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MP//Rewa// 34 वें राष्ट्रीय वेबिनार में RTI और सामान्य प्रशासन पर हुई चर्चा// देश के कोने कोने से पार्टिसिपेंट्स ने रखे सवाल, तो सूचना आयुक्तों ने दिए जबाब।।

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सूचना के अधिकार कानून को जन जन तक पहुंचाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह की अध्यक्षता में प्रत्येक रविवार को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक जूम मीटिंग वेबीनार का आयोजन किया जाता है जिसमें देश के कोने कोने से आरटीआई कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, सिविल राइट्स एक्टिविस्ट और आरटीआई यूजर भाग लेते हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, पूर्व राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप एवं माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु सम्मिलित होते हैं। रविवार 14 फरवरी 2021 को 34 वें राष्ट्रीय जूम मीटिंग का आयोजन किया गया जिसका संयोजन, प्रबंधन एवं समन्वयन का कार्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह एवं छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त रूप से आरटीआई रिवॉल्यूशनरी ग्रुप इंडिया एवं छत्तीसगढ़ से नेशनल आरटीआई ग्रुप के द्वारा किया गया।

   पार्टिसिपेंट्स ने पूंछे प्रश्न, सूचना आयुक्तों ने दिए जवाब

   इस बीच कार्यक्रम में पार्टिसिपेंट्स ने अपनी अपनी समस्याएं रखी जिसका जवाब वर्तमान एवं पूर्व सूचना आयुक्तों ने दिया। छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल ने लोक सूचना अधिकारियों की नियुक्ति के विषय में जानकारी चाही तो पूर्व राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने बताया कि राजस्थान में सचिव को लोक सूचना अधिकारी और सरपंच को प्रथम अपीलीय अधिकारी बनाया गया है। कई स्थान पर सरपंच को लोक सूचना अधिकारी और जनपद अध्यक्ष को प्रथम अपीलीय अधिकारी बनाया जाता है जबकु नियम सरकारी लोक प्राधिकारी को पीआईओ बनाने का है। पंकज ने कहा की कार्यालयों में आरटीआई आवेदन स्वीकार नहीं किये जाते हैं और आवेदकों को वापस कर दिया जाता है इस पर सूचना आयुक्त ने कहा कि इस स्थिति से बचने के लिए आवेदकों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से आरटीआई आवेदन भेजना चाहिए। डॉक्टर सदाचारी सिंह तोमर ने बताया कि सतना में कलेक्टर कार्यालय में उन्होंने कोर्ट फीस के माध्यम से स्टांप ड्यूटी के द्वारा फीस पे की थी जिस पर 90 दिन के बाद जानकारी दी गई कि कोर्ट स्टाम्प अवैध है। जिस पर तोमर ने बताया कि यह जानकारी समय पर दी जानी चाहिए थी। महाराष्ट्र से देवेंद्र होरे ने अपनी समस्या रखी जिसका समाधान पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने मराठी भाषा में ही किया। दिगंबर ने बताया कि उन्होंने आरटीआई आवेदन लगाया था तो प्रथम अपील में 5 पेशियां कर दी गई इस पर सूचना आयुक्तों ने बताया की पेशी में जाने की जरूरत नहीं है और समय व्यतीत होने के बाद सीधे द्वितीय अपील की जानी चाहिए। इस बात पर हाईकोर्ट इलाहाबाद का एक निर्णय जिसमें कहा गया है कि सूचना आयोग कोई कोर्ट नहीं है जिसमें बार-बार पेशी करवाई जाए का भी हवाला दिया गया। मेघराज सिंह ने उत्तर प्रदेश से बताया कि उन्होंने धारा 18 की शिकायत और 19(3) के तहत द्वितीय अपील आयोग में की थी लेकिन आयुक्त ने कहा कि धारा 18 के तहत शिकायत करने अथवा 19(3) के तहत अपील में एक ही होगी। इस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा की धारा 18 की शिकायत और धारा 19 की अपील के विषय में पहले भी कई बार चर्चा की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद धारा 18 में जानकारी प्रदान किए जाने का प्रावधान नहीं है अतः धारा 19(3) पर ही ज्यादा केंद्रित किया जाना चाहिए जिसमें जुर्माने और साथ में जानकारी का भी प्रावधान होता है।

