राजेश सोनी जांच अधिकारी के कक्ष में कई आरोपी सरपंच व सचिवों के साथ लोकायुक्त का तथ्यात्मक प्रतिवेदन तैयार करा रहा था। आरोपी प्रमोद ओझा व बालेंद्र पांडय पहले से शासन व प्रशासन के संरक्षण में जनपद गंगेव में ही पदस्थ रखकर जांच के लिए कूट रचित दस्तावेज तैयार करा रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संभाग आयुक्त, कलेक्टर के जांच में दोषी पाए गए सरपंच सचिवों से मिलकर सीईओ जिला पंचायत द्वारा करारोपण की राशि मे घोटाले में निर्दोष होने का प्रमाण पत्र दिया गया है। जबकि उक्त जांचों में माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन है। आरोपियों के पक्ष में फैसला नहीं हुआ है। शिकायतकर्ताओं ने प्रकरण के आरोपी प्रमोद ओझा, बालेंद्र पांडे के जनपद गंगेव एवं निलंबन पश्चात जिला पंचायत में संलग्न राजेश सोनी व अन्य को अन्यत्र हटा कर निष्पक्ष दल का गठन कर जांच कराए जाने की शासन व प्रशासन से मांग की है।

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