कृषि विभाग किसानों को जारी की मौसम आधारित कृषि सलाह
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विकास सचदेव की ब्यूरो रिपोर्ट
गरज-चमक, तेज हवाओं एवं संभावित वर्षा को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील
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– उप संचालक कृषि ने जिले के किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी करते हुए आगामी दिनों में गरज-चमक, तेज हवाओं तथा वर्षा की संभावनाओं को देखते हुए आवश्यक सावधानियां बरतने का आग्रह किया है।
उन्होंने बताया कि गरज-चमक के साथ चलने वाली तेज हवाओं के कारण जनजीवन एवं कृषि गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। दृश्यता कम होने तथा सड़कों के फिसलनयुक्त होने की स्थिति में वाहन चालकों एवं किसानों को यातायात नियमों का विशेष रूप से पालन करना चाहिए। तेज हवाओं से सब्जी, फल एवं अन्य फसलों को भौतिक क्षति पहुंचने की आशंका है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वहीं आकाशीय बिजली से किसानों, पशुधन एवं कृषि अधोसंरचना को भी खतरा हो सकता है।
संभावित वर्षा को देखते हुए खेतों में जलभराव रोकने के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। कटाई, मड़ाई एवं अन्य कृषि कार्यों की योजना मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर बनाएं। बागवानी फसलों में कमजोर, सूखी एवं रोगग्रस्त शाखाओं की छंटाई करें ताकि तेज हवाओं से टूट-फूट की संभावना कम हो सके।
सूखे चारे को सुरक्षित स्थान पर संग्रहित करें, जिससे वर्षा के कारण उसके खराब होने की संभावना न रहे। वर्षा की संभावना को देखते हुए फिलहाल सिंचाई, उर्वरकों के उपयोग तथा कीटनाशक एवं फफूंदनाशक दवाओं के छिड़काव से बचें, क्योंकि इससे आर्थिक नुकसान होने की आशंका रहती है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे आम एवं नींबू के नए बाग लगाने के लिए गड्ढों की खुदाई का कार्य प्रारंभ करें। साथ ही पुराने एवं अनुपयोगी बेर के पेड़ों की शाखाओं की छंटाई कर बगीचों का प्रबंधन बेहतर बनाएं।
पशुपालकों को सलाह दी गई है कि पशुओं की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें पर्याप्त मात्रा में हरा चारा एवं खनिज मिश्रण उपलब्ध कराएं। इसके अलावा आगामी खरीफ सीजन की तैयारी के लिए खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराएं, ताकि मृदा स्वास्थ्य के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जा सके।
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें तथा किसी भी कृषि कार्य को करने से पहले मौसम की अद्यतन जानकारी अवश्य प्राप्त करें, जिससे संभावित नुकसान से बचा जा सके और कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सके।

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