MP//Rewa// MP breaking- धारा 2(जे)(1) के तहत एक्टिविस्ट ने खरीदी केंद्र का किया निरीक्षण*

मप्र में एकबार फिर सूचना के अधिकार की शक्ति का प्रयोग सामने आया है। आरटीआई की धारा 2(जे)(1) के तहत एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा रीवा के खरीदी केंद्रों की व्यवस्था का निरीक्षण कर जायजा लिया गया जिसमे काफी कमियां सामने आई हैं जिन्हें जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक श्री एमएनएच खान ने तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं।
दिनांक 31 दिसंबर 2020 सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 2(जे)(1) के तहत रीवा जिले के चोरहटा खरीदी केंद्र का निरीक्षण किया गया। खरीदी केंद्र के निरीक्षण के दौरान जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक श्री एमएनएच खान, एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी, अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्रा, अरुणेंद्र पटेल, सत्येंद्र सिंह सहित खरीदी केंद्र प्रबंधक और दर्जनों किसान उपस्थित रहे। खरीदी केंद्र में धान की गुणवत्ता देखी गयी जिसमे आर्द्रता 12.5 से लेकर 18 और 19 तक पाई गई। बोरी का वजन किया गया तो तुलाई के दौरान बोरी का बजन 40 किलो 710 ग्राम से 40 किलो 900 ग्राम तक पाया गया। गोदाम के अंदर रखे बोरी की बजन में 39 किलो 400 ग्राम से लेकर 39 किलो 900 ग्राम तक कि बजन पाई गई जो 40 किलो 600 ग्राम स्टैण्डर्ड तुलाई और सिलाई के बाद काफी कम कही जा सकती है। खरीदी केंद्र में किसानों की सुविधाओं से संबंधित पीने का पानी, उठने बैठने की समुचित व्यवस्था, नोटिस बोर्ड, तुलाई मशीन, लेबर आदि समुचित नही पाए गए जिन्हें उपस्थित फ़ूड कंट्रोलर एमएनएच खान के द्वारा जल्द व्यवस्था सुधार के निर्देश दिए गए। किसानों ने बताया कि ट्रेक्टर ट्रैक ठीक न होने और ट्रैक में पानी भरने से ट्रेक्टर पलटते समय कुछ किसानों को गंभीर चोट लगते लगते बची। कंट्रोलर ने जल्द ही मोरम मिट्टी डालने और ट्रैक 24 घण्टे में ठीक करने के निर्देश दिए।
खरीदी केंद्र में किसानों ने व्यवस्था सुधार की माग की है और बिना वापस गए धान खरीदी किये जाने की माग की है।
प्रदेश में RTI की धारा 2(जे)(1) के तहत खरीदी केंद्र निरीक्षण का यह पहला मामला
बता दें कि मप्र में किसी भी धान खरीदी केंद्र के निरीक्षण सम्बन्धी यह पहला मामला है जिसमे सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 को धारा 2(जे)(1) का प्रयोग कर सक्षम अधिकारी की उपस्थिति में खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया जाकर किसानों की व्यवस्था का जायजा लिया गया और किसानों की समस्या से रूबरू हुए। जहां एक तरफ किसान बिल को लेकर किसानों का आंदोलन चल रहा है वहीं किसानों की स्थिति को देखते हुए आरटीआई की धारा 2(जे)(1) के तहत निरीक्षण किये जाने से आम जनता और किसानों को क्या अधिकार प्राप्त हैं और कैसे वह इसका प्रयोग कर अपने अधिकारों को बेहतर जान सकते हैं यह अच्छी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इससे खरीदी केंद्रों और समितियों में किसानों के होने वाले शोषण को काफी हद तक रोंका जा सकेगा।

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