       वकील अमित तिवारी ने बताया कि उन्होंने 2021 में मप्र सूचना आयोग में द्वितीय अपील की है लेकिन समाधान नहीं हो पाया है। इस पर राहुल सिंह ने कहा कि पहले से ही काफी प्रकरण पेंडिंग हैं जिनका निपटारा होने के बाद ही नए मामले देखे जा रहे। शैलेंद्र राजपूत ने बताया कि उन्होंने होशंगाबाद पुलिस विभाग में सर्विस बुक के विषय में जानकारी चाही थी जिस पर शैलेश गांधी ने कहा कि सर्विस बुक पब्लिक प्रॉपर्टी है और इसमें 8(1)(जे) के तहत जानकारी नहीं रोकी जा सकती। सागर मध्य प्रदेश से कैलाश सनौलिया ने बताया कि 9 वर्ष से उनकी कई अपील हैं जो मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में पेंडिंग पड़ी हुई हैं और निराकरण नहीं हुआ है। इस पर आत्मदीप ने कहा इस विषय में मुख्य सूचना आयुक्त को पत्र लिखकर निराकरण के लिए अपील की जानी चाहिए और यदि निपटारा नहीं होता तो उच्च न्यायालय में शरण ली जा सकती है।

       उत्तराखंड से डॉक्टर टीएन जौहर ने अपनी जमीन से संबंधित जानकारी के लिए आरटीआई लगाए जाने की बात की तो राहुल सिंह ने बताया कि यदि कोई आदेश न्यायालय से हुआ है उसके विषय में आरटीआई लगाकर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। राजस्थान से जयप्रकाश हरवानी ने कहा कि पाकिस्तान से सिंधियों के विस्थापन के समय भारत सरकार के द्वारा एक आदेश जारी किया गया था जिसमें जमीन का आवंटन किया गया था जिसकी जानकारी उन्होंने आरटीआई दायर कर मांगी तो बताया गया कि वह आदेश/कागज नष्ट हो चुका है। इस विषय में राहुल सिंह ने कहा कि यदि कागज नष्ट हुआ है तो एफ आई आर दर्ज करवाई जानी चाहिए। प्रयागराज से अशोक कुमार जायसवाल ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कोरोना लॉकडाउन के समय उनके खाते के संदर्भ में हुए भ्रष्टाचार के विषय में बताया और कहा कि बैंक मैनेजर से लेकर चीफ जनरल मैनेजर सभी मिले हुए हैं और उन्हें जानकारी नहीं दे रहे हैं और न ही एफ आई आर दर्ज करवा रहे हैं। इस पर राहुल सिंह ने कहा कि इस स्तर पर समस्या के समाधान के लिए कोर्ट में जाया जा सकता है तब कोर्ट पुलिस को एफ आई आर दर्ज किए जाने के लिए आदेशित करेगी। राहुल सिंह ने कहा कि जोधपुर में भी ऐसा ही एक प्रकरण हुआ था जिस पर कोर्ट ने समाधान देकर पुलिस को आदेशित किया था कि वह एफ आई आर दर्ज करें। 

     उत्तर प्रदेश से तरुण ने पूछा कि उन्होंने लोक सूचना अधिकारी से जानकारी मांगी थी परंतु 3 बिंदुओं के अतिरिक्त जानकारी नहीं मिली। इसी प्रकार दतिया से रामजी ने पूछा कि लोक सूचना अधिकारी आरटीआई की रसीद नहीं देते इसके लिए वह क्या करें। इस पर सूचना आयुक्त सिंह द्वारा बताया गया कि एमपी ऑनलाइन ट्रीज़री पेमेंट का सहारा लिया जा सकता है जो कि इस समय मध्यप्रदेश में प्रचलित नियम बन गया है। यद्यपि राहुल सिंह ने कहा की रसीद का अपना अलग ही महत्व होता है और क्योंकि हर व्यक्ति ऑनलाइन ट्रेजरी के माध्यम से पेमेंट नहीं कर सकता इसलिए रसीद का होना भी आवश्यक है। राधेश्याम गर्ग ने कहा कि उन्होंने आरटीआई लगाई थी लेकिन उसी कार्यालय में कार्यरत उनकी पत्नी के द्वारा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने के लिए एफ आई आर दर्ज करवा दी गई। इस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि वह राज्य सूचना आयोग में धारा 18 के तहत शिकायत करें। मध्य प्रदेश से महेंद्र गुप्ता ने कहा की उन्होंने धारा 18 के तहत शिकायत की थी जिसे अपील में बदल दिया गया तो क्या शिकायत को अपील में बदला जा सकता है? इस पर उपस्थित एक्सपर्ट ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है लेकिन धारा 18 एवं धारा 19 दोनों के अलग-अलग मापदंड हैं और अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग प्रयोग की जाती है जहां धारा 18 में जुर्माना लगाया जाता है वहीं धारा 19(3) में जुर्माना लगाने और जानकारी दिलवाए जाने का प्रावधान है।

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