नरवाई में आग लगाना प्रतिबंधित, आदेश जारी
विकास सचदेवा की ब्यूरो रिपोर्ट
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ केदार सिंह ने आदेश जारी किया है कि जिले में धान एवं गेंहू मुख्य फसल के रूप में की जा रही है। उक्त फसलों की कटाई मुख्य रूप से कंबाईन हार्वेस्टर के माध्यम से की जाती है। कंबाईन हार्वेस्टर से कटाई उपरांत फसलों की नरवाई में आग लगाने की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। आग लगाने से भूमि की उर्वरा शक्ति में कमी होती है तथा पर्यावरण भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के द्वारा नरवाई में आग लगाने की घटनाओं की सेटेलाईट मैपिंग की जा रही है। नरवाई में आग लगाना कृषि के लिये नुकशानदायक होने के साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी हानिकारक है। इसके कारण विगत वर्षों में गंभीर स्वरूप की अग्नि दुर्घटनायें घटित हुई है तथा व्यापक संपत्ति की हानि होती है। ग्रीष्म ऋतु में बढ़ते जल संकट में इससे बढोत्तरी तो होती है ही साथ ही कानून व्यवस्था के लिये विपरीत परिस्थितियां निर्मित होती है। खेत में आग के अनियंत्रित होने पर जन, धन, संपत्ति, प्राकृतिक वनस्पति एवं जीव जन्तु आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे व्यापक नुकसान होता है। खेत की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु इससे नष्ट होते हैं, जिससे खेत की उर्वरा शक्ति शनैः शैनः घट रही है और उत्पादन प्रभावित होता है। खेत में पड़ा कचरा भूसा डंठल सड़ने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं, जिन्हें जलाकर नष्ट करना ऊर्जा को नष्ट करना है। आग लगाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
जारी ओदश में समस्त हार्वेस्टर मालिकों को निर्देशित किया गया है कि फसलों की कटाई में उपयोग किये जाने वाले कंबाईन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) का उपयोग किया जाना अनिवार्य होगा। कंबाईन हार्वेस्टर के साथ एसएमएस अथवा स्ट्रा रीपर में से कोई भी एक मशीन साथ में रखना अनिवार्य होगा। फसलों की कटाई उपरांत नरवाई में आग लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित होगा साथ ही नरवाई में आग लगाना दण्डनीय होगा। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरूध्द भा.न्या.सं. की धारा 223 के अंतर्गत कार्यवाही की जावेगी।

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