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MP//Rewa- सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने गंगेव खंड पंचायत अधिकारी बालेंद्र पांडेय के विरुद्ध दिए अनुशासनात्मक कार्यवाही के आदेश// आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के एक मामले में की गयी बड़ी कार्यवाही// सूचना न देने और गलत जानकारी का हलफनामा प्रस्तुत करने पर की गई बड़ी कार्यवाही//

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    मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने एक बार पुनः बड़ी कार्यवाही की है। मामला रीवा जिले के गंगेव जनपद का है जिसमें आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा 7 पंचायतों के विषय में उनकी प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृत, पूर्णता प्रमाण पत्र और साथ में माप पुस्तिका आदि की जानकारी चाही गई थी। लेकिन तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं खंड पंचायत अधिकारी गंगेव बालेंद्र पांडेय के द्वारा आवेदन को 7 पंचायतों को अंतरित किया गया और जो जानकारी उनके कार्यालय में उपलब्ध थी वह एएस-टीएस और पूर्णता प्रमाण पत्र आदि की जानकारी आवेदक को उपलब्ध नहीं करवाई। मामले की प्रथम अपील हुई और फिर उसके बाद द्वितीय अपील सूचना आयोग भोपाल में की गई। वर्ष 2021 की द्वितीय अपील की सुनवाई पिछले मार्च 2022 में करते हुए राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने खंड पंचायत अधिकारी गंगेव बालेंद्र पांडेय को 25 हज़ार रु जुर्माने की कारण बताओ नोटिस जारी किया था। लेकिन उनके द्वारा झूठा हलफनामा प्रस्तुत कर बताया गया कि जानकारी उनके कार्यालय में थी ही नहीं जबकि धारा 19(8) और धारा 18 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सूचना आयोग ने जांच की और पाया कि आवेदक के द्वारा चाही गई काफी जानकारी ऑनलाइन और सरल तरीके से ब्लॉक स्तर की लॉगिन आईडी पर ही उपलब्ध रहती है। अतः भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए ऐसा किया गया। गलत हलफनामे को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए सूचना आयोग ने इसे आपराधिक कृत्य करार दिया और जिला पंचायत रीवा सीईओ स्वप्निल वानखेडे को बालेंद्र पांडेय के विरुद्ध सिविल सेवा आचरण अधिनियम के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

इस अधिनियम के तहत होगी कार्यवाही

सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने आदेश में कहा है की लोक सूचना अधिकारी एवं खंड पंचायत अधिकारी बालेंद्र पांडेय के द्वारा मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 की धारा 1, 2 और 3 का उल्लंघन किया गया है और साथ में मध्यप्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील अधिनियम 1966 की धारा 10 का भी उल्लंघन किया गया है जिसके तहत इनके विरुद्ध कार्यवाही करते हुए सीईओ जिला पंचायत रीवा स्वप्निल वानखेड़े को आदेशित किया गया है कि वह अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए आयोगों को पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।

धारा 4 के तहत पंचायत पोर्टल पर अपडेट नहीं जानकारी

   अपने आदेश में राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने एक टिप्पणी करते हुए कहा है कि अधिकतर जानकारी धारा 4 के तहत पंचायत पोर्टल पर  उपलब्ध रहती है जिसे आवेदक प्राप्त कर सकते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि मध्यप्रदेश राज्य सरकार का पंचायत दर्पण पोर्टल वर्षों से अपडेट नहीं हुआ है वहीं मनरेगा पोर्टल पर भी जानकारी अपडेट नहीं की जाती है। जानकारों का मानना और तथ्य यह है कि जो जानकारी पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होती है वह बहुत ही सीमित स्वभाव की होती है जो न तो कोर्ट में काम आती और न ही शिकायतों की जांच में। ज्यादातर कोर्ट में प्रमाणित जानकारी मांगी जाती है। पंचायतों का हाल यह है की उनके द्वारा शिकायतकर्ताओं की शिकायत की जांच में दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं जिसकी वजह से आरटीआई से प्राप्त जानकारी में पता चला है कई वर्षों से सैकड़ों शिकायतें लंबित पड़ी हुई है। 

   पंचायत विभाग में जांच एजेंसी के तौर पर कार्य करने वाले ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधीक्षण यंत्री कार्यपालन यंत्री और सीईओ जिला पंचायत से जब इस विषय में बात की जाती है तो उनके द्वारा कहा जाता है कि हमारे द्वारा धारा 92(1) की नोटिस दी जाती है लेकिन इसके बावजूद भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं। सवाल है की जानकारी न तो आवेदक को आरटीआई से मिल पा रही है और न ही धारा 4 के तहत वेब पोर्टल पर उस उस स्वरूप में मिल रही है जिसे कोर्ट मान्य करता हो और जो जांच के लिए मान्य हो तो यह जानकारी आखिर मिलेगी कहां से और शिकायतों पर जांच कब होगी? 

     बता दें रीवा जिले में चाहे वह कराधान घोटाला हो, एलईडी लाइट घोटाला या फिर 14 वें अथवा 15 वें वित्त आयोग का घोटाला हो या फिर मनरेगा में निरंतर चल रहा भ्रष्टाचार हो इन सब के मामले बहुतायत में प्रकाश में आए हैं लेकिन हालात यह हैं कि किसी भी मामले में कोई अंतिम कार्यवाही अब तक नहीं हो पाई है जिसकी वजह से पूरे प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लग जाता है। 

     जानकारों का कहना है सूचना आयोग ऐसे में एक बड़ा सहारा था जिसमें भ्रष्टाचार की काफी सूचनाएं बाहर आ जाती थीं लेकिन उस पर भी न तो आरटीआई के माध्यम से प्रमाणित दस्तावेज के रूप में और न ही कानून की धारा 4 के तहत जानकारियों का न मिल पाना और आयोग के आदेशों काफी हल्के में लिया जाना काफी चिंता का विषय है।

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