अमर बेल बने जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी और जनता के हक पर सोते रहे ब्यौहारी विधायक

ब्यौहारी में विकास के नाम पर ‘बेंच घोटाला’ और प्रशासनिक अराजकता की खुली दास्तान
बेबाक शक्ति पत्रकार अखिलेश कुमार शर्मा मो नंबर 7999140850
शहडोल।विकास के नाम पर जनता के पैसों को लीलने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और उनके संरक्षणदाताओं की उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है।ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों “जनता चुने नुमाइंदे, और नुमाइंदे पालें भ्रष्टाचार यही कड़वी हकीकत आम लोगों की जुबान पर है। एक तरफ जहां मध्य प्रदेश का आदिवासी बहुल अंचल शहडोल बुनियादी विकास के लिए तरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों की गहरी चुप्पी और प्रशासनिक अमले की मनमानी ने जनता के विश्वास का गला घोंट दिया है।अखबार ‘हिंदुस्तान की गूंज’ द्वारा पूर्व में उजागर किए गए 1.08 करोड़ रुपये के प्रीकास्ट कंक्रीट बेंच (सीमेंट बेंच) घोटाले में अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ आ चुका है। मामला सिर्फ एक भ्रष्ट अधिकारी डीके अहिरवार की तानाशाही और वित्तीय अनियमितताओं का नहीं है, बल्कि उस ब्यौहारी विधायक शरद जुगलाल कोल की संदिग्ध और निष्क्रिय भूमिका पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़े करता है, जिनकी नाक के नीचे जनता के धन का खुलेआम बंदरबांट होता रहा और वे गहरी नींद में सोते रहे।
ट्रांसफर के सारे नियम बौने, मलाईदार कुर्सियों पर काबिज डीके साहब
मध्य प्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी अधिकारी एक ही जिले में 5 साल से अधिक समय तक पदस्थ नहीं रह सकता। वर्ष 2024 की तबादला सूची में भी कई अधिकारियों को इधर-उधर किया गया, लेकिन शहडोल के जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी डीके अहिरवार पर इन नियमों का कोई असर नहीं हुआ। शहडोल के साथ-साथ इन्हें पड़ोसी जिले अनूपपुर का अतिरिक्त प्रभार और रीवा स्थित विंध्य विकास प्राधिकरण (VDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का भारी-भरकम जिम्मा भी थमा दिया गया है।आखिर कौन सी ऐसी जादुई ताकतें या राजनीतिक ‘कृपा’ है, जिसके चलते शासन के सारे कायदे-कानून डीके अहिरवार के सामने बौने साबित हो जाते हैं।यह अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक भ्रष्टाचार का प्रतीक है।
ब्यौहारी का प्रीकास्ट कंक्रीट बेंच घोटाला फाइलें दबाने का खेल और एडवांस भुगतान की लूट
ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के 120 प्रमुख चौक-चौराहों और शासकीय कार्यालयों में सीमेंट बेंच लगवाने के लिए ₹1,08, 81,585/- (लगभग 1.08 करोड़ रुपए)का भारी-भरकम बजट स्वीकृत हुआ था। नियमों के मुताबिक यह कार्य महज 2 महीने में पूरा होना था, लेकिन जिला योजना अधिकारी की शह पर इसे 11 महीने तक फाइलों में दबाकर रखा गया।वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर प्रदायक संस्था ‘एमपी स्टेट एग्रो कॉर्पोरेशन (शहडोल)’ को बिना धरातल पर काम हुए, नियमों के विरुद्ध जाकर 75% अग्रिम राशि यानी ₹81,61, 169/- का तुरंत भुगतान कर दिया गया। जब ‘हिंदुस्तान की गूंज’ ने इस सनसनीखेज घोटाले की पोल खोली, तब जाकर प्रशासन की नींद खुली। अब आनन- फानन में चार पहिया वाहनों और पिकअप के जरिए हड़बड़ी में बेंचों को रखकर कागजी खानापूर्ति और लीपापोती का मायाजाल रचा जा रहा है।
‘निष्क्रिय’ और ‘लापरवाह’ ब्यौहारी विधायक जनता के आंसुओं से बेपरवाह जनप्रतिनिधि साबित हो रहे…?
इस पूरे महाघोटाले में सबसे शर्मनाक पहलू ब्यौहारी के स्थानीय विधायक शरद जुगलाल कोल की चुप्पी और निष्क्रियता है। जिस सीमेंट बेंच का प्रस्ताव खुद विधायक जी ने दिया था, जब वह 11 महीने तक फाइलों में दबी रही और जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जाता रहा, तब माननीय विधायक जी क्या कर रहे थे।क्षेत्र की जनता ने शरद जुगलाल कोल को इसलिए चुना था कि वे उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे, लेकिन इस प्रकरण में उनकी संदिग्ध चुप्पी ने यह साबित कर दिया है कि या तो वे अपनी सुस्त कार्यशैली के कारण पूरी तरह लापरवाह हैं, या फिर इस प्रशासनिक गठजोड़ से आंखें मूंदकर बैठे हैं।क्या विधायक महोदय सिर्फ मलाई काटने और अपनी कुर्सी बचाने के लिए जनता के प्रतिनिधि बने हैं। क्या उन्हें जनता के एक-एक पाई के नुकसान का कोई अहसास नहीं है।
बचने की फिराक में नेता और अधिकारी
क्षेत्र की भलमनसाहत और आदिवासी जनता ने शरद जुगलाल कोल को इसलिए चुना था कि वे उनके अधिकारों की ढाल बनेंगे, लेकिन इस पूरे प्रकरण में उनकी चुप्पी ने यह साबित कर दिया है कि वे जनता के प्रति कितने संवेदनहीन और लापरवाह हैं।आज जब पूरा सच जनता के सामने आ चुका है, तब भी ब्यौहारी विधायक जी की तरफ से इस भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कदम या सख्त बयान सामने न आना, उनकी कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करता है। क्या ब्यौहारी विधायक महोदय सिर्फ कागजी उद्घाटन और फीता काटने तक सीमित रह गए हैं।
क्या कलेक्टर और कमिश्नर करेंगे कोई कार्यवाही
क्या शहडोल कलेक्टर और रीवा कमिश्नर इस 1.08 करोड़ के महाघोटाले और 11 साल से जमे अधिकारी डीके अहिरवार के साम्राज्य पर कोई सख्त कार्यवाही करेंगे। या फिर ब्यौहारी विधायक की तरह प्रशासनिक तंत्र भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगा।ब्यौहारी की जनता अब जाग चुकी है और वह अपने एक-एक पाई का हिसाब मांग रही है। यदि अब भी इस पर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर बुलडोजर कार्यवाही नहीं हुई, तो जनता का जनप्रतिनिधियों और शासन से पूरी तरह भरोसा उठ जाएगा।अब देखना यह है कि ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक, कमिश्नर, कलेक्टर इस मामले में क्या कार्यवाही करते हैं।
शेष अगले अंक में…….

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