भारत में सबसे तेजी से उभरता हुआ वेब न्यूज़ चैनल

असफल हुई सरकार की व्यवस्था, शहडोल में शर्मसार करने वाली घटना प्रशासन मौन

283
Above News

बाईक पर दादा का शव ले कर निकला पोता

शहडोल। सरकारी घोषणाओं और सहयोगियों में भलाई ही जनता को स्वास्थ्य से लेकर जीवन-यापन की हर सुविधा का लाइसेंस हो, पर आयोजनों में इन दावों को केवल कागजी ही साबित कर रही हैं। मुख्यालय मुख्यालय में सोमवार को हुकूमत की कहानी और करीने के अंतर को उजागर करने वाला ऐसा ही एक और मंजर दिखाई दिया। जब एक व्यवस्था न के कारण एक पद को अपने दादा के शव मोटरसाईकिल पर ले जाने के लिए मजबूर किया गया। रविवार की सुबह ललुइया बागा 56 निवासी धुरवार की मौत जिला अस्पताल में हो गई। घर के बुजुर्ग सदस्य की मृत्यु से संबंधित परिवार के सदस्य काफी देर तक अस्पताल प्रबंधन से शव को घर तक रीच की पेट्रोलियम कंपनी रहे। जब सामान नहीं हुआ तो स्थान ने बाइक पर ही शव को ले जाने का फैसला लिया।

बाइक पर मृत व्यक्ति
जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर बाइक पर ले जाए जा रहे शव को जिसने भी देखा, हैरान रह गया। क्योंकि मृतक का शव भी जीवित व्यक्ति की तरह मारा गया था, उसके लिए शव यात्रा में 3 लोग सवार थे। इस दृश्य में न सिर्फ एक बार फिर से संत समाज को शर्मसार किया गया बल्कि पूरी व्यवस्था को ही कटघरे में खड़ा किया गया है। प्रश्न यह है कि सरकार के कार्यक्रम और योजनाएँ आवश्यक समय पर कहाँ चलायी जाती हैं। संत अधिकारियों को हर महीने लाखों चने की तनख्वाह किसलिए दी जाती है। क्या उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है.

इलाज के आभाव में छोड़ें प्राण
पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि ललुइया को ब्लड डिसऑर्डर की शिकायत के बाद जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया था। गैजेट समस्या के बावजूद घंटों तक अस्पताल का कोई डॉक्टर उसे देखने नहीं आया। जिससे मरीज़ की तबियत चली गई और अंतत: उसकी मृत्यु हो गई। मौत के बाद जब एज़ल ने जिला अस्पताल प्रबंधन से वाहन की मांग की तो कहा गया कि रविवार की छुट्टी है, इसलिए वाहनों की व्यवस्था नहीं हो सकी। जिसके बाद जबरदस्ती शव को बाइक पर ही ले जाना पड़ा।

हटाये गए हेल्प डेस्क के स्टाफ को
बताया गया है कि अंदर से बाहर तक स्वास्थ्य सुविधाओं के साइन बोर्ड और पोस्टों से पाटले जिला अस्पताल के हेल्प डेस्क पर महीने भर से कोई भी स्टाफ स्टाफ नहीं है। किसी भी तरह की मदद और जानकारी के लिए किसी व्यक्ति या परिवार को कोई जानकारी नहीं मिल सकती है। यदि यह सुविधा सक्रिय होती तो लुलुइया के युवाओं को कोई सहायता मिल सकती थी। दस्तावेज़ में बताया गया है कि पिछले एक महीने से सिविल सर्जनों द्वारा ऑफिस के कर्मचारियों को हटा दिया गया है। सोशल मीडिया पर इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल के अधिकारी अब खिंसें निपोर कर मामले को लीपने में शामिल हो गए हैं।

खबरों के अपडेट पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy
E-Paper