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MP//Rewa// कैथा मन्दिर प्रांगण में आयोजित हुई किसान संगोष्ठी// विशेषज्ञों ने बताए उन्नत खेती के गुर//

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दिनाँक 30 मार्च 2022 को रीवा जिले के गंगेव जनपद अंतर्गत थाना गढ़ क्षेत्र के ग्राम कैथा हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण में किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें कृषि विशेषज्ञ आकर उन्नत खेती के विषय सहित धान की फसलों के विषय में जानकारी दिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने की।
उपस्थित कृषि विशेषज्ञों के द्वारा बताया गया की धान का पैरा अर्थात नरवई में आग नहीं लगानी चाहिए और उसे खाद बनाई जानी चाहिए। कृषि विशेषज्ञों ने यह भी बताया की धान की रोपाई के साथ कैसे और कितने समय अंतराल में यूरिया एवं डीएपी का उपयोग किया जाना चाहिए। एक विशेषज्ञ ने कहा कि डीएपी का उपयोग ऊपर से न किया जाकर बल्कि जमीन के अंदर किया जाए तो उससे 30% डीएपी की खपत बचाई जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि धान की रोपाई 12 से 20 दिन के भीतर कर देनी चाहिए और रोपाई के 25 दिन बाद यूरिया के साथ जिंक का उपयोग करना चाहिए। रोपाई से 45 से 60 दिन के भीतर धान में पुनः कम मात्रा में यूरिया और उसके साथ पोटाश का उपयोग करना चाहिए। इसी प्रकार उन्होंने यह भी कहा कि जब धान गलेथ में रहती है उस समय भी थोड़ी मात्रा में यूरिया का उपयोग करने से धान की फसल एक साथ बाहर आ जाती है और मक्खियों के द्वारा बीमारी का शिकार नहीं होती है।कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि किसानों को धीरे धीरे केमिकल फर्टीलाइजर पर निर्भरता खत्म कर जैविक खादों की तरफ आना चाहिए क्योंकि आज केमिकल खादों की वजह से बीमारियां बहुत तेजी से फैल रही है और आज उत्पादन के चक्कर में किसान की मजबूरी भी हो गई है कि वह इन खादों का उपयोग करता है लेकिन इसे धीरे-धीरे बंद किया जा सकता है और देश को स्वस्थ और खुशहाल बनाया जा सकता है। फर्टिलाइजर के विषय में कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि जितनी यूरिया किसान एक बार में उपयोग करते हैं उसे एक बार में उपयोग न करते हुए बल्कि तीन से चार बार में थोड़ा-थोड़ा उपयोग करें तो धान को बीमारी से बचाया जा सकता है। उनका कहना था कि एक साथ अधिक यूरिया के द्वारा धान में बीमारी आ जाती है इसलिए उसकी मात्रा सीमित करना पड़ेगा। इस अवसर पर आसपास के ग्राम क्षेत्र के किसान भाई उपस्थित रहे जिसमें मुख्य रुप से अरुण सिंह परिहार, बाबा सिंह परिहार, पुष्पराज सिंह परिहार, शैलेंद्र पटेल, लाल बहादुर पटेल, रघुनंदन प्रसाद लोनिया, सुरेश पटेल, भद्रिका द्विवेदी, संपूर्णानंद द्विवेदी, यज्ञभान पटे, बुद्धसेन पटेल सहित अन्य दर्जनों किसान उपस्थित रहे।


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