कृषक खेत पाठशाला में किसानों को प्राकृतिक खेती, समन्वित कृषि प्रणाली एवं मृदा परीक्षण के प्रति किया जागरूक

Vikas Sachdev division reporter
प्राकृतिक खेती : टिकाऊ कृषि का आधार और आत्मनिर्भर किसान
– जिले की सोहागपुर जनपद पंचायत के ग्राम बरहा में 06 कृषक खेत पाठशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मुगेन्द्र सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा कृषि में विविधीकरण अपनाने की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. मुगेन्द्र सिंह ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं, आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, कृषि यंत्रों के उपयोग तथा फसल सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मुर्गीपालन, सब्जी उत्पादन एवं मशरूम की खेती को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों एवं तकनीकों की जानकारी लेकर खेती करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि किसान अपने खेत की मिट्टी एवं पानी की उपलब्धता और प्रकार के आधार पर फसलों का चयन करें। साथ ही फसल विविधीकरण पर विशेष ध्यान देते हुए अनाज वाली फसलों के साथ दलहन, तिलहन एवं कंद वाली फसलों की खेती भी करें।
कार्यक्रम में डॉ. बी.के. प्रजापति ने समन्वित कृषि प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों को जैविक दवाओं के निर्माण की जानकारी देते हुए ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र एवं जीवामृत तैयार करने की विधि समझाई। किसानों को फसल में कीट नियंत्रण के लिए स्टिकी ट्रैप के उपयोग की सलाह भी दी गई। बताया गया कि स्टिकी ट्रैप के उपयोग से काफी हद तक कीटों का नियंत्रण किया जा सकता है और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
मृदा परीक्षण पर दिया विशेष जोर
कृषक खेत पाठशाला में किसानों को मिट्टी परीक्षण कराने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित किया गया। बताया गया कि मृदा परीक्षण के माध्यम से मिट्टी में उपलब्ध पीएच, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक एवं लोहा जैसे पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त होती है। फसल की आवश्यकता के अनुसार रासायनिक दवाओं एवं उर्वरकों के उपयोग की जानकारी देते हुए उनकी मात्रा एवं उचित समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई।
विकासखंड तकनीकी प्रबंधक, विकासखंड सोहागपुर द्वारा श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत शीघ्र प्रारंभ होने वाले कोदो-कुटकी उपार्जन पंजीयन के संबंध में किसानों को जानकारी दी गई। साथ ही प्राकृतिक एवं जैविक खेती के स्वास्थ्य तथा मृदा पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया।
सहायक तकनीकी प्रबंधक द्वारा पशुपालन के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा इससे होने वाले लाभों की जानकारी किसानों को दी गई।

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