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विश्व के प्रथम अंतरराष्ट्रीय अखिल वैश्विक क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट का हुआ गठन

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नई दिल्ली: वर्तमान में संपूर्ण विश्व की स्थिति नेतृत्व विहीन हो चुकी है संपूर्ण मानव जीव जन्तु सहित हमारी प्रकृति भी मानव की प्रवृत्ति के कारण अंत के निकट है सनातन धर्म वेद शास्त्रों के अनुसार वर्तमान परिवेश को परिवर्तन की आवश्यकता है और यह परिवर्तन धरती के भूमि पुत्र क्षत्रिय ही ला सकते है वसुधैव कुटुंबकम, धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः। तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत् को संपूर्ण मानव जाती को समझने हेतु वैश्विक क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट का गठन किया गया है। सम्पूर्ण विश्व को मानवता के धर्म को मात्र सामर्थ्यवान क्षत्रिय ही नेतृत्व कर सकता है, संपूर्ण भारतवर्ष अपितु विश्व में मात्र प्रथम क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट का गठन किया गया है। जिसमें विभिन्न क्षत्रिय श्रेष्ठ परिवारों का नेतृत्व करने वाले 12 सदस्य मानित पुरुष वा मातृशक्ति एक निश्चित परिवर्तित काल के लिए हम सभी को मार्गदर्शन प्राप्त होना है इसी के तहत डा.संजीव सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष, कृष्ण प्रताप सिंह को अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष, अंजता सिंह को राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष और शक्ति सिंह चंदेल को अंतराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, जितेन्द्र कुमार सिंह को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राघवेन्द्र सिंह राजावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, उमेश कुमार सिंह को राष्ट्रीय महासचिव प्रमुख, शैल सिंह परिहार को महिला उपाध्यक्ष प्रमुख और अरूण सिंह शेखावत को राष्ट्रीय कानुनी सलाहकार और सुरेश सिंह वैस को राष्ट्रीय सचिव, नरेन्द्र सिंह राणा को संगठन मंत्री, हेमलता तंवर को महिला राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।
अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण प्रताप सिंह का कहना है कि ट्रस्ट का मुख्य उदेश्य क्षत्रिय समाज में व्यापक सामाजिक कुरीतियों को खत्म करना। क्षत्रियांे का सर्वांगीण विकास एवं उन्नति। क्षत्रिय गुरूकुल की स्थापना। नौकरी में समस्त आरक्षण व एससी एक्ट खत्म करना, योग्यता के आधार पर नौकरी। क्षत्रिय समाज में एकता सद्भावना एवं सहयोग को बढ़ावा देना। 12 वीं पास करने के बाद 3 वर्ष सेना में अनिवार्य। क्षत्रिय युवाओं के शिक्षा के लिए प्रचार या प्रसार करना। समाज के लोगों को मानसिक, आध्यामिक, नैतिक विकास करना। धर्म एवं देश की रक्षा करना। समाज के लोगों को रोजगार देने एवं रोजगार उन्मूख कार्यक्रम चलाना। शिक्षा नीति में हिंदु धर्म के अध्यात्म और क्षत्रिय इतिहास का अध्ययन शामिल कराना। कमजोर राजपूत कन्याओं का विवाह में सहयोग, विधवा विवाह को प्रोत्साहित एवं समूह विवाह संपन्न कराना व दहेज प्रथा समाप्त करना। महिला वर्ग को दोयम दर्ज से बराबर का दर्जा दिलाना। देश में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सामाजिक कार्य करना है।

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