MP//Rewa// आत्मा स्वयं साक्षात शिव और मति ही शक्ति स्वरूपा हैं।। कैथा में शिवमहापुराण कथा का छठा दिन।।

यज्ञों की पावन स्थली कैथा हनुमान मंदिर प्रांगण में दिनांक 1 मार्च से बैठकी के साथ प्रारंभ हुआ श्री शिव महापुराण महायज्ञ सतत जारी है। भागवत आचार्य डॉक्टर श्री गौरीशंकर शुक्ला जी के मुखारविंद से शिवकथा का श्रवणपान करने के लिए क्षेत्र से भारी संख्या में भक्त श्रद्धालु उपस्थित हो रहे हैं।
दिनांक 6 मार्च 2021 को कार्यक्रम का छठा दिन रहा। इस बीच भगवान शिव की लीलाओं का वर्णन आचार्य श्री के मुखारविंद से हुआ जिसे सुन भक्तगण आह्लादित हुए।
शिव के पूजन से नष्ट होते हैं पाप मिलता है मोक्ष
आचार्य डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला ने कथा के छठे दिवश बताया की भगवान शिव औघड़दानी हैं. सर्वज्ञ, सर्वव्यापी परमात्मा शिव कण कण में व्याप्त हैं. शास्त्रों में कहा गया आत्मा त्वं गिरिजा मतिः अर्थात हमारी आत्मा शिवस्वरूप है और मति अर्थात बुद्धि गिरिजा या पार्वती हैं. इस प्रकार शिव पार्वती की तुलना आत्मा और बुद्धि से की गयी है.
भगवान भोलेबाबा देवाधिदेव है. जिनके समक्ष काम की शक्ति शून्य है वह शिव है. शिव कल्याणकारी हैं. अशिव वेश में भी शिव कल्याणकारी हैं. शिव अजन्मा हैं. शिव और शक्ति का अर्धनारीश्वर स्वरूप ब्रह्म और प्रकृति का सुंदर सामंजस्य है. जिस प्रकार बिना भूमि के बीज उत्पन्न नही हो सकता ठीक वैसे ही शास्त्रों ने अर्धनारीश्वर स्वरूप के माध्यम से यह दर्शाया है की पुरुष और प्रकृति के बिना यह सृष्टि अपूर्ण है. प्रकृति को पुरुष और पुरुष को प्रकृति का संग होना चाहिए तभी सृष्टि का संचालन होता है. कहा गया है की शक्ति के बिना शिव शव के सामान हैं. शक्ति विहीन शिव निराकार परमात्मा हैं और जब शक्ति का प्रादुर्भाव होता है तभी शिव लीला प्रारम्भ होती है.
शिव को लीला करना पड़ता है ताकि सृष्टि का संचालन होता रहे अन्यथा सदाशिव तो स्वयं पूर्ण चिदानंद स्वरूप परमात्मा हैं .
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